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हर कॉलेज व यूनिवर्सिटी के लिए नैक ग्रेडिंग अनिवार्य

Mon, 20 Feb 2017 02:43 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Mon, 20 Feb 2017 02:43 PM IST
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naac grading will necessary for all colleges and university
डेमो - फोटो : demo pic
यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की ग्रेडिंग करने वाली नेशनल असेसमेंट एंड एक्रीडिएशन काउंसिल (नैक) अपना पैटर्न बदलने की तैयारी कर रही है। अगले एक महीने में नए पैटर्न की घोषणा कर दी जाएगी।
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इसके अलावा इसी साल से सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी के लिए नैक से ग्रेडिंग कराना अनिवार्य हो जाएगा। जानकीपुरम विस्तार स्थित सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) में शुक्रवार को आए नैक की एग्जीक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने यह जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि नैक की ग्रेडिंग की पूरी प्रक्रिया को बदला जा रहा है। अगले 20-25 दिन में नया पैटर्न तय कर लिया जाएगा। कोशिश है कि नए पैटर्न में ग्रेडिंग तय करने की प्रक्रिया के समय पूरी पारदर्शिता रहे।
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नया पैटर्न इसी साल से लागू कर दिया जाएगा। इसकी सूचना भी सभी कॉलेज व यूनिवर्सिटीज को भेज दी जाएगी, ताकि संस्थान अपनी तैयारी पूरी कर सकें। नैक का यह फैसला उस समय आया है जब कुछ निजी संस्थाओं की ग्रेडिंग पर सवाल उठाए थे।

प्रो. चौहान ने बताया कि नैक की ग्रेडिंग प्रक्रिया को प्रभावी भी बनाने की भी कवायद चल रही है। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के साथ कई राउंड वार्ता हो चुकी है।

इसके बाद अब तय हुआ है कि सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटीज के लिए इसे अनिवार्य कर दिया जाए। यह अनिवार्यता निजी, सरकारी, केंद्र और राज्य के शैक्षिक संस्थानों पर लागू होगी।


कोर्स का संचालन कर रही वैज्ञानिक संस्थाओं को भी नैक की ग्रेडिंग के दायरे में लाया जा सकता है। इसका नोटिफिकेशन एमएचआरडी जल्द ही जारी कर देगा। इससे अभी तक नैक की ग्रेडिंग से बचने वाली शैक्षिक संस्थाओं को अपनी गुणवत्ता सुधारने का दबाव बनेगा।
 

सेंटर फॉर इमीनेंस बनाएगा नैक

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डेमो
प्रो. चौहान ने बताया कि नैक और एमएचआरडी सेंटर फॉर इमीनेंस बनाने के प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहे हैं। पूर्व में विश्वस्तरीय शैक्षिक संस्थाएं बनाने के लिए एक कवायद शुरू हुई थी।

इसे अब सेंटर फॉर इमीनेंस के रूप में लागू किया जाएगा। पहले चरण में 10 सरकारी और 10 निजी क्षेत्र के सेंटर फॉर इमीनेंस बनाए जाएंगे। निजी क्षेत्र में यह पहल टाटा, अंबानी जैसे बड़े औद्योगिक समूहों के लिए भी खुली रहेगी, जिससे वे इसमें निवेश कर सकें।

यूपी में उच्च शिक्षा के स्तर से प्रो. चौहान संतुष्ट नहीं दिखे। यूपी के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज के ढांचे पर ही उन्होंने सवाल उठा दिया। उनका कहना था कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर क्या बात करें? आलम यह है कि 70 प्रतिशत कॉलेजों में स्थाई प्रिंसिपल नहीं हैं।

यूजीसी की गाइडलाइंस के मुताबिक उनकी नियुक्ति करने के लिए प्रदेश सरकार गंभीर नहीं है। केवल भर्ती आयोग बनाने भर से कॉलेजों में प्रिंसिपलों की तैनाती तो नहीं हो जाएगी।

स्टेट यूनिवर्सिटीज की तो हालात और भी बुरी है जहां इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर बदहाली ही बनी हुई है। ऐसे बदहाली जो अब सनातन हो गई है? इस पर हर साल सवाल उठता है, लेकिन सुधार कभी नहीं होता।
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