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एक भयानक हादसे के दस दिन बाद वो चलने फिरने लगी...
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
Updated Thu, 04 Apr 2013 09:17 AM IST
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हादसे जिंदगी का एक हिस्सा है। कभी कभी ऐसे हादसे हो जाते हैं जिनसे उबरने में हमे हफ्ते, महीने और साल तक लग जाते हैं। लेकिन जीवटता की धनी एक लड़की रीढ़ की हड्डी टूटने के दस दिन बाद ही चलने फिरने लगी।
डेली मेल के अनुसार भयानक हादसे का शिकार हुई 26 साल की नताली मौरिस के साथ ये चमत्कार तब हुआ जब वो घर की सीढ़ियों से गिर गई। हादसे में नताली की कमर की हड्डी टूट गई।
कहा जाता है कि रीढ़ की हड्डी टूटने के बाद मरीज महीनों तक चल फिर नहीं पाता और अधिकतर मामलो में लकवे का शिकार हो जाता है।
लेकिन सात घंटे की मैराथन सर्जरी के मात्र तीन दिन बाद ही नताली न केवल बिस्तर से खुद उठी बल्कि उसने चलना फिरना शुरू कर दिया जो डॉक्टरों की नजर में एक चमत्कार है।
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रोदरहम की नताली ने बताया कि जब वो सीढ़ियों से गिरी तो अस्पताल में आंख खुली। डॉक्टरों ने बताया कि रीढ़ की हड्डी टूट गई है और सर्जरी के बाद भी चलने फिरने की संभावना नाम मात्र की है। सबसे ज्यादा डर की बात ये थी कि लोग लकवे के बारे में बात कर रहे थे।
नताली ने कहा कि वो काफी घबरा गई। उसे लगा कि वो कभी चल फिर नहीं पाएगी और उसकी जिंदगी खत्म ही समझो।
फिर वो दिन आया जब नताली की सर्जरी की गई। सर्जरी के तीन दिन बाद फिजियोथैरेपी के एक्सपर्ट आए और मुझे उठने के लिए प्रोत्साहित करने लगे। डॉक्टरों को यकीन नहीं हुआ कि सर्जरी के तीन दिन बाद ही नताली अपने कमरे में चहलकदमी करने लगी और चौथे दिन उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
डॉक्टरों की नजर में ये चमत्कार के साथ साथ नताली की दृढ़ इच्छा शक्ति का परिणाम है। आमतौर पर जहां रीढ़ की हड्डी टूटने के सालों बाद तक लोग उठ नहीं पाते, नताली चहलकदमी कर रही है।
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डेली मेल के अनुसार भयानक हादसे का शिकार हुई 26 साल की नताली मौरिस के साथ ये चमत्कार तब हुआ जब वो घर की सीढ़ियों से गिर गई। हादसे में नताली की कमर की हड्डी टूट गई।
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कहा जाता है कि रीढ़ की हड्डी टूटने के बाद मरीज महीनों तक चल फिर नहीं पाता और अधिकतर मामलो में लकवे का शिकार हो जाता है।
लेकिन सात घंटे की मैराथन सर्जरी के मात्र तीन दिन बाद ही नताली न केवल बिस्तर से खुद उठी बल्कि उसने चलना फिरना शुरू कर दिया जो डॉक्टरों की नजर में एक चमत्कार है।
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रोदरहम की नताली ने बताया कि जब वो सीढ़ियों से गिरी तो अस्पताल में आंख खुली। डॉक्टरों ने बताया कि रीढ़ की हड्डी टूट गई है और सर्जरी के बाद भी चलने फिरने की संभावना नाम मात्र की है। सबसे ज्यादा डर की बात ये थी कि लोग लकवे के बारे में बात कर रहे थे।
नताली ने कहा कि वो काफी घबरा गई। उसे लगा कि वो कभी चल फिर नहीं पाएगी और उसकी जिंदगी खत्म ही समझो।
फिर वो दिन आया जब नताली की सर्जरी की गई। सर्जरी के तीन दिन बाद फिजियोथैरेपी के एक्सपर्ट आए और मुझे उठने के लिए प्रोत्साहित करने लगे। डॉक्टरों को यकीन नहीं हुआ कि सर्जरी के तीन दिन बाद ही नताली अपने कमरे में चहलकदमी करने लगी और चौथे दिन उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
डॉक्टरों की नजर में ये चमत्कार के साथ साथ नताली की दृढ़ इच्छा शक्ति का परिणाम है। आमतौर पर जहां रीढ़ की हड्डी टूटने के सालों बाद तक लोग उठ नहीं पाते, नताली चहलकदमी कर रही है।