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दीक्षांत समारोह में बोले राष्ट्रपति : विश्व में समाज का गौरव बढ़ा रहीं देश की बेटियां, 2047 के भारत का लक्ष्य भी दे गए

Sat, 28 Aug 2021 11:29 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sat, 28 Aug 2021 11:29 AM IST
सार

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछली बार जब आए थे तो उन्होंने विश्वविद्यालय को कुछ सुझाव दिए थे। विश्वविद्यालय उन सुझावों पर अमल करते हुए अलमनाई एसोसिएशन के गठन की ओर कदम बढ़ाएं। विश्वविद्यालय के प्रयास रोजगार और श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान साबित हो रहे हैं।

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President said at the convocation: University is fulfilling Babasaheb's dream of inclusive development, equality, education
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की बेटियां पूरे विश्व में समाज का गौरव बढ़ा रही हैं। ओलंपिक में भी बेटियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन से मेडल जीता और पूरे देश को गौरवांवित किया। उन्हें जब भी अवसर मिला है वह बेटों से आगे निकली हैं। दीक्षांत समारोह में भी बेटियों ने सबसे ज्यादा पदक अर्जित किया है। इस परिवर्तन को स्वस्थ समाज की तरफ बढ़ते हुए कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। यह बातें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बृहस्पतिवार को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के नौवें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहीं। इस अवसर पर उन्होंने सात मेधावी छात्रों को अपने हाथों से मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। समारोह में राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, चांसलर प्रकाश चंद्र बरतुनिया व कुलपति प्रो. संजय सिंह मंच पर उपस्थित थे।

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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद नेसावित्री बाई फुले महिला छात्रावास का शिलान्यास करते हुए कहा कि मैं खुद को गौरवांवित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने 125 वर्ष पहले बेटियों की शिक्षा के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए। उन्होंने वर्तमान में बेटियों की उपलब्धि को बाबा साहेब केसपनों को सच होता बताया।
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नौकरी पाने वाले नहीं देने वाले बनें युवा
राष्ट्रपति ने छात्रों को उद्यमिता की तरफ बढ़ने का आह्वान करते हुए उन्हें नौकरी पाने वाले न बनकर नौकरी देने वाले बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के पक्षधर थे। इस दिशा में विवि के इनक्यूबेशन सेंटर के स्थापना की उन्होंने प्रशंसा भी की। उन्होंने कहा कि देश में स्टार्टअप का अच्छा इकोसिस्ट है। 100 से अधिक एक बिलियन वाले स्टार्टअप हैं। आज हर क्षेत्र में बदलाव हो रहे हैं, इसके लिए युवाओं को खुद को तैयार रहने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों को विवि की मूल भावना प्रज्ञा, शील, करुणा के आदर्श को जीवन में लागू करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि आज देश में सर्वाधिक संख्या 25 साल से कम आयु वालों की है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वर्ष 2047 में जब हम आजादी के 100 वर्ष मना रहे हो तब भारत भेदभाव मुक्त, न्याय, समता, बंधुत्व में खुद को ढाल चुका हो। इसके लिए अभी से संकल्पबद्घ होकर काम करना है। यही बाबा साहेब का भी सपना था, हमें उनके सपने को पूरा करना है।
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बीबीएयू पहली जगह, जहां दीक्षांत में दूसरी बार आया
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि इससे पहले भी 2017 में बीबीएयू के दीक्षांत समारोह में शिरकत कर चुका हूं। यह एकमात्र विवि है जिसके दीक्षांत समारोह में मैं दूसरी बार आया हूं। उन्होंने कहा कि विवि वंचित वर्ग के छात्रों के समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। विवि में इस वर्ग के छात्रों के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित हैं। जिससे उच्च शिक्षा के अवसर बढ़े हैं। इस वर्ग के छात्रों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर अलग से पदक प्रदान करके प्रोत्साहित करना विवि का एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि यह विवि बाबा साहेब के समतामूलक समाज के सपनों को पूरा कर रहा है। उन्होंने उनकेद्वारा दिए गए सुझाव पर एलुिमनाई एसोसिएशन की स्थापना कर शिक्षा व रोजगार के तहतर अवसर करने पर विवि को बधाई भी दी। उन्होंने विवि को डॉ. भीमराव अंबेडकर सांस्कृतिक केंद्र के साथ तालमेल स्थापित कर बाबासाहेब के विचारों को प्रसारित करने का सुझाव दिया।


एनईपी बन सकती है देश के शिक्षा की महाशक्ति
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं की वर्तमान आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरी करने में सहायक सिद्घ होगी। यह तभी होगा जब सभी शिक्षक और छात्र निष्ठा से कार्य करेंगे। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा इस दिशा में उठाए गए कदमों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा एनईपी देश के लिए एक शिक्षा महाशक्ति बन सकती है। यह 21वीं सदी की जरूरत के अनुरूप और युवाओं को सक्षम बनाने का काम करेगी।

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