{"_id":"5535058b5bf44a4e50339c78d6564f37","slug":"art-exhibition-and-artist-ashwini","type":"story","status":"publish","title_hn":"'कोयले से पेटिंग बना चुका हूं मैं'","category":{"title":"City and States Archives","title_hn":"शहर और राज्य आर्काइव","slug":"city-and-states-archives"}}
'कोयले से पेटिंग बना चुका हूं मैं'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 21 Feb 2014 01:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुदरत की गोद में जन्मा हूं, इसलिए कुदरत की पेंटिंग से जुड़ा हूं। पंजाब कला भवन के आर्ट एग्जिबिशन हाल में अपनी पेंटिंग एग्जिबिशन के बारे में आर्टिस्ट अश्वनी ने जानकारी देते हुए यह बात कही।
अश्वनी ने अपनी पेंटिंग्स को ‘प्रकृति का संगीत’ नाम से प्रस्तुत किया है। इसमें हिमाचल के बरमोहर, चंबा, मनाली, धर्मशाला और पंजाब के जिला होशियारपुर के कुछ इलाकों की कुदरती खूबसूरती को रंगों के माध्यम से कैनवास पर उकेरा गया है।
पंजाब के जिला होशियारपुर के गांव उड़मुड़ टांडा गांव में जन्मे अश्वनी ने पेंटिंग से जुड़े शौक के बारे में बताया कि वह बचपन से ही कुछ ना कुछ डिजाइन करते रहते थे।
विज्ञापन
...जब चूल्हे के कोयले से बनाई चिड़िया
चूल्हे में पड़े कोयलों से फर्श पर चिड़िया और कई तरह के डिजाइन बना देता था, जिसको देखकर घर में सब तारीफ करते थे।
स्कूल में भी अध्यापक पेंटिंग को देखकर फाइन आर्ट में ही अपना कैरियर बनाने की राय देते थे। स्कूल के बाद ऐसा ही किया और होशियारपुर के फाइन आर्ट कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद धीरे-धीरे पेंटिंग की कई बारीकियां सीखी।
एमए करते हुए मिला पहला पुरस्कार
फाइन आर्ट में एमए कर रहा था तो सीएल शर्मा से मुलाकात हुई। उन्होंने आल इंडिया पेंटिंग में उनके काम को भेजा। यहां पेंटिंग का उनको पहला पुरस्कार मिला।
अश्वनी का कहना है कि कुदरत को कैनवास पर उभारना बहुत मुश्किल है। आपको एक समय चुनना होता है, जिसके अनुसार अगले दिन भी आपको उसी समय उस पेंटिंग को बनाने के लिए बैठना पड़ता है।
कुदरत की पेंटिंग बनाने के लिए आपको जगह का तापमान, उस पर पड़ती धूप और हवाओं का ख्याल रखना पड़ता है। कई पेंटिंग बनाने में कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है।
विज्ञापन
अश्वनी ने अपनी पेंटिंग्स को ‘प्रकृति का संगीत’ नाम से प्रस्तुत किया है। इसमें हिमाचल के बरमोहर, चंबा, मनाली, धर्मशाला और पंजाब के जिला होशियारपुर के कुछ इलाकों की कुदरती खूबसूरती को रंगों के माध्यम से कैनवास पर उकेरा गया है।
विज्ञापन
पंजाब के जिला होशियारपुर के गांव उड़मुड़ टांडा गांव में जन्मे अश्वनी ने पेंटिंग से जुड़े शौक के बारे में बताया कि वह बचपन से ही कुछ ना कुछ डिजाइन करते रहते थे।
विज्ञापन
...जब चूल्हे के कोयले से बनाई चिड़िया
चूल्हे में पड़े कोयलों से फर्श पर चिड़िया और कई तरह के डिजाइन बना देता था, जिसको देखकर घर में सब तारीफ करते थे।
स्कूल में भी अध्यापक पेंटिंग को देखकर फाइन आर्ट में ही अपना कैरियर बनाने की राय देते थे। स्कूल के बाद ऐसा ही किया और होशियारपुर के फाइन आर्ट कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद धीरे-धीरे पेंटिंग की कई बारीकियां सीखी।
एमए करते हुए मिला पहला पुरस्कार
फाइन आर्ट में एमए कर रहा था तो सीएल शर्मा से मुलाकात हुई। उन्होंने आल इंडिया पेंटिंग में उनके काम को भेजा। यहां पेंटिंग का उनको पहला पुरस्कार मिला।
अश्वनी का कहना है कि कुदरत को कैनवास पर उभारना बहुत मुश्किल है। आपको एक समय चुनना होता है, जिसके अनुसार अगले दिन भी आपको उसी समय उस पेंटिंग को बनाने के लिए बैठना पड़ता है।
कुदरत की पेंटिंग बनाने के लिए आपको जगह का तापमान, उस पर पड़ती धूप और हवाओं का ख्याल रखना पड़ता है। कई पेंटिंग बनाने में कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है।