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दहल जाएगा आपका दिल, जब जानेंगे इस औरत ने कैसे दिया बच्चे को जन्म
Updated Fri, 24 Jan 2014 02:14 PM IST
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कहते हैं दुनिया में भले ही एक से बढ़कर एक मुश्किल काम हो, लेकिन मां बनना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
पहचाना आपने, ये चोंच नहीं मछली की पूंछ है
9 महीने तक बच्चे को गर्भ में पालना, प्रसव पीड़ा से गुजरना और फिर जिंदगीभर बच्चे की देखभाल करना...क्या इससे ज्यादा चुनौतीपूर्ण कुछ हो सकता है? आप भले ही सोच में पड़ गए हों लेकिन इस महिला की कहानी पढ़ने के बाद आप दंग रह जाएंगे।
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पहचाना आपने, ये चोंच नहीं मछली की पूंछ है
9 महीने तक बच्चे को गर्भ में पालना, प्रसव पीड़ा से गुजरना और फिर जिंदगीभर बच्चे की देखभाल करना...क्या इससे ज्यादा चुनौतीपूर्ण कुछ हो सकता है? आप भले ही सोच में पड़ गए हों लेकिन इस महिला की कहानी पढ़ने के बाद आप दंग रह जाएंगे।
भारत की कहानी है ये
किसी भी परिवार के लिए घर में बच्चे का जन्म किसी भी उत्सव से बड़ा उत्सव होता है। कई मांएं ऐसी होती हैं जिन्हें गर्भकाल के दौरान और उसके बाद सारी सुख-सुविधाएं और सहूलियत मिलती है लेकिन ये बात हर किसी पर लागू नहीं होती।
नाक से कर सकता है ऐसा काम, जो आप मुंह से भी नहीं कर सकते
लद्दाख के इस परिवार की कहानी सुनकर आपको इस मां के साहस पर गर्व भी होगा और उसकी तकलीफ के लिए दुख भी।
नाक से कर सकता है ऐसा काम, जो आप मुंह से भी नहीं कर सकते
लद्दाख के इस परिवार की कहानी सुनकर आपको इस मां के साहस पर गर्व भी होगा और उसकी तकलीफ के लिए दुख भी।
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-35 डिग्री तापमान में 45 मील
लद्दाख के इस परिवार की कहानी वाकई चौंकान वाली है। जहां गर्भवती महिला को अपने सबसे करीबी अस्पताल पहुंचने के लिए भी 45 मील का सफर तय करना पड़ता है। वो भी शून्य से 35 डिग्री कम तापमान में।
नौ दिनों का सफर
ऊंचे-नीचे पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए 45 मील का सफर तय करना पड़ता है, जिसमें कुल नो दिन का समय लगता है। और फिर उसी रास्ते उतने ही तापमान में व नवजात बच्चे के साथ लौटना भी होता है।
गंदी नजर से बचाने के लिए गर्म पत्थर से रगड़े जाते हैं कुंवारियों के अंग
डेली मेल की खबर के अनुसार, जिस फोटोग्राफर ने ये तस्वीरें ली हैं वो पूरे नौ दिन इस परिवार के साथ सफर करता रहा।
गंदी नजर से बचाने के लिए गर्म पत्थर से रगड़े जाते हैं कुंवारियों के अंग
डेली मेल की खबर के अनुसार, जिस फोटोग्राफर ने ये तस्वीरें ली हैं वो पूरे नौ दिन इस परिवार के साथ सफर करता रहा।
करना होता बर्फीली नदी का सामना
फोटोग्राफर के अनुसार, ये परिवार एक दिन में आठ घंटे तक चलता था। उन्हें बर्फीली नदियां पार करनी होती थीं। जिसमें उनके घुटने तक पानी होता था लेकिन वो चलते रहते थे।
बच्चे के साथ लौटना
फोटोग्राफर टिम बताते हैं कि एक रात उन्होंने इस परिवार को देखा। उनके साथ महज एक दिन का बच्चा था। वो उन्हें देखकर हैरत में थे।