चार साल के ग्रेजुएट कोर्स पर लटकी तलवार
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चार साल के ग्रेजुएट कोर्स (एफवाईयूपी) मसले पर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को मिले यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के पत्र से हलचल मची हुई है। डीयू ने इस मसले पर शनिवार को एकेडमिक काउंसिल की बैठक में विचार-विमर्श किया।
बैठक में प्रस्ताव पास हुआ है कि यूजीसी को पत्र लिखकर एफवाईयूपी को खत्म करने के निर्देश पर पुनर्विचार करने के लिए कहा जाए। प्रस्ताव को लगभग 140 सदस्यों का समर्थन मिला, जबकि 10 सदस्यों ने इस पर असहमति जताई।
संभवत: यूजीसी को यह पत्र रविवार को भेजा जाएगा। इसके चलते डीयू में दाखिला प्रक्रिया भी थोड़ी लेट हो सकती है।
डीयू प्रशासन चर्चा के लिए तैयार नहीं
यूजीसी ने शुक्रवार को डीयू प्रशासन को निर्देश भेजा था, जिसमें एफवाईयूपी को वापस लिए जाने को कहा गया था। निर्देश में साफ कहा गया है कि एफवाईयूपी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 10+2+3 का उल्लंघन करता है। लिहाजा शैक्षणिक सत्र 2014-15 की शुरुआत से तीन वर्षीय पाठ्यक्रम को फिर से लागू किया जाए।
साथ ही एफवाईयूपी के अंतर्गत दाखिला पाए छात्रों के लिए उचित कदम उठाए जाएं। व्यवस्था इस तरह से की जाए कि छात्रों का एक साल खराब न होने पाए।
पहले तो डीयू प्रशासन एकेडमिक काउंसिल की बैठक में यूजीसी के पत्र पर चर्चा को तैयार नहीं था, लेकिन बाद में इसे प्रस्ताव में शामिल कर लिया गया।
तो रिव्यू होगा डीयू का यह कार्यक्रम
यूजीसी के पत्र में यह भी कहा गया है कि विवि एफवाईयूपी को लागू कर सकने वाले संशोधित अध्यादेश पर डीयू विजिटर राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त नहीं कर सका है।
13 जून को यूजीसी की बैठक में यह चर्चा हुई थी कि एफवाईयूपी को विवि एक्ट में संशोधन के बिना लागू किया गया, लिहाजा यह असंवैधानिक है। बैठक के बाद यूजीसी ने डीयू से इस कार्यक्रम को रिव्यू करने को कहा।
इस पर विवि प्रशासन ने कहा कि इसे लागू करने के लिए अध्यादेश में जरूरी संशोधन किए गए हैं। एफवाईयूपी के बढ़ते विरोध के बाद यूजीसी ने डीयू को निर्देशित किया कि वह इसे रोल बैक करे। अन्य प्रस्तावों पर एकेडमिक काउंसिल की बैठक जारी रही।