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ऐसा करिश्माई बालक, जिसके जिस्म से उठती हैं आग की लपटें

Sat, 10 Aug 2013 01:10 PM IST
इंटरनेट डेस्क
इंटरनेट डेस्क Updated Sat, 10 Aug 2013 01:10 PM IST
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nfant keeps catching fire

आपने भी कार्टून, साई-फाई या फंतासी किताबों या फिल्मों में पढ़ा-देखा होगा होगा, जिनके शरीर में खुद-ब-खुद आग लग जाती थी। लेकिन उन्हें देखकर भरोसा करना मुश्किल लगता था। लेकिन अब यकीन करना होगा।

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टीओआई की खबर के मुताबिक चेन्नई में ढाई महीने पहले पैदा हुए राहुल को 'फायरब्वॉय' कहा जा सकता है क्योंकि एक अजीबोगरीब बीमारी की वजह से उसके शरीर में आग लग जाती है।
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बिना सिर के पैदा हुआ बच्चा


इस बेहद दुर्लभ और गंभीर बीमारी को मेडिकल की जुबान में स्पोंटेनियस ह्यूमन कंबशन (एसएचसी) कहते हैं। दुनिया में इस बीमारी से जूझने वाले केवल 200 लोग हैं। ढाई महीने की उम्र तक राहुल तीन बार आग से झुलस चुका है।
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पहली बार हादसा तब हुआ जब वो महज नौ दिन का ही था। राहुल की मां राजेश्वरी को उस समय अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हुआ जब उसने राहुल के शरीर से उठती लपटों को देखा। जबकि बच्चे के आस-पास ऐसा कुछ भी नहीं था, जिससे आग लग सके।

राजेश्वरी उसे लेकर विल्लूपुरम मेडिकल कॉलेज पहुंची, जहां से उसे तीन दिन बाद छुट्टी दे दी गई। घर लौटने के बाद दोबारा राहुल झुलसने लगा।

हालांकि डॉक्टरों के मुताबिक, राहुल पूरी तरह से स्वस्थ है और उसके शरीर के सारे अंग अच्छी तरह से काम कर रहे हैं। चौथी बार उसके शरीर में आग नौ अगस्त को लगी और इस बार आग सिर से लेकर पांव तक थी।

पचास साल बाद दिया ममी का जन्म

राहुल का इलाज कर रहे डॉक्टर नारायणा के मुताबिक, राहुल के रोम छिद्रों से ज्वलनशील गैसें निकलती हैं, जिसकी वजह से ये हादसे होते हैं। राहुल के मामले को लेकर डॉक्टरों में अलग-अलग राय है। कुछ का कहना है कि हम सब के खून में एल्कोहल की मात्रा होती है। जब ये ज्यादा हो जाता है तो ऐसी स्थिति बनती है।

करीब 20 साल पहले ऐसा ही एक मामला आया था, जिसमें एक 23 साल के व्यक्ति के शरीर में अपने आप आग लग जाती थी। दुख की बात ये है कि इस बीमारी को कोई प्रमाणिक इलाज नहीं है।


टाटा मेमोरियल अस्पताल के डॉक्टर कल्पेश गाजीवाला का कहना है कि ये मामला चौंकाने वाला है। जहां बच्चे मां का दूध पीते हैं और उसका मिथेन में बदलना काफी मुश्किल है। संभव है कि ये एसएचसी के बैक्टीरिया के वजह से हो। जो खाने को तेजी से इस गैस में बदल देते हैं।

ऐसी हालत में शरीर में आग लगने के लिए एक हल्का सा स्पार्क भी बहुत है। ऐसे में बच्चे को सिल्क के कपड़े पहनाने से परहेज ही सही है। बच्चे को ठंडी जगह पर रखना सबसे अच्छा है।

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