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हर शहरी परिवार को घर देने के लिए करना होगा 1,216 खरब रुपये का निवेश

Mon, 15 Sep 2014 08:59 AM IST
नई दिल्ली/ ब्यूरो
नई दिल्ली/ ब्यूरो Updated Mon, 15 Sep 2014 08:59 AM IST
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Rs 1,216 trillion have to invest to provide home for Every urban family

वर्ष 2022 तक शहरी क्षेत्र में हर परिवार को मकान उपलब्ध कराने के लिए करीब 1,216.3 खरब रुपये (20 खरब डॉलर) के निवेश की जरूरत पड़ेगी। सरकार के ‘हाउसिंग फॉर ऑल-2022’ विजन को सफल बनाने के लिए देश के शहरों में करीब 11 करोड़ घर बनाने की जरूरत होगी। शहरों में किफायती आवास उपलब्ध कराने में निजी क्षेत्र की भागीदारी को और मजबूत करने होगा। साथ ही इसके लिए केंद्र व राज्य सरकारों के मिल कर काम करना होगा है। यह बात नेशनल रीयल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) और हाउसिंग सेक्टर से जुड़े अध्ययन करने वाली फर्म केपीएमजी के एक सर्वे में कही गई है।

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नारेडको-केपीएमजी की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 तक शहरों में हर परिवार को घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग) को बढ़ावा देकर ही किया जा सकता है। इसके तहत सबसे ज्यादा जोर सालाना 2 लाख रुपये से कम आय वाले आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) और निमभन आय वर्ग (एलआईजी) को ध्यान में रखकर आवास तैयार करने होंगे। करीब 70 फीसदी घरों का निर्माण सबसे ज्यादा शहरी आबादी वाले देश के नौ राज्यों में करने की जरूरत पड़ेगी।
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रिपोर्ट के अनुसार हर शहरी परिवार को घर देने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों दोनों ही को संयुक्त रूप से प्रयास करने होंगे। इसमें स्थानीय शहरी आवासी निकायों की भूमिका काफी अहम होगी। रिपोर्ट के मुताबिक 2022 तक 11 करोड़ मकान बना कर ही इस लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। इसके लिए प्रतिदिन 35,000 हजार घर बनाने होंगे। इसमें से सबसे ज्यादा मकान देश के दो राज्यों महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में बनाने होंगे। महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 18 फीसदी और यूपी की करीब 9 फीसदी की बैठेगी। इसके अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, तमिलनाडु और कर्नाटक की भी इसमें मुख्य भागीदारी होगी।
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रिपोर्ट के मुताबिक इस विजन को सफल बनाने के आवास क्षेत्र से जुड़ी नीतियों पर काफी काम करने की जरूरत होगी। साथ ही बेहतर प्रचार-प्रसार और समन्वय भी इसके लिए जरूरी होगा। इसके अलावा आवासीय परियोजनाओं की लागत घटाने के लिए बेहतर समन्वय के जरिए शुल्कों और करों में छूट के प्रावधान भी करने होंगे। निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) मॉडल को भी बढ़ावा देने की जरूरत पड़ेगी। विजन 2022 की कामयाबी के लिए हाउसिंग सेक्टर में निवेश को सालाना 12 से 13 फीसदी बढ़ाते हुए अगले आठ वर्षों में दोगुना करने की जरूरत होगी।

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