फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Auto Archives ›   London’s buses embrace wireless charging

प्रदूषण घटाने के लिए बिना तार के ही चार्ज हो जाएंगी बसें

Wed, 10 Dec 2014 11:34 AM IST
Updated Wed, 10 Dec 2014 11:34 AM IST
विज्ञापन
London’s buses embrace wireless charging

लंदन की लाल डबल डेकर बसें अपने बेहतरीन फीचर्स के लिए जानी जाती रही हैं। लेकिन अब इनमें एक क्रांतिकारी बदलाव हो रहा है और दूसरे शहर भी इन बदलावों से प्रभावित हो रहे हैं।

विज्ञापन


ब्रिटेन की राजधानी लंदन की सड़कों पर रोज़ाना लगभग 8700 डबल डेकर बसें दौड़ती हैं और इनमें तकरीबन 65 लाख लोग सफर करते हैं।

प्रदूषण घटाने के लिए इन डबल डेकर बसों को न केवल बैटरी से चलाया जाएगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट फ़ॉर लंदन (टीएफ़एल) के प्रयोग अगर सफल रहे तो शहरी इलाक़ों के लिए यह बदलाव क्रांतिकारी हो सकते हैं।
विज्ञापन


नया सिस्टम
टीएफ़एल ऐसा रीचार्जिंग सिस्टम विकसित करने में जुटा है जो बसों पर लगा होगा और तब भी काम करता रहेगा, जब बसें सड़क पर दौड़ रही होंगी।

टीएफ़एल एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है जिससे बसों की बैटरी बिना तार के ही चार्ज हो जाएगी। इसका परीक्षण अगले साल की शुरुआत में करने की योजना है।

योजना यह है कि तारों के बड़े-बड़े बंडलों से पीछा छुड़ाते हुए शहर की बसों की बैटरी हर समय चार्ज्ड रहे, तब भी जब बसें चल रही हों।

टीएफ़एल बैटरी चार्जिंग के विकल्पों की तलाश कर रहा है। जब ज़रूरत हो तब बैटरी चार्ज। जैसा कि लोग स्मार्टफ़ोन के मामले में करते हैं। जैसे ही कोई ख़ाली सॉकेट देखते हैं, स्मार्टफ़ोन चार्ज करने लगते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बसों की बैटरी को भी इसी तरह जल्दी और आसानी से लबालब चार्ज किया जा सकता है। इससे बसों की डीज़ल पर निर्भरता नहीं रहेगी।

वायरलेस चार्जिंग

London’s buses embrace wireless charging

टीएफ़एल के निदेशक (बस) माइक वेस्टन कहते हैं, "हमारी कई डबल डेकर बसें दिन में 19 से 20 घंटे चलती है। अगर हम इन बसों में पर्याप्त मात्रा में बैटरियां लगाना चाहें तो यात्रियों के लिए जगह ही नहीं बचेगी। इसलिए हमें अन्य विकल्पों को देखना होगा।"

इनमें से एक विकल्प बिना तारों के बैटरी को चार्ज करना है। बस जब टर्मिनल पर लौटेगी तो इसे एक इंडक्शन पैड पर खड़ा किया जाएगा, जो बस को पावर ट्रांसफर करेगा और पावर ट्रांसफर की दर होगी हर पाँच मिनट में 10 किलोवाट।

इंडक्शन पैड

London’s buses embrace wireless charging

इंडक्शन पैड की मूलभूत तकनीकी इलेक्ट्रिक टूथब्रश की चार्जिंग जैसी है। जिस तरह से इलेक्ट्रिक टूथब्रश को बिजली के सीधे संपर्क में आए बिना चार्ज किया जा सकता है, उसी तरह से क्या बसों की बैटरियां भी चार्ज हो सकती हैं।

बस को ज़मीन पर बिछे इंडक्शन कॉयल के ऊपर खड़ा करना होगा, जो बसों के निचले हिस्से में लगे उपकरण से इसे चार्ज करेगा।

इंडक्शन कॉयल और उपकरण के बीच छह इंच का फासला होना चाहिए, इसलिए बस के इस हिस्से को कुछ 'झुकाना' होगा- ठीक वैसे ही जैसा कि यात्रियों को चढ़ने-उतरने की सुविधा देने के लिए किया गया है।

इसका मतलब हुआ कि ड्राइवर को बस से उतरकर बैटरी को तार से जोड़ने की ज़रूरत नहीं होगी, इससे चार्जिंग में लगने वाला समय बचेगा।

वेस्टन कहते हैं, "जिन वाहनों पर हम इसे आजमाएंगे, उनमें अभी डीज़ल इंजन लगा है। यह उस स्थिति में बैकअप का काम करेगा, जब बस टर्मिनल तक नहीं पहुंच पाएगी। या फिर, बस अगर ट्रैफ़िक में फंस जाती है या देरी से चल रही है।"

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed