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विश्वविद्यालयों में शोध के क्षेत्र में सबसे ज्यादा यौन उत्पीड़न, 'गिव एंड टेक' का डाला जाता है दबाव

Wed, 20 Jan 2021 01:39 PM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Wed, 20 Jan 2021 01:39 PM IST
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most sexual harassment occurs in the field of research : Rekha  Sharma
लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित वर्कशॉप में बोलतीं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्य? - फोटो : LKO CITY

विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध और पीएचडी में यौन उत्पीड़न के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। गिव एंड टेक का दबाव डाला जाता है। विरोध करने पर उनकी पीएचडी रोक दी जाती है। यह बातें राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में मिशन शक्ति के तहत आयोजित कार्यशाला में कहीं। वह मुख्य अतिथि थीं।

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रेखा शर्मा ने कहा, शोध के क्षेत्र में यौन उत्पीड़न की बराबर शिकायतें आती रहती हैं। इन मामलों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। संस्थानों में आंतरिक समिति का रोल बहुत जरूरी है। महिलाएं काम पर जाती हैं तो कई बार यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। 10 से ज्यादा कर्मियों वाले सभी विभागों में आंतरिक शिकायत समिति बनाना अनिवार्य है। इसके बावजूद बहुत से ऐसे संस्थान हैं, जहां 10 से ज्यादा लोग काम करते हैं पर वहां या तो आंतरिक कमेटी नहीं है अगर है भी तो ठीक से काम नहीं करती।
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समिति में कम से कम चार सदस्य होने चाहिए, लेकिन किसी ने 11 तो किसी ने सात सदस्य रखे हुए हैं। लविवि की आंतरिक शिकायत समिति की चेयरपर्सन प्रो. शीला मिश्रा ने कहा कि मिशन शक्ति के तहत 100 दिन के कार्यक्रम कर चुके हैं। विवि की आंतरिक शिकायत समिति के सामने शिकायत आती है तो तुरंत निस्तारण करने का प्रयास किया जाता है। इस मौके पर विद्यांत पीजी कॉलेज, नेशनल पीजी कॉलेज, ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, बीबीडी, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट, बीबीएयू, केजीएमयू सहित कई संस्थानों के आंतरिक शिकायत समिति के सदस्य मौजूद थे।

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छोटी शिकायतों पर ध्यान दें तो रुक सकती हैं बड़ी घटनाएं

रेखा शर्मा ने कहा कि कई बार घटना होने पर सीनियर दबाव बनाते हैं लेकिन सदस्यों को दबाव में नहीं आना चाहिए। उनके अनुसार अगर छोटी-छोटी शिकायत पर ध्यान दिया जाए तो फिर बड़ी घटनाएं रोकी जा सकती हैं। आंतरिक समिति का काम जागरूकता फैलाना है। गंभीरता के साथ सभी मामलों का निस्तारण करना चाहिए। किसी भी तरीके से समझौता नहीं होना चाहिए।

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