फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Bizarre News Archives ›   village_half_people_blindness

आपके गांव से बिल्कुल जुदा है ये गांव, जानकर बहुत दुखेगा आपका दिल

Mon, 27 Jan 2014 02:20 PM IST
Updated Mon, 27 Jan 2014 02:20 PM IST
विज्ञापन
village_half_people_blindness
अफ्रीकी देश इथियोपिया के ओरोमिया इलाके के गाँव कोयू के स्कूल में जब ये सवाल पूछा जाता है किसी के परिवार में किसी को आँख में मुश्किल तो नहीं है तो एक साथ बीस से भी ज़्यादा बच्चे अपने-अपने हाथ खड़े कर लेते हैं।
विज्ञापन


इनमें से एक लड़के ने बताया, "मेरी मां की एक आँख की रोशनी जा चुकी है और दूसरी में उन्हें काफी तकलीफ़ है। वह कहां जा रही हैं, ये भी नहीं देख पातीं।"

चाहें तो आप भी रह सकते हैं इस महिला के साथ


एक दूसरी बच्ची ने बताया कि उसकी दादी मां के दोनों आँखों की रोशनी जा चुकी है। नौ साल की इस बच्ची ने बताया, "वह लगातार अपनी पलकों को मलती रहती हैं, क्योंकि उनको आँखों में काफी दर्द रहता है।"
विज्ञापन


हालांकि उन्हीं बच्चों से जब ये जानने की कोशिश हुई कि क्या उनमें से किसी की आँखों में कोई दिक्कत है तो कोई हाथ नहीं उठा।

समय रहते उपचार संभव

village_half_people_blindness
लेकिन जब उन्हीं बच्चों की एक नेत्र रोग विशेषज्ञ ने जांच की तो उनमें आधे से ज़्यादा बच्चों की आँखें बैक्टीरिया संक्रमण ट्रैकोमा से पीड़ित पाई गईं। इसी संक्रमण से दुनिया भर में सबसे ज़्यादा लोग नेत्रहीनता के शिकार होते हैं। इसका समय रहते उपचार संभव है।

यह बीमारी बचपन में ही शुरू होती है। अगर इसका उपचार नहीं हुआ तो बैक्टीरिया यानी विषाणु से सूजन का कारण बनता है जो पलकों के ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। इसके चलते पलक अंदर की ओर मुड़ने लगती है और कॉर्निया में खरोंच लगती है।

यह बीमारी अपने आप में काफी पीड़ादायक होती है और आगे चलकर पीड़ित के आँखों की रोशनी चली जाती है।

इथियोपिया के सबसे प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वुंडू एलेमयहू ने कहा, "ट्रैकोमा की सबसे ख़राब बात यह है कि बचपन में इसके लक्षण कम ही पकड़ में आते हैं।"

10 साल में शादी, 13 साल में बनीं मां, 14 में हुई विधवा और फिर...


वुंडू एलेमयहू इथियोपिया में ट्रैकोमा की आफत के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे फ्रेड होलोज फाउंडेशन के तकनीकी सलाहकार हैं। वह बताते हैं, "ट्रैकोमा से पीड़ित बच्चे को ज़्यादा तकलीफ़ तो होती है लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं। वे अपने मां को इसके बारे में ऐसे ही बताते हैं और यह ख़तरनाक होता है।"

करोड़ों लोग पीड़ित

village_half_people_blindness
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक इथियोपिया में करीब दो करोड़ लोग ट्रैकोमा से पीड़ित हैं जिनमें 22 लाख लोग नेत्र रोग की चपेट में हैं जबकि 12 लाख लोग पूरी तरह आँख की रोशनी गँवा चुके हैं।

दक्षिण इथियोपिया के ओरोमिया क्षेत्र में 3 करोड़ से ज़्यादा लोग रहते हैं जिनमें 42 फ़ीसदी लोग इसकी चपेट में हैं। यह बीमारी उस इलाके में ज़्यादा फैलती है जहां बहुत ज़्यादा धूल और गर्म हवाएं चलती हों और साफ़ सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं हो।

कोयू के स्कूल से करीब पांच किलोमीटर दूर एक क्लीनिक में ट्रैकोमा की जांच हो रही है, जहां 60 साल की शारेज़ फेयान अपनी बारी का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हैं।

वह अपनी आँखों की पलकों को बार-बार मसल रही हैं और बताती हैं कि एक साल पहले उनकी आँखों में दर्द और सूजन शुरू हुआ था। उन्होंने बताया, "पहले मैं अपने परिवार के लिए खाना पकाती थी, तब मैं किसी दूसरे पर आश्रित हूं।"

दहल जाएगा आपका दिल, जब जानेंगे इस औरत ने कैसे ‌दिया बच्चे को जन्म

डॉक्टर वुंडू एलेमयहू ने कहा, "ट्रैकोमा के दर्द और तकलीफ़ को महज 10 मिनट की सर्ज़री से दूर किया जा सकता है।" एलेमयहू ने स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को अपने समुदाय में यह ऑपरेशन करने की ट्रेनिंग दी है।

विज्ञापन

10 मिनट की सर्ज़री

village_half_people_blindness
इस ऑपरेशन में पलकों को पहले की तरह बाहर किया जाता है ताकि पलक पर मौजूद पिपनी कार्निया से नहीं टकराए। इस ऑपरेशन के बिना आँखों की तकलीफ़ दूर नहीं होती और आगे चलकर रोशनी भी जाती रहती है।

ट्रेनिंग हासिल करने वाले कार्यकर्ता अब गाँव-गाँव जाकर पीड़ित लोगों का उपचार कर रहे हैं। अकेले ओरोमिया में इस बीमारी के चलते दो लाख लोग आँखों की रोशनी गँवाने की कगार पर खड़े हैं।

बच्चों की देखभाल करने के चलते महिलाओं के इस बीमारी के चपेट में आने की आशंका दोगुनी होती है।

साइटसेवर्स के नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिज़ीज प्रोग्राम के निदेशक सिमोन बुश ने कहा, "ट्रैकोमा गरीबी की बीमारी है। जिन इलाकों में साफ पानी उपलब्ध नहीं होता है वहां यह बीमारी फैलती है।"

मां के छूते ही झड़-झड़कर गिरने लगते हैं बेटे के अंग

ब्रितानी चैरिटी साइटसेवर्स दुनिया भर के गैरसरकारी संगठनों का नेतृत्व कर रही है जिसका उद्देश्य 2020 तक दुनिया भर में ट्रैकोमा का उन्मूलन है।

मिशन साइटसेवर्स

village_half_people_blindness
इस दिशा में साइटसेवर्स इस बीमारी के बारे में एक ग्लोबल सर्वे कर रही है जिसके बाद मार्च 2015 तक दुनिया के 30 देशों में करीब 40 लाख पीड़ितों का उपचार किया जा सके।

इस सर्वे में प्रशिक्षित नेत्र रोग नर्सें प्रभावित इलाकों में घर घर जाकर सर्वे करेंगी। उनके मोबाइल में अपलोड ऐप के जरिए सर्वे के नतीजे मैपिंग करने वाली साइट पर अपलोड हो जाएंगे।

वुंडू एलेमयहू की सर्जरी से काफी लोगों को फायदा हो रहा है। 40 साल की मिसिएक उनमें से एक है। सर्जरी के बाद जब नर्सें उनके आँखों पर से पट्टी हटाती हैं तो उन्हें एहसास होता है कि वह फिर से दुनिया देख सकती हैं।

'मेरी बेटी से शादी करो और 800 करोड़ ले जाओ'


वह डॉक्टर एलेमयहू के हाथों को पकड़कर कहती हैं, "आप लोग बेहद खूबसूरत हैं। आप लोगों ने मुझे दूसरा जीवन दिया है।"
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed