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उत्तर प्रदेश चुनाव: जनेश्वर मिश्र के बहाने सपा का 'साइकिल सैलाब', बसपा का भी 'मिश्रा प्रणाम'

Thu, 05 Aug 2021 06:59 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Thu, 05 Aug 2021 06:59 PM IST
सार

राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं वैसे तो जनेश्वर मिश्र समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में थे इसलिए समाजवादी पार्टी जनेश्वर मिश्र पर अपना सबसे ज्यादा हक भी समझती है। लेकिन बात जब ब्राह्मणों की आती है और बहुजन समाज पार्टी भी उसमें शामिल होकर जनेश्वर मिश्र को श्रद्धासुमन अर्पित करने लगे तो मामला ब्राह्मणों के बंटवारे की ओर भी दिखने लगता है...

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Up election 2022: Samajwadi party and Bahujan samaj party both are influencing the brahmin voters before assembly polls
साइकिल यात्रा पर निकले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश में चुनावी शोर बढ़ने लगा है। प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी ने गुरुवार को प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जनेश्वर मिश्रा की जयंती पर साइकिल रैली के माध्यम से उमड़े जनसैलाब से अपनी ताकत का एहसास कराया। वहीं बहुजन समाज पार्टी ने भी जनेश्वर मिश्र की जयंती पर ब्राह्मणों को अपने पाले में करने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती ने उनको श्रद्धा सुमन अर्पित कर 'प्रणाम' किया। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश की राजनीति ब्राह्मणों के इर्द-गिर्द ही घूम रही है।

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लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सड़कों पर समाजवादी पार्टी के नेता और बड़ी भीड़ एक साथ नजर नहीं आ रही थी। गुरुवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जनेश्वर मिश्र की जयंती पर पूरे प्रदेश में साइकिल रैली का आयोजन किया। शुरुआत लखनऊ से की तो प्रदेश की राजधानी पर साइकिल का सैलाब उमड़ पड़ा। बहुत लंबे अरसे बाद समाजवादी पार्टी की इतनी बड़ी भीड़ और साइकिल रैली देखकर राजनीतिक गलियारों में कयास बाजी भी शुरू हो गई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि यह जो भीड़ गुरुवार को प्रदेश की राजधानी की सड़कों पर दिखी यह उत्तर प्रदेश में आने वाली सपा सरकार की आहट ही है। उन्होंने कहा सिर्फ लखनऊ की राजधानी ही नहीं बल्कि प्रदेश के हर जनपद, तहसील, शहर, गांव और मोहल्लों में इतनी भीड़ के साथ साइकिल रैली का आगाज होता रहेगा।

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राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है जनेश्वर मिश्रा की जयंती पर अखिलेश यादव का मकसद साइकिल रैली के साथ ब्राह्मणों को साधना भी था। भारतीय जनता पार्टी को टक्कर देने के लिए बहुजन समाज पार्टी ने ब्राह्मण सम्मेलन का आगाज किया, तो अखिलेश यादव ने भी अपनी पार्टी के ब्राह्मण नेताओं को एकजुट कर प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन करने की तैयारी की। इसी दौरान जनेश्वर मिश्रा की जयंती पर बीते कुछ समय से बड़े आयोजन की तैयारियां चल रही थीं। ताकि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को एक साथ एक मंच पर लाकर ब्राह्मणों को अपने पाले में जोड़ने का संदेश दिया जाए। क्योंकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी इस वक्त उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को अपने पाले में खींचने के लिए लगी हुई हैं इसीलिए जनेश्वर मिश्र की जयंती राजनीतिक मामलों के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।

राजनीतिक विश्लेषक एचडी शुक्ला कहते हैं वैसे तो जनेश्वर मिश्र और मुलायम सिंह यादव शुरुआत से ही कंधे से कंधा मिलाकर चलते रहे। चूंकि मिश्र समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में थे इसलिए समाजवादी पार्टी जनेश्वर मिश्र पर अपना सबसे ज्यादा हक भी समझती है। लेकिन बात जब ब्राह्मणों की आती है और बहुजन समाज पार्टी भी उसमें शामिल होकर जनेश्वर मिश्र को श्रद्धासुमन अर्पित करने लगे तो मामला ब्राह्मणों के बंटवारे की ओर भी दिखने लगता है। वह कहते हैं कि मायावती का जनेश्वर मिश्र की जयंती पर उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करना और नमन करना यह संदेश देता है कि बसपा अब नई राह पर निकली हुई है। ऐसे में ब्राह्मणों की हिस्सेदारी सिर्फ भाजपा के खाते में ही नहीं जाएगी बल्कि बसपा और सपा भी उसमें मतलब भर की हिस्सेदारी लेने की तैयारी में जुट गई है।

साइकिल यात्रा के दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इस सरकार के पास अपना कोई भी काम नहीं है। उन्होंने कहा समाजवादी पार्टी के किए गए काम को अपना बता कर पब्लिक को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन प्रदेश की जनता भाजपा के झांसे में नहीं आने वाली। भाजपा अखिलेश यादव के इस बयान से कोई इत्तेफाक नहीं रखती है भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं कि जब चुनाव नजदीक आते हैं तो नेता सड़कों पर आ जाते हैं। उनका कहना है प्रदेश की जनता को अच्छी तरीके से पता है कि कौन काम करा रहा है और किसने कितना काम कराया था। राकेश त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि महज एक लाख रुपये खर्च करके शिलान्यास करा देने से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे नहीं बन जाता है। उसके लिए बाकायदा बजट लाना पड़ता है और भाजपा सरकार ने न सिर्फ बजट लाकर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को तैयार कराया बल्कि अधूरे पड़े आगरा एक्सप्रेस-वे को भी पूरा कराया। उन्होंने कहा कि साइकिल रैली में उमड़ी भीड़ लखनऊ की नहीं पूरे प्रदेश से आए हुए लोगों की थी। राकेश त्रिपाठी कहते हैं जब आप पूरे प्रदेश के लोगों को राजधानी लखनऊ में बुला लोगे तो संख्या ज्यादा दिखेगी ही।

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