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हाईस्कूल में अंग्रेजी पढ़ी, तो डीयू से बीए भूल जाइए

Thu, 10 Jul 2014 12:06 PM IST
Updated Thu, 10 Jul 2014 12:06 PM IST
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DU admission distract to take English language

दिल्ली विवि में जारी दाखिले की रेस में कॉलेजों केएडिशनल एलिजिबेलिटी क्राइटेरिया छात्रों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। अभी तक तो संस्कृत व हिंदी में दाखिले के लिए अंग्रेजी की अनिवार्यता थी, वहीं अब एक कॉलेज ने अंग्रेजी पढ़ी होने पर दाखिला की मनाही कर दी है।

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मोतीलाल कॉलेज ने बीए प्रोग्राम में छात्रों को इसलिए दाखिला नहीं दिया क्योंकि उन्होंने दसवीं बाहरवीं में अंग्रेजी पढ़ रखी है। छात्रों का आरोप है कि यह शर्त पहली दो कट ऑफ में नहीं थी।
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इस अजीबो-गरीब क्राइटेरिया के कारण दो दिन से छात्र कॉलेज पहुंच रहे हैं लेकिन दाखिले के लिए मना किया जा रहा है। बुधवार देर शाम तो कॉलेज में काफी छात्र व अभिभावक एकत्र हुए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

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और तब पता चला ये है कारण

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मोतीलाल कॉलेज में दाखिले के लिए पहुंचे छात्र नवीन ने बताया कि यहां बीए की कट ऑफ ओबीसी केलिए 60 फीसदी है जबकि उनके 62 फीसदी अंक हैं। बीते मंगलवार को दाखिले के लिए पहुंचे तो दाखिला नहीं हुआ और दिन खराब हो गया।

जब बुधवार को दाखिले के लिए फिर पहुंचे लेकिन पूरा दिन बीत जाने के बाद शाम चार बजे बताया गया कि दसवीं व बारहवीं में अंग्रेजी पढ़ी है इसलिए दाखिला नहीं होगा। नवीन की तरह ही अन्य छात्रों को इसी परेशानी का सामना करना पड़ा।

छात्रों का कहना रहा कि अब बृहस्पतिवार को तीसरी कट ऑफ का आखिरी दिन है। दो दिन खराब हो गए और अब पता नहीं आखिरी दिन कहीं दाखिला हो पाएगा या नहीं।

छात्रों को आया गुस्सा

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छात्रों का आरोप है कि अंग्रेजी नहीं पढ़ने का होने की शर्त पहली व दूसरी कट ऑफ में नहीं थी। अपने बेटे के दाखिले के लिए मयूर विहार से पहुंचे प्रेम वर्मा ने बताया कि उनके बेटे को इतिहास ऑनर्स में दाखिला नहीं दे रहे हैं।

तर्क यह है कि इतिहास नहीं पढ़ा है जबकि इतिहास नहीं पढ़ने होने वाले छात्रों के लिए अलग कट ऑफ है। उनके बेटे के अंक उसी कट ऑफ के मुताबिक है।

अभिभावकों व छात्रों का कहना है कि उन्होंने प्रिंसिपल से बात करने का प्रयास किया लेकिन वह बात करने को तैयार नहीं है। लिहाजा राहत की आस में वह देर शाम तक कॉलेज में ही डे रहे।

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