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भाषा विश्वविद्यालय को एक ब्रांड के रूप में विकसित करेंगे, नए कुलपति ने संभाला कामकाज
Sun, 11 Apr 2021 02:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Apr 2021 02:19 PM IST
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भाषा विवि के कुलपति का चार्ज लेने के बाद प्रो. विनय कुमार पाठक (बाएं) के साथ प्रो. अनिल शुक्ला (दाएं)?
- फोटो : LKO CITY
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ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के नए कुलपति प्रो. अनिल कुमार शुक्ला ने शनिवार को कार्यभार ग्रहण कर लिया। अभी तक एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक अतिरिक्त कार्यभार संभाल हुए थे। प्रो. शुक्ला ने कहा कि भाषा विश्वविद्यालय को एक नई पहचान दिलाएंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय को एक ब्रांड के रूप में स्थापित कर सामाजिक स्वीकृति बढ़ानी होगी। विश्वविद्यालय के एडमिशन में बढ़ोतरी करने के लिए प्रचार-प्रसार की नई नीतियां अपनाई जाएंगी।
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नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी विभागों को 50 क्रेडिट वाले छोटे रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करने होंगे। इस डिजिटल युग में अधिक से अधिक विद्यार्थियों से जुड़ने के लिए सभी शिक्षकों को 10 क्रेडिट वाले छोटे ऑनलाइन मूक्स पाठ्यक्रम भी तैयार करने चाहिए। उन्होंने बताया कि भाषा विश्वविद्यालय विभिन्न भाषाओं के विशिष्ट पाठ्यक्रम तैयार कर अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृति, भाषा एवं संचार हर विषय से जुड़े हुए हैं इसलिए भाषा के विकास में इन सभी को सम्मिलित करना आवश्यक है।
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प्रो. शुक्ला ने कहा कि विश्वविद्यालय को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में कार्य करने की आवश्यकता है। प्रिजर्वेशन (संरक्षण) जिसके माध्यम से विभिन्न भाषाओं के इतिहास एवं उनकी संस्कृति से संबंधित जानकारी को सहेजने का कार्य किया जा सके। क्रिएशन (सृजन) जिसके माध्यम से भाषा के नए रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार किए जा सके एवं शोध को बढ़ावा दिया जा सके। एक्सटेंशन (विस्तार) जिसके माध्यम से भाषा से संबंधित ज्ञानार्जन कर उसे अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सके।
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