गेहूं फिर बना सकता है पैदावार का रिकॉर्ड
पिछले वर्ष उत्पादन के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करने के बाद गेहूं इस साल भी पैदावार के नए कीर्तिमान स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है। फसल के लिए मौसम का मिजाज बेहद अनुकूल होने के कारण ऐसी स्थिति बनी है। सरकार को उम्मीद है कि मौसम का खुशनुमा मिजाज इसी तरह से बना रहा तो इस साल देश में गेहूं का उत्पादन 905 लाख टन तक पहुंच सकता है। पिछले वर्ष उत्पादन करीब 902 लाख टन था। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा समय उत्तर और मध्य भारत का तापमान गेहूं की फसल के लिए लाभकारी है।
कृषि सचिव आशीष बहुगुणा ने बताया कि समूचे उत्तर भारत में पारा गिरने से आम जनजीवन भले ही अस्त-व्यस्त हो गया हो लेकिन रबी फसलों के लिए यह बेहद अच्छा है। खासकर गेहूं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मौजूदा तापमान बेहतर है। दिन में धूप और रात में पारा नीचे रहने से फलियों का विकास हो रहा है। हालांकि ऐसे समय में घने कोहरे की आशंका भी रहती है। लेकिन यदि दिन में धूप निकलती रही तो किसानों को ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। तापमान अच्छा रहने से मोटे अनाजों की पैदावार भी बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।
बहुगुणा के मुताबिक प्रमुख उत्पादक राज्यों के ज्यादातर हिस्सों में गेहूं की बुवाई अंतिम चरण में पहुंच रही है। बिहार में बुवाई का काम देर से शुरू हुआ था। इसलिए वहां अगले 20 दिनों तक गेहूं की बुवाई जारी रहेगी जबकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश में बुवाई 85 से 90 फीसदी तक पूरी हो चुकी है। अभी तक देशभर में 295 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हो चुकी है। जो पिछले वर्ष से अधिक है बल्कि सामान्य से भी 15 लाख हेक्टेयर अधिक है।
उन्होंने बताया कि यदि दिन और रात के तापमान में ज्यादा परिवर्तन नहीं होता है और रात में कोहरे का कहर नहीं हुआ तो गेहूं का उत्पादन इस दफा फिर से नया रिकॉर्ड कायम कर सकता है। पिछले वर्ष देश में गेहूं का उत्पादन 902.30 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। वहीं सरसों और चना की बुवाई भी अगले 20 से 25 दिनों तक चलने की संभावना है। हालांकि, चना और सरसों में किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। इस दफा सब्जियों का उत्पादन भी अच्छा होने का अनुमान है।