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लखनऊ विश्वविद्यालय की इस गलती से फंसी विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप

Thu, 29 Mar 2018 02:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 29 Mar 2018 02:49 PM IST
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lucknow university student will not be able to receive the fellowship
छात्रवृत्ति

स्कॉलरशिप की मदद से अपनी पढ़ाई पूरी करने की आस लगाए विद्यार्थियों की उम्मीदों पर लविवि की गलती भारी पड़ सकती है। लखनऊ विश्वविद्यालय ने बीएड और एलएलबी के विद्यार्थियों के मार्क्स फीड करने में गलती कर दी है।

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इस वजह से डाटा का मिलान नहीं हो सका है। ऐसे में विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि समाज कल्याण और अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग का एनआईसी पोर्टल भी लॉक हो चुका है। 
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हालांकि विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए विवि प्रशासन ने संबंधित विभाग को पत्र लिखकर स्कॉलरशिप पोर्टल खोलकर गलती दुरुस्त कराने का अनुरोध किया है। दुर्बल आय वर्ग के विद्यार्थियों को मदद देने के लिए समाज कल्याण और अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग क्रमश: एससी-एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप जारी करता है।
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मगर फेल होने वाले विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप नहीं मिलती है। इसलिए विद्यार्थी को आवेदन के साथ ही अपने मार्क्स भी भरने होते हैं। विवि उनके नंबर सत्यापित करता है, इसके बाद ही उन्हें स्कॉलरशिप मिलती है।

इस साल विवि की डीटीपी सेल ने विद्यार्थियों के नंबर में प्रैक्टिकल के अंक नहीं भरे। इस वजह से विद्यार्थी द्वारा भरे गए डाटा और विवि के डाटा का सत्यापन नहीं हो सका। ऐसे में उनकी स्कॉलरशिप फंस गई।

नहीं भेजी उपस्थिति सत्यापन रिपोर्ट

एलयू से सहयुक्त कॉलेजों ने विद्यार्थियों को समाज कल्याण विभाग से मिलने वाली स्कॉलरशिप के लिए उपस्थिति सत्यापित नहीं की है। छात्रवृत्ति में होने वाले फर्जीवाड़े को देखते हुए समाज कल्याण विभाग ने 75 फीसदी उपस्थिति की अनिवार्यता लगाई है।

विभाग ने इसके लिए बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया था। ऐसा न हो पाने की सूरत में प्राचार्य और विभागाध्यक्षों को उपस्थिति सत्यापित करनी थी, लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया।

लविवि कुलसचिव प्रो. राजकुमार सिंह ने बताया कि समाज कल्याण विभाग ने 75 फीसदी उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है। अगर उपस्थिति सत्यापित करने को कहा जाएगा तो फिर प्राचार्य और विभागाध्यक्षों से लेकर सत्यापन रिपोर्ट भेज दी जाएगी।

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर राजकुमार सिंह का कहना है कि इसमें विद्यार्थियों की कोई गलती नहीं है, इसलिए विवि संबंधित विभाग को इस संबंध में पत्र लिख रहा है। जिन कर्मचारियों की वजह से ऐसा हुआ है उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। उम्मीद है कि डाटा दुरुस्त करने का मौका मिलेगा और विद्यार्थियों को नुकसान नहीं होगा। 

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