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यूपी बोर्ड ने मांगा पिछले पांच साल के छात्रों का ब्योरा, स्कूलों की बढ़ी परेशानी
Sat, 12 Dec 2020 04:18 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sat, 12 Dec 2020 04:18 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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यूपी बोर्ड ने स्कूलों से पिछले पांच साल में कक्षा 9 और 11 में पंजीकृत व कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा में आवेदन करने वाले छात्रों का ब्योरा मांगा है। अचानक मांगे गए ब्योरे से स्कूल सकते में हैं। ब्योरे को कोषागार से सत्यापित कराना है।
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड की तरफ से आदेश है, इसलिए सभी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। 2015 से 2020 तक का विवरण देना है। इन छात्रों के कोषागार में जमा शुल्क के कोषपत्रों को सत्यापित कर परीक्षा कार्यालय में जमा कराना है।
यहां से पूरा रिकॉर्ड बोर्ड कार्यालय को भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय से यह लेखा-जोखा मांगा गया है। वहीं दूसरी तरफ अचानक पांच साल का विवरण मांगे जाने से स्कूल परेशान हैं।
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पिछले पांच साल के कोषपत्र एकत्रित कर कोषागार से सत्यापित कराना आसान नहीं होगा। स्कूलों को यह समझ नहीं आ रहा है कि अचानक पुराना रिकॉर्ड क्यों मांगा जा रहा है। एमडी शुक्ला इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एचएन उपाध्याय ने दावा किया कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या को लेकर गड़बड़ियां नहीं होती हैं।
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जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड की तरफ से आदेश है, इसलिए सभी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। 2015 से 2020 तक का विवरण देना है। इन छात्रों के कोषागार में जमा शुल्क के कोषपत्रों को सत्यापित कर परीक्षा कार्यालय में जमा कराना है।
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यहां से पूरा रिकॉर्ड बोर्ड कार्यालय को भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय से यह लेखा-जोखा मांगा गया है। वहीं दूसरी तरफ अचानक पांच साल का विवरण मांगे जाने से स्कूल परेशान हैं।
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पिछले पांच साल के कोषपत्र एकत्रित कर कोषागार से सत्यापित कराना आसान नहीं होगा। स्कूलों को यह समझ नहीं आ रहा है कि अचानक पुराना रिकॉर्ड क्यों मांगा जा रहा है। एमडी शुक्ला इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एचएन उपाध्याय ने दावा किया कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या को लेकर गड़बड़ियां नहीं होती हैं।