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...और कूड़े के ढेर से बरसने लगी लक्ष्मी
नई दिल्ली/ इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 15 Jul 2013 02:49 PM IST
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सफाई करने आए कर्मचारियों को भी शायद उम्मीद नहीं रही होगी कि सड़े-गंदे-बदबूदार कूड़े के ढेर से लक्ष्मी यूं बरस पड़ेगी। बंगलूरू के नित्तुवल्ली सर्किल में लोगों की आंखें उस समय फटी की फटी रह गई जब कूड़े के ढेर से हजारों सिक्के बरसने लगे।
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पास में ही सिक्कों की इस पोटली की मालकिन ये पूरा तमाशा देख रही थी। उसकी 12 साल की गाढ़ी कमाई सड़क पर बिखरी पड़ी थी। सिक्के इतने थे कि उन्हें गिनने में आधा दिन निकल गया। 31 हजार 200 रुपये की ये रकम किसी और की नहीं बल्कि 70 साल की भिखारन काली बाई की थी।
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टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, काली बाई 12 साल हर रोज भीख के पैसों को इसी कचरे के ढेर में छिपा कर रखती थी। आलम ये था कि उसने अपना डेरा भी इसी गंदगी के ढेर के पास लगा रखा था। वो किसी दूसरे को कूड़े के आस-पास भी नहीं जाने देती थी।
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बाद में जब मौके पर पुलिस आई तो काली बाई ने पैसे चले जाने के डर से सबकुछ सच-सच बता दिया। पुलिस को दिए बयान में उसने कहा कि वो ये पैसे अपनी बेटी की शादी के लिए जमा कर रही थी और उसके पास इन्हें सुरक्षित रखने की इससे अच्छी जगह कोई नहीं थी।
सिक्के इतने ज्यादा थे कि नौ पुलिस वाले मिलकर इसे आधे दिन में गिन पाए। इसके बाद काली बाई को महिला सुधारगृह भेज दिया।