लौट रहा है नौकरियों में तेजी का दौर
रिपोर्ट के मुताबिक साल के अंत में हुई जाड़े की छुट्टियों (विंटर वेकेशन) का आईटी, आईटीईएस और तेल व गैस क्षेत्र में भर्ती प्रक्रिया पर बहुत ही मामूली असर हुआ। दिसंबर के नौकरी डॉटकॉम के नौकरी जॉब स्पीक इंडेक्स में इस बार नवंबर 12 के मुकाबले तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई। पिछले साल की इसी अवधि से तुलना करें तो यह वृद्धि 7 फीसदी है। गौर करने वाली बात यह है कि आमतौर पर दिसंबर में तकरीबन हर साल सभी नियुक्तियों की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
इसके विपरीत बीते दिसंबर में आईटी, आईटीईएस और तेल व गैस क्षेत्र में मामूली मंदी को छोड़कर सभी प्रमुख क्षेत्रों में नियुक्ति गतिविधि में तेजी आई है। इनफोएज इंडिया के सीईओ और प्रबंध निदेशक हितेश ओबेराय ने कहा निश्चित रूप से यह एक सकारात्मक संकेत है कि 2012 के आखिरी महीने में नियुक्ति गतिविधियां बढ़ गईं। इस तिमाही में रोजगार के मौके नए उभरते क्षेत्रों में होंगे न कि परंपरागत क्षेत्रों में।
रिपोर्ट के मुताबिक बीते महीने ऑटो और बैंकिंग सेक्टर में नई नौकरियों के मामले में सबसे ज्यादा उत्साहजनक माहौल रहा। इसके अलावा टेलीकॉम, फार्मा, कंस्ट्रक्शन और बीमा क्षेत्रों में भी नियुक्ति संबंधी गतिविधियों में बढ़ोतरी रही। इन सेक्टरों के नौकरी जॉब स्पीक इंडेक्स में भी नवंबर 2012 के मुकाबले दिसंबर में बढ़त दर्ज की गई। टेलीकॉम सेक्टर में 11, फार्मा में 8, कंस्ट्रक्शन में 7 और बीमा क्षेत्र में 6 फीसदी का इजाफा हुआ।
हालांकि आईटी और आईटीईएस क्षेत्रों में दिसंबर 12 के दौरान नियुक्ति गतिविधि में 2 और 1 प्रतिशत की मामूली कमी हुई। इसकी वजह यह रही कि इन दोनों ही सेक्टरों का कारोबार काफी हद तक पश्चिमी देशों के बाजारों पर निर्भर करता है, जहां दिसंबर में जाड़े व क्रिसमस के चलते लंबी छुट्टी रहती है। सॉफ्टवेयर सेवाओं और आईटीईएस को छोड़कर सभी प्रमुख कामकाजी क्षेत्रों में दिसंबर में नौकरियों का माहौल सकारात्मक रहा।
इंजीनियरिंग, सप्लाई चेन और बैंकिंग क्षेत्र में पेशेवरों की मांग नवंबर के मुकाबले दिसंबर में क्रमश: 10, 13 और 18 प्रतिशत बढ़ी। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और मार्केटिंग क्षेत्र में 12 में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई । मुंबई और पुणे दोनों में इंडेक्स में क्रमश: 12 में 8 प्रतिशत का सुधार आया, जबकि दिल्ली और चेन्नई में नियुक्ति गतिविधियों में 6 प्रतिशत और 3 प्रतिशत की तेजी रही। इसके विपरीत बंगलूरू, कोलकाता और हैदराबाद में नियुक्तियों के स्तर में 4 प्रतिशत, 5 प्रतिशत और 8 प्रतिशत की कमी आई।