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नियमों में ढील देकर गरीब छात्रों की मदद करेगी लखनऊ यूनिवर्सिटी
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Mon, 10 Apr 2017 07:35 PM IST
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लखनऊ विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2017-18 से निर्धन छात्रों को पुअर ब्वॉयज फंड से सहायता देने के लिए नियमों में छूट दी जाएगी। स्टूडेंट्स को फंड से सहायता प्राप्त करने के लिए अलग से आवेदन नहीं करना होगा।
एडमिशन के लिए काउंसलिंग के वक्त ही उनसे पुअर ब्वॉयज फंड के लिए आवेदन ले लिया जाएगा। आर्थिक सहायता के लिए छात्र की अधिकतम पारिवारिक आय एक लाख रुपये वार्षिक की सीमा बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
विवि में पुअर ब्वॉयज फंड के नाम पर हर स्टूडेंट से सालाना 200 रुपये फीस ली जाती है। इसके बावजूद प्रचार-प्रसार न होने की वजह से स्टूडेंट्स को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय में पूरे प्रदेश से हर बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स पढ़ाई के लिए आते हैं। इनमें कुछ की आर्थिक स्थिति बेहद खराब होती है। इनकी सहायता के लिए विवि में पुअर ब्वॉयज फंड बनाया गया है। बीते साल इस फंड से सहायता देने के लिए विवि में ने नई गाइडलाइन तैयार की है।
गाइडलाइन के अनुसार सहायता के लिए स्टूडेंट्स को पूर्ववर्ती कक्षा में 60 फीसदी अंक पाने की अनिवार्यता रखी गई है। इसी तरह सहायता के लिए छात्र की अधिकतम पारिवारिक आय एक लाख रुपये तय की गई है। निर्धन छात्र सहायता कोष से स्टूडेंट्स को ‘अर्न व्हाइल लर्न’ योजना के तहत मदद दी जाती है।
योजना के अनुसार सहायता पाने के लिए स्टूडेंट्स को विश्वविद्यालय में काम करना होगा। सहायता के लिए स्टूडेंट्स को हॉस्टल्स में रिकॉर्ड कीपिंग, विभागों व हॉस्टल में कम्प्यूटर से जुड़े काम, लाइब्रेरी में सहायता, आदि से जुड़े कामों में जोड़ने का प्रस्ताव भी था।
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एडमिशन के लिए काउंसलिंग के वक्त ही उनसे पुअर ब्वॉयज फंड के लिए आवेदन ले लिया जाएगा। आर्थिक सहायता के लिए छात्र की अधिकतम पारिवारिक आय एक लाख रुपये वार्षिक की सीमा बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
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विवि में पुअर ब्वॉयज फंड के नाम पर हर स्टूडेंट से सालाना 200 रुपये फीस ली जाती है। इसके बावजूद प्रचार-प्रसार न होने की वजह से स्टूडेंट्स को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय में पूरे प्रदेश से हर बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स पढ़ाई के लिए आते हैं। इनमें कुछ की आर्थिक स्थिति बेहद खराब होती है। इनकी सहायता के लिए विवि में पुअर ब्वॉयज फंड बनाया गया है। बीते साल इस फंड से सहायता देने के लिए विवि में ने नई गाइडलाइन तैयार की है।
गाइडलाइन के अनुसार सहायता के लिए स्टूडेंट्स को पूर्ववर्ती कक्षा में 60 फीसदी अंक पाने की अनिवार्यता रखी गई है। इसी तरह सहायता के लिए छात्र की अधिकतम पारिवारिक आय एक लाख रुपये तय की गई है। निर्धन छात्र सहायता कोष से स्टूडेंट्स को ‘अर्न व्हाइल लर्न’ योजना के तहत मदद दी जाती है।
योजना के अनुसार सहायता पाने के लिए स्टूडेंट्स को विश्वविद्यालय में काम करना होगा। सहायता के लिए स्टूडेंट्स को हॉस्टल्स में रिकॉर्ड कीपिंग, विभागों व हॉस्टल में कम्प्यूटर से जुड़े काम, लाइब्रेरी में सहायता, आदि से जुड़े कामों में जोड़ने का प्रस्ताव भी था।
हर साल छात्रों से 25 लाख की वसूली
डेमो
नियमों की कड़ाई की वजह से पिछले साल विवि के 18 हजार स्टूडेंट्स में से केेवल 24 ने योजना के लिए आवेदन किया। इनमें से केवल पांच ही विवि के नियमों से पार पा सके। इस साल भी यही स्थिति न हो इसलिए कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने नियमों में छूट देने की बात कही है।
लविवि ने गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता भले ही न दी हो पर फीस वसूलने में कोई कोताही नहीं बरतता है। लविवि हर साल प्रति स्टूडेंट दौ सौ रुपये निर्बल छात्र सहायता कोष के लिए लेता है।
जीरो फीस वाले स्टूडेंट्स को छोड़ने के बाद यह राशि हर साल करीब 25 लाख रुपये बनती है। इसके बावजूद इस कोष से स्टूडेंट्स की सहायता के लिए लविवि कभी गंभीर नहीं दिखा।
कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने कहा है कि अभी तक छात्रों को नकद सहायता दी जाती है। यह राशि सालाना दो से आठ हजार रुपये तक ही है। छात्रों को आर्थिक सहायता के स्थान पर इस साल से उन्हें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी या अन्य किसी स्वरूप से सहायता देने पर विचार किया जा रहा है।
काउंसलिंग से पहले इस पर विचार करके गाइडलाइन तैयार कर ली जाएगी। विवि में नए सत्र से अच्छा रिसर्च करने वाले स्टूडेंट्स को प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाएगा। कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने बताया कि शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इसकी शुरुआत की जा रही है।
इससे स्टूडेंट अच्छा रिसर्च करने के लिए प्रेरित होंगे। फिलहाल विवि में पीएचडी के लिए कोई पुरस्कार नहीं दिया जाता है। दीक्षांत समारोह में भी ओवरआल अच्छी पीएचडी के लिए कोई मेडल नहीं दिया जाता है।
‘निर्धन छात्र सहायता कोष से ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को मदद मिल सके इसलिए नियमों में ढील दी जाएगी। जुलाई से पहले आवेदन और सहायता की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसी तरह अच्छे रिसर्च के लिए स्टूडेंट्स को पुरस्कृत करने की शुरुआत भी इस साल से की जाएगी।’ - प्रो.एसपी सिंह कुलपति, लविवि
लविवि ने गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता भले ही न दी हो पर फीस वसूलने में कोई कोताही नहीं बरतता है। लविवि हर साल प्रति स्टूडेंट दौ सौ रुपये निर्बल छात्र सहायता कोष के लिए लेता है।
जीरो फीस वाले स्टूडेंट्स को छोड़ने के बाद यह राशि हर साल करीब 25 लाख रुपये बनती है। इसके बावजूद इस कोष से स्टूडेंट्स की सहायता के लिए लविवि कभी गंभीर नहीं दिखा।
कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने कहा है कि अभी तक छात्रों को नकद सहायता दी जाती है। यह राशि सालाना दो से आठ हजार रुपये तक ही है। छात्रों को आर्थिक सहायता के स्थान पर इस साल से उन्हें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी या अन्य किसी स्वरूप से सहायता देने पर विचार किया जा रहा है।
काउंसलिंग से पहले इस पर विचार करके गाइडलाइन तैयार कर ली जाएगी। विवि में नए सत्र से अच्छा रिसर्च करने वाले स्टूडेंट्स को प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाएगा। कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने बताया कि शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इसकी शुरुआत की जा रही है।
इससे स्टूडेंट अच्छा रिसर्च करने के लिए प्रेरित होंगे। फिलहाल विवि में पीएचडी के लिए कोई पुरस्कार नहीं दिया जाता है। दीक्षांत समारोह में भी ओवरआल अच्छी पीएचडी के लिए कोई मेडल नहीं दिया जाता है।
‘निर्धन छात्र सहायता कोष से ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को मदद मिल सके इसलिए नियमों में ढील दी जाएगी। जुलाई से पहले आवेदन और सहायता की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसी तरह अच्छे रिसर्च के लिए स्टूडेंट्स को पुरस्कृत करने की शुरुआत भी इस साल से की जाएगी।’ - प्रो.एसपी सिंह कुलपति, लविवि