डीयू एडमिशन को झटका, आज नहीं आएगी कटऑफ
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यूजीसी और डीयू के बीच बढ़ते जा रहे टकराव ने दाखिलों पर ब्रेक लगा दिया है। डीयू कॉलेज प्रिंसिपल ने फैसला किया है कि विवाद सुलझने तक दाखिले शुरू नहीं होंगे। इस तरह से दाखिले के लिए मंगलवार को जारी होने वाली पहली लिस्ट भी नहीं आएगी। वहीं एसआरसीसी कॉलेज ने शेड्यूल के मुताबिक ही दाखिले करने का फैसला किया है।
वहीं, इस पूरे मामले पर डीयू प्रशासन ने चुप्पी साधी हुई है। कॉलेजों को दाखिले किस आधार पर करने हैं इस संबंध में भी अब तक कोई गाइडलाइंस नहीं भेजी गई है। मालूम हो कि एफवाईयूपी पर यूजीसी ने अपना रुख कड़ा करते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी और उसके सभी कॉलेजों को रविवार को आदेश था कि है कि सेशन 2014-15 के सभी दाखिले तीन साल के कोर्स में ही लिए जाएं।
फिर कब होगें दाखिले
यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि कोई कॉलेज इस आदेश की अवहेलना करता है तो उसे दिया जाने वाला अनुदान रोका जा सकता है। यूजीसी के आदेश के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रिंसिपल एसोसिएशन की नार्थ कैंपस स्थित खासला कॉलेज में बैठक हुई। इसमें दाखिले के संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में हिस्सा लेने वाले 36 कॉलेजों के प्रिंसिपल ने तया किया कि दाखिले को तब तक के लिए टाला दिया जाए जब तक कोई स्पष्ट गाइडलाइंस नहीं मिल जाती।
एसोसिएशन का कहना है कि फिलहाल उनके पास दाखिले टालने के अलावा कोई चारा नहीं है। इस तरह से पूर्व निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक 24 जून को आने वाली पहली कट ऑफ लिस्ट भी जारी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि एसआरसीसी कॉलेज को छोड़कर बैठक में ना पहुंचने वाले सभी कॉलेज के प्रिंसिपल ने दाखिले स्थगित करने पर सहमति दी है।
झगड़े में फंसे हजारों छात्र
यूजीसी की चेतावनी, ग्रांट रोकने की धमकी, एफवाईयूपी डिग्री को अवैध घोषित करने के बावजूद दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से चार वर्षीय पाठ्यक्रम को निरस्त करने के बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है। मानव संसाधन मंत्रालय में डीयू के कुलपति दिनेश सिंह की नाफरमानी से खलबली मच गई है। उच्च स्तरीय बैठक में कुलपति को हटाने के बारे में भी विचार किया गया।
कुलपति को हटाने के लिए मंत्रालय को सीधे राष्ट्रपति से अनुरोध करना होगा। भाजपा सरकार कुलपति को हटाने केलिए राष्ट्रपति के पास जाए या अभी इंतजार करे इस पर असमंजस बना हुआ है। उधर दिनेश सिंह के अड़ियल रवैये के पीछे भी माना जा रहा है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं का उन्हें समर्थन है। वे दबाव में फैसला बदलने के बजाय पद से हटना ही पसंद करें।
भाजपा के इशारे पर स्मृति ने दिए निर्देश
भाजपा के इशारे पर मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष तथा मंत्रालय के अफसरों को स्पष्ट निर्देश दे दिया है कि किसी भी स्थिति में इस फैसले को रद कराया जाए। पिछले दो दिनों की कवायद के बाद भी डीयू के कुलपति दिनेश सिंह ने दबाव में फैसला बदलने से इनकार कर दिया है।
सुबह मानव संसाधन मंत्री के निर्देश पर सचिव अशोक ठाकुर ने यूजीसी अध्यक्ष वेद प्रकाश तथा कुलपति दिनेश सिंह के साथ बैठक कर तत्काल एफवाईयूपी को निरस्त करने का निर्देश दिया, लेकिन देर शाम तक कुलपति की ओर से इस पर कोई जवाब यूजीसी को नहीं दिया गया।
इस कॉलेज में आज से ही होंगे दाखिले
दिल्ली के बाकी कॉलेजों में जहां दाखिले टल गए हैं। वहीं डीयू के नामी कॉलेज एसआरसीसी कॉलेज में दाखिले पूर्व निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक होंगे।
कॉलेज प्रिंसिपल डॉ पीसी जैन ने कहा कि हमारे यहां पास कोर्सेज हैं नहीं सिर्फ दो ही ऑनर्स कोर्सेज हैं। इस तरह से हमें दाखिले शुरु करने में परेशानी नहीं हैं। कया वह दाखिले चार साल केअंतर्गत लेंगे या तीन साल के अंतर्गत इस पर उन्होंने कहा कि यह अब डीयू को देखना है।
चार साल से तीन साल में कोर्सेज को परिवर्तित करने पर हमारेयहां चलने वाले कोर्सेज पर असर नहीं पड़ेगा। हमने डीयू को कट ऑफ भेज दिया है।
कांग्रेस-एनडीए मिल गए हैं
दिल्ली यूनिवर्सिटी के चार साल के डिग्री कोर्स को खत्म करने को लेकर भाजपा और वामदल ही नहीं बल्कि अब कांग्रेस भी सहमत हो गई है। पार्टी का कहना है कि उसके कार्यकाल में इसे प्रयोग के तौर पर लागू किया गया था, जो कि सफल नहीं हुआ। इसलिए पार्टी भी मानती है कि छात्रों के फायदे को देखते हुए डिग्री कोर्स को तीन साल का कर देना चाहिए।
हालांकि कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने एनडीए का विरोध करते हुए कहा कि मोदी सरकार सत्ता में आते ही पुराने फैसलों को बदलने का काम कर बदले की राजनीति कर रही है। मगर छात्रों और लोगों के गुस्से को देखते हुए पार्टी ने शाम आते आते स्पष्ट कर दिया कि वे भी चार साल के कोर्स को हटाने के पक्ष में है। कांग्रेस प्रवक्ता शोभा ओझा ने कहा कि छात्रों के हितों को देखते हुए पार्टी भी चाहती है कि तीन साल के कोर्स को जारी रखा जाए।
कोर्ट जा सकता है मामला
डीयू और यूजीसी के बीच विवाद न सुलझने के कारण एफवाईयूपी का मुद्दा कोर्ट का रुख करता दिखाई दे रहा है। बीते साल बीटेक कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्र अपने भविष्य को अधर में जाता देख अदालत जा सकते हैं। मामले में असमंजसता की स्थिति है। डीयू और यूजीसी में टकराव काफी बढ़ गया है, जिससे एडमिशन पर ब्रेक लग गया है।
छात्रों का कहना है कि बीटेक को खत्म नहीं किया जाना चाहिए, अगर अब उन्हें तीन वर्ष के तहत डिग्री मिलती है तो यह भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। डीयू के कई शिक्षक दबी जबान में यह स्वीकार करते हैं कि बीटेक में बीते साल दाखिला लेने वाले छात्रों के पास कोर्ट जाने का विकल्प खुला है। वह तर्क देते हैं कि छात्रों ने आईआईटी और अन्य संस्थानों को छोड़कर डीयू में बीटेक का विकल्प चुना, यदि यहां से बीटेक समाप्त किया जाता है तो सबसे ज्यादा दिक्कत इन्हीं छात्रों को होगी।
डीयू की स्वायत्तता पर हमला
डूटा के पूर्व अध्यक्ष और डीयू ईसी के सदस्य डॉ. आदित्य नारायण मिश्रा ने यूजीसी के आदेश को शैक्षणिक संस्थान के रूप में डीयू की स्वायत्तता पर हमला बताया है। उन्होंने चार वर्षीय प्रोग्राम को सही बताते हुए इसे लागू करने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि डीयू में चार वर्षीय प्रोग्राम को एकेडमिक काउंसलिंग, एग्जीक्यूटिव काउंसिल और विश्वविद्यालय कोर्ट में वोटिंग के आधार पर मान्यता मिली हुई है। फिर इस तरह के आदेश लागू करना कोई अवैध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी एमएसआरडी के इशारे पर काम कर रही है जो कि निजी विश्वविद्यालयों को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि यूजीसी डीयू के मुद्दे पर आंखें बंद करके फैसला ले रही है। जबकि बहुत से अन्य प्राइवेट और पब्लिक फंड से चल रही विश्वविद्यालय जो कि यूजीसी के नीतियों के तहत चल रहे हैं, वह चार वर्षीय प्रोग्राम चला रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी मानव संसाधन विकास मंत्रालय के इशारे पर अपने ही लिए गए फैसले को वापस लेने का काम कर रही है। यूजीसी सीधे कॉलेजों को निर्देश जारी करके डीयू और उसके अंतर्गत आने वाले कॉलेजों पर डिक्टेटरशिप दिखाकर नियमों की धज्जियां उड़ा रही है।