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दीक्षांत में जीते 13 मेडल, पीएडी में किया रिजेक्ट

Tue, 31 Jan 2017 10:37 PM IST
सचिन त्रिपाठी/अमरउजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी/अमरउजाला, लखनऊ Updated Tue, 31 Jan 2017 10:37 PM IST
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डेमो

केस 1- एलयू के गणित विभाग की छात्रा रुपाली श्रीवास्तव दीक्षांत समारोह-2017 में सबसे ज्यादा 13 मेडल जीतकर सबसे होनहार स्टूडेंट बनीं थीं। आंखों में शिक्षक बनने का सपना लेकर रुपाली ने विवि में पीएचडी के दाखिले के लिए आवेदन किया था। मगर, विवि की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया से रुपाली पार नहीं पा सकी और उसे दाखिले का पात्र नहीं समझा गया। विभाग में पीएचडी की नौ सीट थीं।

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केस 2- एलयू के प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग की छात्रा कोमल ने एमए में सबसे ज्यादा नंबर हासिल करके कुल नौ मेडल जीते थे। मेडल जीतने के मामले में दूसरे नंबर पर रहने वाली कोमल ने विवि में पीएचडी के लिए आवेदन किया था। एंट्रेंस पास करके साक्षात्कार दिया था। मगर, विभाग में 17 सीटें होने के बावजूद दाखिला नहीं मिल सका।

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केेस 3- एलयू के प्रतिष्ठित डॉ. चक्रवर्ती मेडल सहित समाज कार्य विभाग के चार अन्य पदक जीतने वाली छात्रा दीप्ति नारायण ने पीएचडी में दाखिले के लिए आवेदन किया था। एंट्रेंस पास करके साक्षात्कार तक भी पहुंचीं, लेकिन रिजल्ट जारी किया गया तो चयनित अभ्यर्थियों की सूची में नाम नहीं था। समाज कार्य विभाग में इस साल 12 सीटों पर दाखिले केे लिए आवेदन मांगे गए थे।
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लखनऊ विश्वविद्यालय अपने टॉपर्स को ही पीएचडी में दाखिले के लायक नहीं समझता है। ये तीन मामले उन स्टूडेंट्स के हैं जिन्होंने इस साल के दीक्षांत समारोह में सबसे ज्यादा मेडल हासिल किए। इसके बावजूद विवि के नए ऑर्डिनेंस के हिसाब से हुई पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में टॉपर्स को पीएचडी में दाखिला नहीं मिल सका।

390 में से केवल 175 जेआरएफ को दाखिला

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विवि ने एक तरफ तो नेट-जेआरएफ-एमफिल या राष्ट्रीय स्तर की अन्य स्कॉलरशिप पाने वाले स्टूडेंट्स को पीएचडी में दाखिले के लिए लायक नहीं समझा। इनके स्थान पर सामान्य पीजी पास स्टूडेंट्स को ज्यादा काबिल करार देते हुए दाखिला दे दिया गया।

दूसरी तरफ अपने टॉपर्स को भी विवि ने खारिज कर दिया है। एलयू में पीएचडी दाखिलों में इस साल जमकर गड़बड़झाला हुआ है। आलम यह है कि इस साल विभागों में ओवरऑल टॉप करने वाले स्टूडेंट्स को भी पीएचडी के लायक नहीं समझा गया।

ऐसे अभ्यर्थियों में इस साल दीक्षांत समारोह में सबसे ज्यादा 13 मेडल पाने वाली छात्रा रुपाली श्रीवास्तव, दूसरे नंबर पर नौ मेडल पाने वाली कोमल, तीसरे पर सबसे ज्यादा नंबर लाने वाली तनिमा गुप्ता के साथ ही डॉ. चक्रवर्ती समेत पांच मेडल जीतने वाली छात्रा दीप्ति नारायण का भी नाम है।

विवि ने पीएचडी ऑर्डिनेंस में ऐसी व्यवस्था कर रखी है जिससे प्रवेश परीक्षा के बजाय मुख्य आधार साक्षात्कार के नंबरों को बनाया गया है। 100 नंबर के साक्षात्कार में 60 नंबर पूरी तरह से शिक्षकों के हाथ में हैं। बाकी के 40 में 20 नंबर जेआरएफ को और 20 एकेडमिक रिकॉर्ड के आधार पर दिए जाने हैं।

विवि में इस साल 558 सीटों के लिए 1801 अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा में सफल घोषित हुए थे। इन अभ्यर्थियों में से 1,323 अभ्यर्थियों को नेट, जेआरएफ, एमफिल या ऑर्डिनेंस में  बताई गई किसी अन्य योग्यता की वजह से एंट्रेंस से छूट दी गई थी।

इनमें से 390 अभ्यर्थी जेआरएफ थे। इन अभ्यर्थियों में से केवल 175 को ही पीएचडी में दाखिला मिला है। बाकी के 215 जेआरएफ अभ्यर्थियों को दाखिला नहीं मिला। विवि प्रशासन ने इसके पीछे मुख्य वजह एक ही विभाग में ज्यादा जेआरएफ होना बताया है।

पदक लाने वाली छात्रा को भी नहीं बुलाया

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लखनऊ य‌ूनिवर्सिटी - फोटो : demo pic
दीक्षांत समारोह में तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा 6 पदक जीतने वाली छात्रा तनिमा ने भी पीएचडी के लिए आवेदन किया था। तनिमा ने इसी साल फिजिक्स में एमएससी की डिग्री प्राप्त की है।

सामान्य पीजी स्टूडेंट्स के तौर पर तनिमा ने पीएचडी एंट्रेंस दिया था। नए ऑर्डिनेंस के अनुसार एंट्रेंस में 50 फीसदी नंबर लाने की अनिवार्यता है। प्रवेश परीक्षा मेें तनिमा 50 फीसदी नंबर हासिल नहीं कर सकीं।

मगर, खास बात यह है कि विवि ने प्रवेश परीक्षा का प्रश्न पत्र परीक्षार्थियों को नहीं दिया था और ना ही आंसर-की ही जारी की थी। इसके बाद तनिमा ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका भी मांगी थी, लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला।

ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है किविवि की पीएचडी एंट्रेंस और पीजी मूल्यांकन प्रणाली में से किसे सही ठहराया जाए। क्योंकि इस स्थिति में दोनों का सही होना संभव नहीं है।

प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा ने बताया कि पीएचडी में पहले दिन करीब 170 अभ्यर्थियों ने फीस जमा की है। पीएचडी के लिए अभ्यर्थियों को ऑनलाइन फीस जमा करनी है। फीस जमा करने के बाद अभ्यर्थियों को छह फरवरी को संबंधित विभाग में रिपोर्ट करना है।

‘विवि की परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में काफी अंतर होता है विवि में टॉप करना दूसरी बात है और पीएचडी की प्रवेश प्रक्रिया में सफल होना अलग बात। विवि की मूल्यांकन प्रणाली और पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया दोनों पूरी तरह से सही और पारदर्शी है।’ प्रो. एनके पांडेय प्रवक्ता, एलयू
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