मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव : किसानों की नाराजगी और जातीय संघर्ष से भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं

शरद गुप्ता, नई दिल्ली Updated Sat, 24 Nov 2018 04:01 AM IST
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Madhya Pradesh Election : BJP in problem due to anger of farmers

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मध्यप्रदेश में इस बार भाजपा के सामने पिछले 15 वर्षों की सत्ता विरोधी लहर से निपटने की चुनौती है। किसानों की नाराजगी, एससी एसटी एक्ट पर हुए जातीय संघर्ष और बड़ी संख्या में बागियों की मौजूदगी ने परिस्थितियों को और मुश्किल बना दिया है। ऐसे में भाजपा को मुख्यमंत्री शिवराज के कार्यों और प्रधानमंत्री मोदी की बेहतर छवि का ही भरोसा है।
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किसानों के लिए राज्य सरकार द्वारा लाई गई भावांतर योजना वरदान साबित होनी चाहिए थी। योजना के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा घोषित एमएसपी से जितना कम भाव किसानों को आढ़तियों से मिलेगा, उसका अंतर राज्य सरकार देगी। साथ ही मौसम से फसल खराबे पर किसानों को हुए नुकसान की पूर्ति फसल बीमा योजना के तहत की जानी थी। यानी किसानों को किसी भी स्थिति में नुकसान नहीं होना था।
फिर भी राज्य में किसानों की हालत जस की तस है। आढ़तियों ने दाम यह कहते हुए गिरा दिए कि नुकसान की भरपाई सरकार तो भावांतर योजना के तहत करेगी। लेकिन ये भरपाई होने में तीन से चार महीने लग जाते हैं और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। फसल बीमा योजना की स्थिति भी ठीक नहीं है। कम ही किसान ही इसकी शर्तें पूरी कर पाते हैं और मुआवजा भी आधा अधूरा मिल रहा है।
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एससी-एसटी एक्ट समाज में गहरी हुई खाई

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