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डीयू के 57 कॉलेज अपने ही वीसी के खिलाफ

Wed, 25 Jun 2014 10:46 AM IST
Updated Wed, 25 Jun 2014 10:46 AM IST
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57 colleges of DU agrees to taking admission in three-year program: UGC

चार साल के स्नातक पाठ्यक्रम पर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और यूजीसी के बीच टकराव मंगलवार को और तेज हो गया। दिन भर डीयू के कुलपति प्रो. दिनेश सिंह के इस्तीफे का हाई वोल्टेज ड्रामा चला तो शाम को यूजीसी के एक दावे ने सरगर्मी बढ़ा दी।

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यूजीसी ने कहा कि डीयू के 57 कॉलेज चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (एफवाईयूपी) को समाप्त कर तीन वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू करने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि कॉलेजों ने यूजीसी के इस दावे को भ्रामक करार दिया है।
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हालांकि दावे में प्रतिष्ठित कॉलेज हिंदू कॉलेज, जीजस एंड मैरी, लेडी श्रीराम कॉलेज, सेंट स्टीफेंस, मिरांडा हाउस, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स और श्री वेंकटेश्वरा का भी नाम शामिल है।

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एचआरडी मिनिस्टरी यूजीसी के साथ

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इससे पहले कुलपति दिनेश सिंह पर दबाव बनाने के लिए दिन भर मानव संसाधन विकास मंत्रालय में बैठकों का दौर जारी रहा। शाम को मंत्रालय में ही यूजीसी के चेयरमैन वेदप्रकाश की ओर से मीडिया को एक बयान जारी कर बताया गया कि डीयू से जुड़े 64 कॉलेजों में पिछले साल एफवाईयूपी में छात्रों को प्रवेश दिया गया था।

इनमें से 57 कॉलेजों के प्राचार्यों ने पत्र लिखकर यूजीसी को बताया है कि वे आयोग के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। बयान केसाथ 57 कालेजों के नाम भी दिए गए हैं।

लेकिन यूजीसी के इस दावे की हवा निकालते हुए एक कॉलेज के प्राचार्य ने कहा कि हमने यूजीसी को भेजे पत्र में यह कहा है कि वह उचित माध्यम (विश्वविद्यालय की ओर) से निर्देश भेजे तो हम पालन करने को तैयार हैं। यूजीसी का बयान भ्रामक है।

कॉलेज कैसे मान लेंगे यूजीसी का फैसला

57 colleges of DU agrees to taking admission in three-year program: UGC

कोई भी कॉलेज सीधे यूजीसी के निर्देश पर प्रवेश प्रक्रिया में कैसे बदलाव कर सकता है। यूजीसी की ओर से विश्वविद्यालय को अब तक जो भी निर्देश दिए गए हैं उस पर विश्वविद्यालय की ओर से कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

उधर, मंगलवार को कुलपति के इस्तीफे की खबर ने पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया। दोपहर तीन बजे ज्वाइंट डीन स्टूडेंट वेलफेयर व मीडिया कॉर्डिनेटर डॉ. मलय नीरव ने मीडिया को मैसेज के जरिए कुलपति के इस्तीफे की जानकारी दी।

थोड़ी देर बाद इस तरह की खबरें आने लगीं कि वीसी की टीम के तीन अहम सदस्यों समकुलपति प्रो. सुधीश पचौरी, डीन ऑफ कॉलेज प्रो. मालाश्री लाल व साउथ कैंपस निदेशक प्रो. उमेश राय ने भी इस्तीफा दे दिया है।

नए फॉर्मूले की उड़ी अफवाह

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डीयू में मंगलवार सुबह अफवाह उड़ी कि यूनिवर्सिटी नए फॉर्मूले पर विचार कर रही है। चर्चा हुई कि बीए व बीकॉम तीन साल व विज्ञान के लिए चार साल का कोर्स हो सकता है।

बताया जाने लगा कि इसके लिए अधिकारी बैठक कर रहे हैं। कयास लगने लगे कि शायद इसके जरिए डीयू और यूजीसी के बीच कुछ विवाद दूर होगा। दोपहर तक यह बात गलत निकली।

दिल्ली एससी/एसटी टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष धनी राम ने चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम को सही बताते हुए कहा कि अगर इसमें कोई कमी है तो उसे सुधारा जा सकता है। यूजीसी का प्रयास कानूनी तौर पर ठीक नहीं है। ऐसे फैसले डीयू की एसी व ईसी के जरिए ही हो सकते हैं।

आखिरकार हाईकोर्ट पहुंचा मामला

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दिल्ली विश्वविद्यालय में फोर ईयर अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम (एफवाईयूपी) का विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आरके कपूर ने जनहित याचिका दायर कर डीयू को यूजीसी के निर्देश का अनुपालन करते हुए तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के तहत दाखिले शुरू करने का निर्देश देने का आग्रह किया है। बुधवार को इस पर सुनवाई की संभावना है।

याचिकाकर्ता ने तर्क रखा कि एफवाईयूपी को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) व डीयू में विवाद के चलते काफी दिनों से अराजकता का माहौल था। आखिरकार आयोग ने असमंजस की स्थिति को खत्म कर एफवाईयूपी को रद्द कर डीयू को तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के तहत दाखिले करने का निर्देश जारी कर दिया।

इसके बावजूद अभी तक कॉलेजों में दाखिले शुरू नहीं हुए है और कटऑफ लिस्ट रोक दी गई है। कपूर ने कहा कि हर छात्र को विभिन्न पाठ्यक्रम में दाखिला लेने का अधिकार है।

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