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ये कैसी समिति जो जांच नहीं सिर्फ समीक्षा करेगी, खाते से एक करोड़ निकाले जाने पर गंभीर नहीं लविवि

Sun, 06 Oct 2019 03:17 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 06 Oct 2019 03:17 PM IST
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Investigation in one crore rupee fraud of Lucknow University Bank.

लखनऊ विश्वविद्यालय बैंक खाते से 1.09 करोड़ रुपये निकाले जाने के बावजूद गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। विवि प्रशासन ने एक बार फिर से सिर्फ खानापूरी करने के लिए समिति बना दी है। इस समिति को सिर्फ लविवि के लेखा विभाग की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है।

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लेखा विभाग की इस मामले में क्या लापरवाही रही? समिति को इस सवाल का जवाब ही नहीं तलाशना है। लविवि ने फर्जी अंकपत्र मामला सामने आने के बाद भी इसी तरह की समिति बनाई थी। वो बात और है कि उसकी रिपोर्ट चार महीने बाद भी नहीं आ सकी है।
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लविवि प्रशासन ने कोषागार से सेवानिवृत्त हुए अतिरिक्त निदेशक नरेंद्र भूषण, स्टेट बैंक मुख्य शाखा के मुख्य सहायक केके सिंह और लविवि वित्त अधिकारी संजय श्रीवास्तव को शामिल करते हुए तीन सदस्यीय समिति बनाई है। इस समिति को छह बिंदुओं पर जांच पूरी करके सात दिनों में रिपोर्ट देनी है। विवि पूरी तरह से लेखा विभाग को बचाने में लगा हुआ है।
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इन छह बिंदुओं पर होनी है जांच
1- विवि की लेखा पद्धति का क्रियान्वयन
2- विवि में प्राप्ति-व्यय की प्रक्रिया एवं लेखांकन की स्थिति
3- लेखांकन के लिए कंप्यूटरीकरण की जरूरत
4- वर्तमान कपटपूर्ण भुगतान होने की कमियां तथा सुधार की जाने वाली कार्रवाई
5- आंतरिक लेखा परीक्षा की व्यवस्था
6- अन्य आवश्यक बिंदु।

ये सवाल अहम, पर समिति की जांच का नहीं होंगे हिस्सा

1- क्या इस कपटपूर्ण भुगतान के दौरान लेखा विभाग ने क्या लापरवाही की?
2- इसके लिए दोषी कौन है?
3- हर महीने बैंक समाधान विवरण बनाने की अनिवार्यता होने के बावजूद क्यों नहीं तैयार हुआ?
4- अगर बैंक समाधान विवरण बना तो फिर मामला पकड़ में कैसे नहीं आया?
5- वर्ष 2000 के चेक अगर संबंधित व्यक्ति नहीं ले गया तो निर्धारित अवधि के बाद उन्हें नष्ट क्यों नहीं किया गया?
6- चेकबुक किसके कब्जे में रहती है? चेक बुक से केवल वही चेक नंबर क्यों चुने गए जो बेहद मामूली रकम के थे।
7- जिन फर्जी चेक से कपट करके रकम निकाली गई उनके मूल चेक का भुगतान वर्ष 2000 में हुआ या फिर नहीं?
8- ये मामला सिर्फ इसी साल का है या फिर बीते सालों में भी इस तरह के फर्जी भुगतान होते रहे?

लविवि ने साधी चुप्पी

लविवि प्रशासन ने समिति बनाने का पत्र जारी करके पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। समिति को जांच के बजाय सिर्फ समीक्षा करने के लिए क्यों कहा गया है। इसका जवाब नहीं दिया जा रहा है। विवि प्रशासन ने इससे पहले फर्जी अंकपत्र मामले में भी परीक्षा कामकाज की समीक्षा करने के लिए समिति बनाकर अपना पल्ला झाड़ा था। इस मामले में भी वही काम किया जा रहा है।

बैंक समाधान विवरण बनाने तक के लिए किया भुगतान
विवि के लेखा विभाग की काबिलियत बताने के लिए स्थानीय लेखा निधि परीक्षा विभाग की रिपोर्ट ही काफी है। इसकी वित्तीय वर्ष 2014-15 की समीक्षा करने के बाद जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां पर छह लाख 86 हजार 520 रुपये का भुगतान सिर्फ बैंक समाधान विवरण बनाने के लिए किया गया।

जबकि बैंक समाधान विवरण तैयार करना किसी भी लेखा विभाग का सामान्य काम है। कैश बुक की इंट्री करने के दौरान बैंक समाधान विवरण तैयार करना एक अनिवार्य काम है।

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