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छात्रों को अवसाद और तनाव से बचाएगी 'हैप्पी थिंकिंग लैब', लखनऊ विश्वविद्यालय में होगी स्थापना

Thu, 05 Mar 2020 05:29 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 05 Mar 2020 05:29 PM IST
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Lucknow University will establish Happy Thinking Lab.
- फोटो : amar ujala

युवाओं में बढ़ते तनाव और अवसाद को देखते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय अपने यहां हैप्पी थिंकिंग लैब की स्थापना करने जा रहा है। नये सत्र में ही यह प्रयोगशाला काम करना शुरू कर देगी। इस प्रयोगशाला का मकसद विद्यार्थियों के मानसिक-आध्यात्मिक विकास पर काम करना है। विवि के मनोविज्ञान विभाग में यह प्रयोगशाला शुरू करने के साथ ही कई नए प्रश्नपत्रों की पढ़ाई भी शुरू होगी।

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लविवि प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने बताया कि स्प्रिचुअल शब्द लैटिन भाषा के स्विरिटस शब्द से आया है, जिसका अर्थ होता है श्वास। अत: स्प्रिचुएलिटी श्वास जितनी ही जरूरी है। इसे ध्यान में रखते हुए मनोविज्ञान विभाग आगामी सत्र से हैप्पी थिंकिंग लैब की स्थापना करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य आध्यात्मिक ज्ञान को सहज, सरल बनाकर विद्यार्थियों के जीवन को ऊर्जा और खुशी से भरना है।
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इस प्रयोगशाला में विद्यार्थी अपने मस्तिष्क में उठने वाले प्रत्येक विचार की शक्ति की पहचान करेंगे। नकारात्मक को सकारात्मक विचारों में बदलने पर काम होगा। इस प्रयोगशाला में अवांछनीय आदतों और व्यवहार पर काबू पाने का कौशल भी सिखाया जाएगा। विद्यार्थियों को तनावमुक्त जीवन जीने की कला, उल्लासपूर्ण और जीवन में टिकने वाली स्थायी हैप्पीनेस के टिप्स भी इस प्रयोगशाला के माध्यम से दिए जाएंगे।

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सीबीसीएस में शुरू होगी चिंता प्रबंधन की पढ़ाई

लविवि ने परास्नातक स्तर पर पूरी तरह से सीबीसीएस प्रणाली लागू करने की घोषणा की है। इसमें कई नये प्रश्नपत्रों की पढ़ाई भी होनी है। मनोविज्ञान विभाग ने इसको ध्यान में रखते हुए चिंता का प्रबंधन, संचार, कौशल सकारात्मक संवेगों का विकास, आत्म उन्नयन, सफल वृद्धावस्था, सकारात्मक जीवन, जीवन कौशल आदि पर आधारित प्रश्नपत्रों को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। एमए तृतीय और चतुर्थ सेमेस्टर में ये प्रश्नपत्र पढ़ाई का हिस्सा होंगे। सेमेस्टर के अन्य विद्यार्थी भी इन कोर्सों की पढ़ाई मनोविज्ञान विभाग में जाकर कर सकेंगे।

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