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मुख्यमंत्री जी से मिलने को रामधुन गा रहे लोग
भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)।
Updated Tue, 20 Nov 2012 11:12 AM IST
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विकासखंड क्षेत्र के कैंथी गांव के ग्रामीणों ने विकास के लिए अनोखा आंदोलन छेड़ रखा है। विकास व गांव के हालात देखने के लिए मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग को लेकर गांव वाले 42 दिनों से रामधुन गा रहे हैं। लेकिन आंदोलन के इस अनोखे तरीके का अब तक न तो अफसरों पर कोई असर पड़ा और न ही सत्तारूढ़ दल के नेताओं के कान पर जूं रेंगी। डेढ़ महीने की इस अवधि में गांव की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। अलबत्ता रामधुन आंदोलन में शामिल एक व्यक्ति की तबियत बिगड़ने से मौत हो गई। इसके बावजूद गांव में रामधुन आंदोलन अनवरत जारी है। ग्रामीण की मौत की सूचना पर सदर विधायक साध्वी निरंजन ज्योति ने गांव पहुंचकर परिवारीजनों को ढांढस बंधाया और प्रशासन से मुआवजे की मांग की।
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गौरतलब है कि चंद्रावल नदी के उस पार बीहड़ी गांव कैंथी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। मूलभूत समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन को दर्जनों बार ज्ञापन सौंपे पर कुछ न हुआ। जब जनगणना कार्यक्रम का बहिष्कार करने का मन मनाया तो अफसरों ने आश्वासन दिया था, लेकिन फिर नतीजा सिफर ही रहा।
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थक-हारकर ग्रामीणों ने आंदोलन का अनोखा तरीका निकाला। ग्रामीण गांव के शिव मंदिर में रामधुन गाने लगे। वे बोले, जब तक मुख्यमंत्री गांव नहीं आएंगे, तब तक रामधुन जारी रहेगी। बीते दिनों आंदोलन का यह तरीका जिले और मंडल में काफी चर्चा में रहा। 42 दिनों से गांववालों की रामधुन जारी है लेकिन मुख्यमंत्री गांव नहीं पहुंचे। मुख्यमंत्री ही क्या, जिला या तहसील के किसी अफसर ने भी इनकी सुध नहीं ली। एक रात रामधुन में आए गांव निवासी भोला (52) की तबियत बिगड़ गई। यह देखकर रामधुन में बैठे विकास शिवहरे और जीतेंद्र चौहान उसे घर छोड़ आए लेकिन थोड़ी ही देर में उसकी मौत हो गई।
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गांव के अरिमर्दन सिंह ने बताया कि भोला बार-बार कह रहा था कि भैया अब कोई गांव नहीं आएगा और गांव का विकास नहीं होगा। निराशा की वजह से तबियत बिगड़ने से उसकी मौत हुई। घटना की सूचना मिलने पर सदर विधायक साध्वी निरंजन ज्योति गांव पहुंची और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। साथ ही शासन प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक लाभ दिए जाने की मांग की।