लॉ यूनिवर्सिटी में रात-दिन धरना, सोशल मीडिया पर भी छात्रों ने खोला मोर्चा, छात्र मायूस
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छह दिन से रात-दिन धरना। ट्विटर पर पीएम, केंद्रीय मंत्रियों समेत नेताओं से गुहार। यही नहीं टॉर्च मार्च भी निकाला। पिछले छह दिनों से उत्पीड़न समेत कई शिकायतों को लेकर धरना दे रे डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के छात्रों का रूटीन बदल गया है। पर, अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने को लेकर छात्र मायूस हैं।
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के धरना दे रहे छात्र गेट पर डटे हुए हैं। कक्षाएं पूरी तरह ठप हैं। छात्रों का आरोप है कि वीसी डॉ. गुरदीप सिंह न तो उनसे मिलते हैं और न ही बदइंतजामियों को दूर करने को लेकर कोई ठोस आश्वासन देते हैं। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर शनिवार रात टॉर्च मार्च निकाला। सभी छात्र अपने मोबाइल का टॉर्च ऑन कर विवि परिसर से लेकर आशियाना चौराहे तक मार्च में शामिल हुए।
इस दौरान छात्रों ने विवि प्रशासन विरोधी नारे लगाए और शासन से इस सबंध में कार्रवाई करने की मांग की। मार्च खत्म करने के बाद छात्र वापस आकर परिसर में धरने पर बैठ गए। छात्रों ने सीएम और डिप्टी सीएम से वार्ता के लिए समय मांगा है। रविवार को वे डिप्टी सीएम से मिलकर अपनी मांग रखेंगे।
सोशल साइट पर भी संभाला मोर्चा
छात्रों ने सीएम से लेकर पीएम समेत सभी प्रमुख नेताओं को ट्वीट कर मामले की जांच कराने की मांग की। सीएम और पीएम के अलावा छात्र गृहमंत्री राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, प्रकाश जावड़ेकर, किरन बेदी, डिप्टी सीम दिनेश शर्मा समेत अन्य नेताओं को ट्वीट किया। यहां तक कि कुछ छात्रों ने अन्य पार्टी के नेताओं मसलन शशि थरूर, कुमार विश्वास समेत बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार तक को भी अपनी मांगों से अवगत कराया है।
मनमाने खर्च का आरोप
परिसर में करीब 30 से ज्यादा डस्टबिन हैं। छात्रों का आरोप है विवि ने इसमें करीब 9 से 10 लाख रुपये खर्च कर दिए। वॉटर कूलर खराब हैं। कैंपस के बगीचे को मेंटेन करने के लिए 25 लाख रुपये खर्च किए गए।
तीन महीने पहले ही बना जॉगिंग ट्रैक उखड़ने लगा
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के लिए 8 करोड़ रुपये के ग्रांट मंजूरी की थी। इसमें जॉगिंग ट्रैक, स्वीमिंग पूल और ओपन जिम बनना है। छात्रों का आरोप है कि तीन महीने पहले ही एक करोड़ की लागत से बना जॉगिंग ट्रैक उखड़ने लगा है। स्वीमिंग पूल में बाहरी लोग आते हैं। इनसे 1500 रुपये लिए जाते हैं।
मामले पर डिप्टी रजिस्ट्रार संजय दिवाकर का कहना है कि बिना मेरा पक्ष लिए विवि ने मुझे अपने अधिकारों का इस्तेमाल न करने के लिए नोटिस दिया है। जिन शिकायतों को लेकर एक्शन लिया गया उसका पक्ष रखने के लिए मुझे नोटिस दिया जाना चाहिए था, लेकिन किसी ने भी मुझसे पूछा नहीं।
वीसी डॉ गुरदीप सिंह कहते हैं कि छात्रों के जो भी आरोप हैं उसके बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी। प्रदर्शन के बाद ही शिकायतों के बारे में पता चला। उत्पीड़न को लेकर बनाई गई कमेटी अपनी जांच कर रही है। अन्य शिकायतों को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी।