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37 साल से हवा में उठा रखा है ये 'हाथ'
अंकुर त्रिपाठी/महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)
Updated Wed, 16 Jan 2013 03:54 PM IST
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एक तरफ जहां बेटियों पर अत्याचार हो रहा है वहीं कई संत और साधक बेटियों की रक्षा के लिए सालों से कठिन और दुसाध्य तप कर रहे हैं। कुंभ में काली मार्ग पर दशनाम आवाहन अखाड़ा में आए उर्ध्व बाहु तपस्वी हठयोगी महंत भोला गिरि और उनके शिष्य महंत कालगिरि खड़ेश्वरी भी ऐसे साधक हैं। वे दुनिया से बेटियों पर अत्याचार और गौ हत्या खत्म होने की कामना से तपस्या कर रहे हैं।
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गुजरात में वडोदरा स्थित शिवबाड़ी आश्रम के महंत भोला गिरी बापू हठयोगी नागा हैं। पिछले 37 बरसों से वह लगातार अपने बाएं हाथ को ऊपर उठाकर रखते हैं। इस वजह से उन्हें उर्ध्व बाहु तपस्वी कहा जाता है। भोलागिरी कहते हैं कि वह दुनिया में चौतरफा गायों के वध से बेहद दुखी हैं। इसी तरह बहू-बेटियों पर हो रहे जुल्म से भी उनके मन को भारी ठेस पहुंची है।
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ऐसी घटनाओं से विचलित होकर उन्होंने तय कर लिया कि वह कन्याओं और गायों की हत्या पर अंकुश की कामना करते हुए तपस्या करेंगे। तब से वह अपने एक हाथ को अनवरत उठाए रहते हैं। 35 साल तक उन्होंने अन्न नहीं लिया। सेहत बिगड़ने पर डॉक्टर के दबाव पर दो साल पहले उन्होंने एक वक्त फलाहार शुरू कर दिया। मगर वह अपने संकल्प पर अडिग हैं।
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खड़े रहकर जीवन गुजारने का प्रण
महंत भोला गिरि के शिष्य राजस्थान के अलवर जनपद से आए महंत काल गिरि खड़ेश्वरी ने भी पांच साल पहले विश्व में अमन-चैन की कामना के साथ खड़े रहकर जीवन गुजारने का प्रण लिया। वह हरदम खड़े रहते हैं। खड़े-खड़े ही फलाहार और झपकी भी ले लेते हैं।
हिमाचल प्रदेश से आए श्री महंत गंगा गिरि माताजी कहते हैं कि लोगों में जोर-जुल्म के खिलाफ चेतना और समाज कल्याण की भावना आनी चाहिए।