पत्रकार जे डे ने छोटा राजन को कहा था 'चिंदी', गुस्से में अंडरवर्ल्ड डॉन ने उठाया था यह कदम
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पत्रकारिता की दुनिया में जे डे के नाम से मशहूर ज्योतिर्मय डे की हत्या की साजिश अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन ने रची थी। सात साल पहले 11 जून, 2011 को पोवई में डे की हत्या के बाद एक जुलाई को राजन ने एक हिंदी चैनल को फोन कर स्वीकार किया था कि उसने ही इस वारदात को अंजाम देने का आदेश दिया था क्योंकि डे सारी हदें पार करते हुए उसे चिंदी कहने की हिमाकत की थी।
राजन ने 22 मई को हिस्ट्रीशीटर सतीश कालिया को फोन कर डे के परेल स्थित ऑफिस और पोवई स्थित घर का पता, उनकी मोटरसाइकिल का नंबर प्लेट एवं अन्य जरूरी जानकारियां देते हुए उनकी हत्या करने का हुक्म दिया था। कालिया ने अपने सात गुर्गों के साथ मिलकर इसकी पूरी योजना बनाई। वारदात में इस्तेमाल के लिए वाहन, 32 बोर का रिवाल्वर और 25 कारतूसों का इंतजाम करने का जिम्मा इन सातों पर ही था।
चार दिन तक की थी रेकी
कालिया ने अपने गुर्गों के साथ 6 जून से 9 जून तक डे के पोवई स्थित आवास की रेकी की थी। तीन दिन बाद 11 जून को दो मोटरसाइकिलों और एक टोयोटा क्वालिस कार से कालिया और उसके साथियों ने डे का पीछा करना शुरू किया और जैसे ही वे अपने आवास के नजदीक पहुंचे कालिया ने उनकी पीठ में पांच गोलियां उतार दीं। उन्हें हीरानंदानी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
क्यों की गई हत्या
- हत्या किए जाने से पहले डे एक खबर लिखने वाले थे जिसमें राजन की नई प्रेमिका की जानकारी दी जाने वाली थी। राजन ने इस खबर को दबाने के लिए कहा लेकिन डे नहीं माने। राजन को लगा कि अगर उसकी पहली पत्नी सविता को यह बात पता चल जाएगी तो सब गड़बड़ हो जाएगा क्योंकि वह गैंग के वित्तीय मामलों को देख रही थी।
- उन्होंने कुछ खबरें लिखी थीं, जिसमें राजन के गैंग को कमजोर बताते हुए उसे थका हुआ गैंगस्टर करार दिया था, जिससे वह काफी चिढ़ गया था।
- डे ‘चिंदी-रैग्स टू रिचेज’ नामक एक किताब लिख रहे थे जिसमें देश के 20 गैंगस्टरों के फर्श से अर्श तक पहुंचने की कहानी थी। इस पुस्तक में वे दाऊद को असली डॉन बताने जा रहे थे। अपने सूत्रों के हवाले से कुछ ऐसी बातें भी बताने जा रहे थे जिससे छोटा राजन के देशभक्त होने का मुखौटा उतर जाता। इससे छोटा राजन बौखला गया था। किताब में छोटा राजन के बारे में कई तरह का खुलासा होने वाला था। लेकिन, किताब में सबसे अधिक खटकने वाला शब्द ‘चिंदी’ था जो छोटा राजन को पसंद नहीं था।
- किताब के बारे में जानकारी मिलने पर राजन ने डे को फोन कर मिलने को कहा था लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था। इस राजन ने डे को धोखेबाज करार दिया था।
- राजन को यह यकीन हो गया था कि डे उसके दुश्मन दाऊद इब्राहिम और उसके गैंग के लिए काम कर रहे थे। उसने यह भी कहा था कि डे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए भी काम करते थे।
- उसने कहा था कि डे की पेशेवर प्रतिद्वंद्वी एवं एशियन एज की पत्रकार जिग्ना वोरा ने उसे डे की हत्या के लिए उकसाया था।
कौन थे जे डे
मिड डे के वरिष्ठ खोजी पत्रकार डे ने नब्बे के दशक की शुरुआत में मुंबई के आफ्टरनून डिस्पैच एंड कूरियर से फ्रीलांसर के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। वे वहां वनों के अतिक्रमण और जंगलों की कटाई के कारण इनसानों एवं पशुओं के बीच टकराव के बारे में रिपोर्टिंग करते थे। इसके बाद उन्होंने मिड डे में फ्रीलांसर के तौर पर इन्हीं विषयों पर लिखना शुरू किया। उनकी कई रिपोर्टों पर महाराष्ट्र विधानसभा में सवाल उठाए गए।
1996 में इंडियन एक्सप्रेस के साथ जुड़ने के बाद उन्होंने क्राइम बीट देखना शुरू किया और उसके बाद जो हुआ वह इतिहास है। अपने करियर के दौरान उन्होंने ‘खल्लास’ और ‘जीरो डायल’ नामक दो पुस्तकें भी लिखीं जिन्हें मुंबई के अंडरवर्ल्ड की दुनिया का प्रमाणिक दस्तावेज माना जाता है।