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कनाडा को लुभा रही है मोदी की स्मार्ट सिटी योजना

Mon, 15 Sep 2014 08:58 AM IST
प्रशांत श्रीवास्तव/अमर उजाला, दिल्ली
प्रशांत श्रीवास्तव/अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 15 Sep 2014 08:58 AM IST
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Canada is intrested Smart City project of Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पहले से अपने मजबूत रिश्तों को कनाडा सरकार अब और प्रगाढ़ करना चाहती है। इसके तहत वह मोदी की स्मार्ट सिटी योजना में सहयोग के साथ-साथ, खनन और दूसरे क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ाने की तैयारी में है।

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दोनों देशों के बीच किस तरह के कारोबार की संभावना है, साथ ही किन अड़चनों को दूर करने की जरूरत है, हाल ही में भारत यात्रा पर आए कनाडा के ट्रेजरी बोर्ड के प्रेसिडेंट टोनी क्लेमेंट ने इस मामले पर अमर उजाला के संवाददाता प्रशांत श्रीवास्तव से बातचीत की है। क्लेमेंट को अपने देश में सरकारी कंपनियों के कामकाज को सुधारने और उसे दक्ष बनाने के लिए भी जाना जाता है। पेश हैं टोनी क्लेमेंट के साथ बातचीत के प्रमुख अंश-
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नई मोदी सरकार से कनाडा सरकार किस तरह के संबंधों की उम्मीद कर रही है?
नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्य मंत्री थे, तब से कनाडा सरकार वाइब्रेंट गुजरात के साथ उनकी सहयोगी है। हमें उम्मीद है, हमारे बीच बने प्रगाढ़ रिश्ते को अब नई दिशा मिलेगी। मेरी यात्रा उसकी पहली कड़ी है। आने वाले कुछ हफ्तों में कनाडा सरकार के कृषि, विदेश मामलों और व्यापार आदि के मंत्रियों के आने की तैयारी है। इसके साथ ही कनाडा के दो प्रॉविंसेज के प्रतिनिधि भी भारत आएंगे। इनके जरिए भारत के साथ हम अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं, साथ ही आर्थिक सहयोग में भी तेजी से बढ़ोतरी चाहते हैं।
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आर्थिक संबंध मजबूत करने में भारत और कनाडा के बीच कौन से सेक्टर अहम भूमिका निभा सकते हैं?
खनन क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की अपार संभावना है। इसके तहत न केवल भारत में कनाडा की कंपनियां निवेश कर सकती हैं, बल्कि भारतीय कंपनियों के लिए कनाडा में असीम संभावना हैं। कनाडा में निकिल, क्रोमाइट आदि खनिजों का प्रचुर भंडार है। कनाडा में इस क्षेत्र के तहत 160 अरब डॉलर का पोटेंशियल है। इसके अलावा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, आईटी, इंफ्रा क्षेत्र में कारोबार की बेहतर संभावना है।

भारत सरकार देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाने की तैयारी में हैं, इसमें कनाडा किस तरह की साझेदारी कर सकता है?
स्मार्ट सिटी बनाने में भारी मात्रा के निवेश के साथ-साथ बड़े स्तर पर प्लानिंग और उसके एक्जेक्यूशन की जरूरत होती है। कनाडा इसके लिए भारत में निवेश से लेकर अपनी विशेषज्ञता को साझा कर सकता है। इस क्षेत्र में हम प्रोजेक्ट प्लानिंग, डाटा प्रबंधन, पर्यावरण तकनीक के साथ-साथ बड़े पैमाने के निवेश की संभावना देखते हैं। भारत और कनाडा की कंपनियां मिलकर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को सहयोग देने की संभावना रखती हैं।

आपको सरकारी कंपनियों के बेहतर प्रबंधन के लिए जाना जाता है, इसके लिए आपने कौन से कदम उठाए?
देखिए कोई भी सरकार केवल नौकरी देकर सरवाइव नहीं कर सकती है। उसके लिए हमें सिस्टम को दक्ष बनाना होगा। साथ ही देश के लिए क्या जरूरी है इस लक्ष्य को सामने रखना होगा। इसी के तहत व्यक्तियों के प्रबंधन के साथ उनमें दक्षता विकसित करना, साथ ही उनके कामों की लगातार समीक्षा करने के कदम उठाए गए। साथ ही सरकार को अपने राजकोषीय प्रबंधन को भी संतुलित करना जरूरी है। सबसे अहम कदम हमने आईटी के जरिए बैक ऑफिस ऑपरेशन को बेहतर करने का उठाया। इससे हमें अनुकूल परिणाम मिले।

कनाडा में 10 लाख के करीब भारतीय हैं, हर साल बड़ी तादाद में विद्यार्थी भी भारत से जाते हैं, उनके लिए क्या योजनाएं हैं?
कनाडा तेजी से ग्रोथ कर रहा है। कनाडा पढ़ने, रिसर्च और कारोबार करने के लिए बेहतर जगह है। वहां टैक्स ढांचा सरल है। ऐसे में हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग कनाडा आएं। स्किल आधारित एजुुकेशन के वहां अपार अवसर हैं। साल 2013 में भारत से 13,000 लोगों को स्टूडेंट वीजा मिला था। इसके अलावा हम भारत में भी औद्योगिक संगठनों आदि के साथ सहयोग कर रहे हैं।

भारत डब्ल्यूटीओ के तहत मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर राजी नहीं है, साथ ही कनाडा के साथ विदेशी निवेश संरक्षण समझौता की भी मुद्दा है, ऐसे में आर्थिक संबंधों पर क्या असर होगा?

देखिए अभी भारत और कनाडा के बीच करीब 5.8 अरब डॉलर का कारोबार होता है। यह दोनों देशों की क्षमताओं को देखते हुए बहुत कम है। दोनों देश मौजूदा स्तर से कहीं ज्यादा कारोबार कर सकते हैं। कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें हम जल्द सुलझाने की उम्मीद कर रहे है। हमें उम्मीद है कि बातचीत के जरिए सभी मुद्दों का हल निकल जाएगा।

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