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ब्लेड से रेत-रेतकर उतारते हैं चमड़ी और बनते हैं खूबसूरत
Updated Thu, 20 Feb 2014 08:34 AM IST
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आज के समय में टैटू बनवाना फैशन से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि टैटू बनवाने के लिए थोड़ा दर्द तो जरूर सहन करना पड़ता है लेकिन ये दर्द इनके दर्द के आगे कुछ भी नहीं।
सूरमा आदिवासी अपने शरीर को ब्लेड से काट-काटकर सजाते हैं। इथोपिया के ये आदिवासियों के लिए ये उनकी संस्कृति की पहचान है।
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सूरमा आदिवासी अपने शरीर को ब्लेड से काट-काटकर सजाते हैं। इथोपिया के ये आदिवासियों के लिए ये उनकी संस्कृति की पहचान है।
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शरीर पर मिल जाएंगे तरह-तरह के निशान
फोटोग्राफर एरिक ने इथियोपिया और सूडान के आदिवासियों की तस्वीरों को अपने कैमरे में कैद किया है। इसके लिए उन्होंने इन इलाकों में महीनों का समय बिताया।
इन निशानों को बनाने के लिए यहां के लोग कांटे और ब्लेड का इस्तेमाल करते हैं। कांटे और ब्लेड से ये लोग शरीर पर तरह-तरह के निशान बनाते हैं।
इन निशानों को बनाने के लिए यहां के लोग कांटे और ब्लेड का इस्तेमाल करते हैं। कांटे और ब्लेड से ये लोग शरीर पर तरह-तरह के निशान बनाते हैं।
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मुंह से चीख नहीं निकलती
अगर आप सोच रहे हैं कि इस गोदना कार्यक्रम के दौरान रोना-धोना मच जाता होगा तो आपको बता दें कि ऐसा कुछ नहीं होता। शरीर से खून रिसता रहता है और लोग टैटू बनाते-बनवाते रहते हैं।
खूबसूरती के निशान
डेली मेल के अनुसार, ये गोदना आदिवासियों में खूबसूरती की नजर से देखे जाते हैं। जिसके शरीर पर जितना सुंदर निशान वो उतना ही सुंदर। लेकिन इस परंपरा के चलते यहां के लोगों में कई तरह की बीमारियों जैसे हेपेटाइटिस बी और एड्स होने का खतरा बढ़ता जा रहा है।