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रुपए की कीमत गिरने से पढ़ाई पर ये होगा असर
जालंधर/सुरिंदर पाल
Updated Wed, 28 Aug 2013 06:20 PM IST
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डॉलर का दाम आसमान को छू रहा है और इसका बढ़ा झटका उन भारतीय मूल के विद्यार्थियों को लगा है, जो विदेशों में स्टडी के लिए जाने की तैयारी कर रहे थे या फिर जिनको दूसरे साल की फीस जमा करवानी थी।
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फारेन एजुकेशन एजेंसी के मालिकों के अनुसार हर विद्यार्थी को करीब दो लाख का झटका लगा है। इससे भारत की विदेशी एजुकेशन इंडस्ट्री का कारोबार 40 फीसदी के आसपास गिर गया है।
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इन दिनों कनाडा, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में भारतीय खासकर पंजाबी युवक स्टडी के लिए जा रहे हैं। ये लोग तीन-तीन साल के स्टडी कोर्स करने के लिए जाते हैं।
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इनमें बैचलर ऑफ बिजनेस, बैचलर ऑफ अकाउंटिंग, बीटेक और कंप्यूटर साइंस की डिग्री आदि के अलावा कई अन्य कोर्स शामिल हैं। इन कोर्स के लिए हर साल 20 हजार डॉलर के आसपास फीस जमा करवानी पड़ती है।
विदेशी एजुकेशन एजेंसी चलाने वाले सुकांत त्रिवेदी का कहना है कि एक विद्यार्थी को दो लाख रुपये के आसपास का नुकसान हो रहा है। न्यूजीलैंड डॉलर कुछ माह पहले 43 रुपए था, जो अब बढ़कर 53 रुपए तक पहुंच गया है।
जिन स्टूडेंट्स ने सेकेंड ईयर की फीस 20 हजार डॉलर जमा करवानी है, उनको भी 10 रुपए प्रति डालर का झटका लगा है। इसी तरह कनाडा का डॉलर पहले 52 रुपए के करीब था, जो 60 रुपए पहुंच गया है।
भारतीय मूल के विद्यार्थी कनाडा में ज्यादा जा रहे हैं। इसी तरह ऑस्ट्रेलियन डालर पिछले साल के मुकाबले 10 रुपए बढ़ गया है। पिछले साल अंतिम माह के आसपास 50 रुपए रेट था, जो अब 59 रुपए तक है।
सुकांत के मुताबिक नए विद्यार्थी भी दो लाख का अतिरिक्त बोझ देखकर हिचकिचा रहे हैं। वह डॉलर का दाम कम होने की आस लगाकर बैठे हैं ताकि उसके बाद ही वह कॉलेज में फीस जमा करवा सकें।
बिगड़ गया बजट
सोढ़ल इलाके के रहने वाले विकास ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे हैं। उनके पिता तरसेम लाल कहना है कि वह अभी सेकेंड ईयर की फीस जमा करवाकर आए हैं, उनको दो लाख रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ा है, जिसने हमारा सारा बजट बिगाड़ दिया है।