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रिलायंस जिओ पर लगा 4 जी स्पेक्ट्रम घोटाले का आरोप

Tue, 01 Jul 2014 08:57 PM IST
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया Updated Tue, 01 Jul 2014 08:57 PM IST
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 Reliance geo facing heat on alleged scam
मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) एक बार फिर गलत कारणों से चर्चा में है। केजी बेसिन गैस उत्पादन और बाद में गैस कीमतों के मुद्दे पर हाथ जलाने के बाद कंपनी एक बार फिर विवाद का सामना कर रही है।
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रिलायंस पर 4 जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कथित तौर पर 23,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा है। आवंटन में रिलायंस की कंपनी रिलायंस जिओ इंफोकॉम ने भाग लिया था। केजी बेसिन गोल्ड प्लेटिंग मामले में 2.35 अरब डॉलर का जुर्माना लगाए जाने के बाद एनडीए सरकार ने कंपनी को नई गैस कीमत 8 डॉलर से 8.4 एमबीटीयू देने से इनकार कर दिया है।
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सरकार ने कीमत के फार्मूले की समीक्षा करने और गैस कीमतों का मामला तीन माह तक स्थगित रखने का फैसला किया है। पिछले सप्ताह ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने केजी बेसिन से कांट्रैक्ट में किए गए वादे के मुताबिक पर्याप्त उत्पादन करने में असफल रहने पर आरआईएल के खिलाफ 578 मिलियन डॉलर (3,468 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाने का फैसला किया है।
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अब आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रशांत भूषण ने सीएजी रिपोर्ट के हवाले से आरआईएल के खिलाफ अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से आरआईएल का टेलीकॉम लाइसेंस रद्द करने और मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया है कि पिछली यूपीए सरकार ने मार्च 2013 में रिलायंस जिओ इंफोकॉम को वायस टेलीफोनी में पिछले दरवाले से प्रवेश करने की अनुमति दी थी। यह 2जी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करता है।

यूपीए सरकार ने रिलायंस जिओ को अखिल भारतीय स्तर पर लाइसेंस की अनुमति 2001 की कीमत 1,658 करोड़ रुपये में दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2 जी फैसले में सरकारी राजस्व को बड़े पैमाने पर नुकसान का कारण इस कीमत को खारिज कर दिया था। आप नेता ने पूरा ब्यौरा देते हुए कहा कि मई-जून 2010 में 3 जी और 4 जी के लिए नीलामी की गई थी। 2100 एमएचजेड बैंड में 5+ 5 एमएचजेड स्पेक्ट्रम के लिए 3 जी नीलामी से 16,750 .58 करोड़ रुपये मिले थे।

ऐसे में प्रति एमएचजेड कीमत 1,675 करोड़ रुपये होनी चाहिए। 3 जी नीलामी के तुरंत बाद 4 जी नीलामी शुरू हुई। यह नीलामी 2300 एमएचजेड बैंड में 20 एमएचजेड अखिल भारतीय लाइसेंस के लिए की गई। इससे सरकार को 12,847.77 करोड़ रुपये मिले। इस तरह से प्रति एमएचजेड की कीमत 642.39 करोड़ रुपये होनी चाहिए। ऐसा इसलिए है, क्योंकि सभी दस्तावेजों में कहा गया है कि 4 जी स्पेक्ट्रम सिर्फ डाटा सेवाओं के लिए था, जबकि 3 जी स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल डाटा और वायस टेलीफोनी दोनों के लिए किया जा सकता है।

सीएजी रिपोर्ट ने पाया है कि सरकार ने 4 जी स्पेक्ट्रम के लिए पात्रता मानक तय करते समय अपने हितों की रक्षा नहीं की। सरकार ने नीलामी में शामिल हो रही कंपनियों की कुल परिसंपत्तियों के लिहाज से पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए बिना इंटरनेट (आईएसपी) लाइसेंसधारक को नीलामी में शालिम होने की अनुमति दी।


यह पाया गया है कि यूएएस लाइसेंस धारक या बिना लाइसेंस वाली नई कंपनी को 4 जी नीलामी में शामिल होने की अनुमति दी गई, लेकिन इनको पात्र बनने के लिए कुल परिसंपत्तियों के टेस्ट से गुजरना पड़ा, लेकिन मौजूदा इंटरनेट (आईएसपी) लाइसेंसधारक के लिए 4 जी नीलामी में शालिम होने के लिए ऐसा कोई मानक तय नहीं किया गया। आम आदमी पार्टी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर एनडीए सरकार से रिलायंस इंडस्ट्रीज का टेलीकॉम लाइसेंस और 4 जी स्पेक्ट्रम आवंटन रद्द करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इस घोटाले में सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच कराई जानी चाहिए।
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