{"_id":"9b4c68f9c1a4b812b491f838800bc17f","slug":"strange-beauty","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":" इनकी अनूठी खूबसूरती को देखकर दंग रह जाएंगे आप","category":{"title":"Bizarre News Archives","title_hn":"हटके खबर आर्काइव","slug":"bizarre-news-archives"}}
इनकी अनूठी खूबसूरती को देखकर दंग रह जाएंगे आप
Updated Wed, 15 Jan 2014 01:28 PM IST
विज्ञापन
कहते हैं खूबसूरती का सीधा कनेक्शन तो देखने वाले की आंखों से होता है। फिर भी महिलाएं आकर्षक दिखने के लिए कई तरीके अपनाती हैं। जीरो फिगर, गोरा रंग, लंबा कद और भी न जाने क्या-क्या!
अरे ये क्या! चीता बन गया फोटोग्राफर
दुनिया भर में सुंदरता के पैमाने अलग-अलग हैं। यह जानना भी बेहद दिलचस्प है कि कहां महिलाएं दिन-रात लगी रहती हैं मोटा होने की कोशिश में और कहां शरीर पर निशान बनवाने के लिए महिलाएं दर्द सहने से भी गुरेज नहीं करती...।
विज्ञापन
अरे ये क्या! चीता बन गया फोटोग्राफर
दुनिया भर में सुंदरता के पैमाने अलग-अलग हैं। यह जानना भी बेहद दिलचस्प है कि कहां महिलाएं दिन-रात लगी रहती हैं मोटा होने की कोशिश में और कहां शरीर पर निशान बनवाने के लिए महिलाएं दर्द सहने से भी गुरेज नहीं करती...।
विज्ञापन
मोटा होना है सबसे बड़ी चाहत
दुनिया में शायद ही कोई महिला हो जिसे मोटापा पसंद हो, लेकिन पश्चिम अफ्रीकी देश मॉरिटानिया में स्थिति इसके ठीक उलट है।
यहां ज्यादा वजन वाली महिलाओं की खोज की जाती है। उन्हें सुंदर समझा जाता है और यहां के पुरुष ज्यादा से ज्यादा वजन वाली महिला को अपनी जीवनसंगिनी बनाने को तरजीह देते हैं।
इस शख्स को है ऐसी बीमारी, जिसे सुनकर हैरान रह जाएंगे आप
इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए यहां की महिलाएं मोटा होने की कोशिश में लगी रहती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं यहां किशोरियों के अभिभावक उन्हें पर्याप्त मात्रा से अधिक खाने पर मजबूर करते हैं, ताकि उनकी बेटी मोटी हो सके।
यहां लड़कियों को आठ साल की उम्र होते ही हेवी डाइट देना शुरू कर दिया जाता है। कई बार इसके परिणाम खतरनाक बीमारियों के रूप में भी सामने आते हैं।
कुछ मामलों में तो गैस्ट्रीक डिस्ट्रेस की वजह से कई लड़कियों की मौत भी हो चुकी है, मगर यहां महिला की खूबसूरती का पैमाना उसका मोटा होना ही है।
यहां ज्यादा वजन वाली महिलाओं की खोज की जाती है। उन्हें सुंदर समझा जाता है और यहां के पुरुष ज्यादा से ज्यादा वजन वाली महिला को अपनी जीवनसंगिनी बनाने को तरजीह देते हैं।
इस शख्स को है ऐसी बीमारी, जिसे सुनकर हैरान रह जाएंगे आप
इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए यहां की महिलाएं मोटा होने की कोशिश में लगी रहती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं यहां किशोरियों के अभिभावक उन्हें पर्याप्त मात्रा से अधिक खाने पर मजबूर करते हैं, ताकि उनकी बेटी मोटी हो सके।
यहां लड़कियों को आठ साल की उम्र होते ही हेवी डाइट देना शुरू कर दिया जाता है। कई बार इसके परिणाम खतरनाक बीमारियों के रूप में भी सामने आते हैं।
कुछ मामलों में तो गैस्ट्रीक डिस्ट्रेस की वजह से कई लड़कियों की मौत भी हो चुकी है, मगर यहां महिला की खूबसूरती का पैमाना उसका मोटा होना ही है।
विज्ञापन
मोको टैटू
टैटू बनवाना आज के लाइफस्टाइल का हिस्सा है और स्टेटस सिंबल भी, लेकिन न्यूजीलैंड के माओरी लोगों के लिए टैटू सुंदरता की पहचान है और एक खास परंपरा, जिसकी अनदेखी वे किसी भी कीमत पर नहीं कर सकते।
कुछ अलग है तो यह कि माओरी हाथ, पैर या कमर पर नहीं, बल्कि पूरे चेहरे पर टैटू बनवाते हैं। चेहरे पर जो टैटू गुदवाए जाते हैं उन्हें मोको कहा जाता है।
घास काटने के बदले हुई सेक्स करने की डील और फिर...
यह टैटू पौराणिक कथाओं के साथ-साथ पैतृक जानकारी से भरे रहते हैं। मोको टैटू की रूपरेखा में परिवार की जानकारी, जनजातीय मान्यता और उनकी सामाजिक स्थिति से जुड़ी जानकारी भी शामिल होती है। इन लोगों में यह टैटूज सुंदरता के साथ-साथ उनकी पहचान और समाजिक प्रतिष्ठा को बताने के लिए बेहद जरूरी समझे जाते हैं।
कुछ अलग है तो यह कि माओरी हाथ, पैर या कमर पर नहीं, बल्कि पूरे चेहरे पर टैटू बनवाते हैं। चेहरे पर जो टैटू गुदवाए जाते हैं उन्हें मोको कहा जाता है।
घास काटने के बदले हुई सेक्स करने की डील और फिर...
यह टैटू पौराणिक कथाओं के साथ-साथ पैतृक जानकारी से भरे रहते हैं। मोको टैटू की रूपरेखा में परिवार की जानकारी, जनजातीय मान्यता और उनकी सामाजिक स्थिति से जुड़ी जानकारी भी शामिल होती है। इन लोगों में यह टैटूज सुंदरता के साथ-साथ उनकी पहचान और समाजिक प्रतिष्ठा को बताने के लिए बेहद जरूरी समझे जाते हैं।
दाग में छिपी है खूबसूरती
भारत की बात करें तो यहां शरीर पर हल्का सा दाग या निशान होने के कारण लड़कियों को काफी प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, मगर इथोपिया में ऐसा नहीं है।
इथोपिया की कैरो जनजाति में महिला की सुंदरता को उसके शरीर पर पड़े दाग और धब्बों से ज़ोड़कर देखा जाता है। इतना ही नहीं यहां शरीर पर निशान या दाग होने वाली महिला को सुंदर और आकर्षक समझा जाता है।
सुंदरता के इस पैमाने से यहां के लोग इस हद तक प्रभावित हैं कि महिलाएं दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरकर भी शरीर पर निशान बनवाती हैं। शरीर को खुरचकर बनाये जाने वाले यह निशान यहां की संस्कृति का एक हिस्सा हैं।
ये खबर जरूर पढ़िए, वरना आपका मुंह भी हो जाएगा कुछ ऐसा
गोदना के द्वारा महिलाओं के शरीर पर पारंपरिक निशान बनाये जाते हैं। जिन महिलाओं के शरीर पर यह निशान अधिक आकर्षक और गहरे होते हैं, उन्हें विशेष रूप से कामुक और आकर्षक माना जाता है।
इथोपिया की कैरो जनजाति में महिला की सुंदरता को उसके शरीर पर पड़े दाग और धब्बों से ज़ोड़कर देखा जाता है। इतना ही नहीं यहां शरीर पर निशान या दाग होने वाली महिला को सुंदर और आकर्षक समझा जाता है।
सुंदरता के इस पैमाने से यहां के लोग इस हद तक प्रभावित हैं कि महिलाएं दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरकर भी शरीर पर निशान बनवाती हैं। शरीर को खुरचकर बनाये जाने वाले यह निशान यहां की संस्कृति का एक हिस्सा हैं।
ये खबर जरूर पढ़िए, वरना आपका मुंह भी हो जाएगा कुछ ऐसा
गोदना के द्वारा महिलाओं के शरीर पर पारंपरिक निशान बनाये जाते हैं। जिन महिलाओं के शरीर पर यह निशान अधिक आकर्षक और गहरे होते हैं, उन्हें विशेष रूप से कामुक और आकर्षक माना जाता है।
सुराही जैसी गर्दन
बर्मा की एक खास अल्पसंख्यक जनजाति कायान के लोगों में महिलाओं की लंबी गर्दन को सुंदरता की निशानी माना जाता है।
इस बात को यहां की महिलाएं भी खास महत्व देती हैं। गर्दन को लंबा और आकर्षक बनाने के लिए पांच साल की उम्र से ही गर्दन को बढ़ाने की कवायद शुरू हो जाती है। गर्दन में पीतल के छल्ले पहने जाते हैं।
गर्दन और उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह छल्ले भी बढ़ते रहते हैं। इस जनजाति से जुड़ा एक गांव थाईलैंड में भी है, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र माना जाता है। कुछ लोग इसे इस विशेष जनजाति के लोगों का शोषण मानते हैं तो कुछ का मत है कि यह तरीका कायान लोगों को अपने आप को अलग दिखाने का एक अवसर देता है।
दोनों ही बातों से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि जिस तरह गर्दन में पीतल का यह छल्ला पहना जाता है, उस प्रकिया में गर्दन हिल नहीं सकती और यह काफी पीड़ादायक भी होता है। विवाद चाहे कितना भी हो, फिलहाल सच यही है कि लंबी गर्दन ही इन महिलाओं को सुंदर कहलाने का अवसर देती है।
इस बात को यहां की महिलाएं भी खास महत्व देती हैं। गर्दन को लंबा और आकर्षक बनाने के लिए पांच साल की उम्र से ही गर्दन को बढ़ाने की कवायद शुरू हो जाती है। गर्दन में पीतल के छल्ले पहने जाते हैं।
गर्दन और उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह छल्ले भी बढ़ते रहते हैं। इस जनजाति से जुड़ा एक गांव थाईलैंड में भी है, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र माना जाता है। कुछ लोग इसे इस विशेष जनजाति के लोगों का शोषण मानते हैं तो कुछ का मत है कि यह तरीका कायान लोगों को अपने आप को अलग दिखाने का एक अवसर देता है।
दोनों ही बातों से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि जिस तरह गर्दन में पीतल का यह छल्ला पहना जाता है, उस प्रकिया में गर्दन हिल नहीं सकती और यह काफी पीड़ादायक भी होता है। विवाद चाहे कितना भी हो, फिलहाल सच यही है कि लंबी गर्दन ही इन महिलाओं को सुंदर कहलाने का अवसर देती है।
लंबे कान है शान
सुंदरता के इन अजब-गजब रंगों में एक रंग केन्या का भी है। यहां के मसाई द्वीप में महिलाओं की सुंदरता की पहचान उनके लंबे और बड़े कानों से होती है।
इसके लिए यहां की महिलाएं कानों में छेद करके उनमें पत्थर या हाथी दांत के टुकड़े फंसा देती हैं। इसके वजन से कान अधिक लटक जाते हैं साथ ही उनके कान के छेद भी बड़े हो जाते हैं।
इसके लिए यहां की महिलाएं कानों में छेद करके उनमें पत्थर या हाथी दांत के टुकड़े फंसा देती हैं। इसके वजन से कान अधिक लटक जाते हैं साथ ही उनके कान के छेद भी बड़े हो जाते हैं।