फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   LU : 5 teachers but student only 3 s

लखनऊ विश्वविद्यालय : शिक्षक पांच और दाखिले सिर्फ तीन...नियमित पाठ्यक्रमों का बुरा हाल

Sun, 07 Feb 2021 01:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Sun, 07 Feb 2021 01:23 AM IST
विज्ञापन
LU : 5 teachers but student only 3 s

लखनऊ विश्वविद्यालय के पर्शियन विभाग में इस समय पांच नियमित शिक्षक हैं। इनके वेतन पर सालाना 75 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान किया जाता है। इसके बावजूद इस साल यहां परास्नातक स्तर पर सिर्फ तीन दाखिले ही हुए हैं। अरेबिक विभाग में भी कुछ ऐसा ही हाल है। इस समय इस विभाग में छह नियमित शिक्षक हैं। इनके वेतन पर सालाना करीब 65 लाख रुपये का भुगतान होता है। पर, एमए अरेबिक में इस साल सिर्फ नौ व एमए अरब कल्चर में केवल पांच दाखिले ही हुए हैं। पाश्चात्य इतिहास विभाग में चार नियमित शिक्षक हैं। इनका कुल सालाना वेतन 60 लाख रुपये के करीब होता है। विभाग में एमए में 40 सीट हैं लेकिन सिर्फ आठ दाखिले ही हो सके हैं।

विज्ञापन


यह तस्वीर सौ साल पुराने लखनऊ विश्वविद्यालय के कुछ नियमित पाठ्यक्रमों की है। यहां कई पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए तगड़ी लड़ाई रहती है। वहीं कई नियमित पाठ्यक्रमों का बुरा हाल है। पिछले कई साल से यहां सीट के मुकाबले 25 फीसदी दाखिले भी नहीं हो रहे हैं। स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की कुल सीट में से 60 फीसदी से कम दाखिले होने पर उनका संचालन स्थगित कर दिया जाता है। नियमित पाठ्यक्रमों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक हैं। इसलिए दाखिले की संख्या भले ही कितनी भी कम हो, शिक्षकों को तगड़ा वेतन देना लविवि की मजबूरी है।लखनऊ विश्वविद्यालय में पिछले कुछ समय से पर्शियन, अरेबिक, अरब कल्चर समेत कई विभागों को विद्यार्थियों का टोटा पड़ा हुआ है। ये विभाग नियमित हैं।
विज्ञापन


पाठ्यक्रमों की फीस भी बेहद कम है। यहां पर पर्याप्त संख्या में शिक्षक भी तैनात हैं, पर आलम यह है कि साल दर साल यहां विद्यार्थियों की संख्या कम होती जा रही है। विभाग में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति है इसलिए शिक्षकों का वेतन देना लविवि की मजबूरी है। प्रति विद्यार्थी खर्च की बात करें तो फिर सालाना 25-25 लाख रुपये तक का आंकड़ा पहुंच रहा है। इतने लंबे-चौड़े खर्च के बावजूद ये विभाग विद्यार्थियों के लिए ऐसे पाठ्यक्रम तैयार नहीं कर पा रहे हैं जो रोजगारपरक हो और उनकी मांग हो।
विज्ञापन
विज्ञापन


उधर, कई विभागों में एक भी नियमित शिक्षक नहीं
लविवि में एक तरफ शिक्षक होने के बावजूद विद्यार्थी नहीं होने के मामले हैं, वहीं दूसरी ओर भूगोल, होम साइंस जैसे विभागों में एक भी नियमित शिक्षक नहीं हैं। ये पाठ्यक्रम स्ववित्तपोषित हैं, इसलिए इनकी फीस भी महंगी है। विवि या फिर सरकार लोकप्रिय और रोजगारपरक विभागों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर रहा है। इस वजह से विद्यार्थी महंगी फीस पर भी अनुबंध के शिक्षकों के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं।


विषय के प्रति रुचि बढ़ाएं विभाग
कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय कहते हैं कि ऐसे विभागों को अपने विषय के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए प्रयास करने चाहिए। उनके विषय की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी उपयोगिता है। उन्हें प्रयास करके विदेशी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ानी चाहिए। विदेशों से एमओयू करके भी इस दिशा में सार्थक काम किया जा सकता है। इन विभाग के विभागाध्यक्षों और शिक्षकों की बैठक बुलाकर इस बारे में निर्देश दिए जा चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed