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एलयू के इन विभागों में टॉपरों को क्यों नहीं दिए जाते पदक, जानें वजह

Sat, 24 Dec 2016 12:16 PM IST
सचिन त्रिपाठी/अमरउजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी/अमरउजाला, लखनऊ Updated Sat, 24 Dec 2016 12:16 PM IST
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 in these department lucknow university toppers do not get medal
डेमो - फोटो : demo pic

मेहनत, लगन और नंबर लाने में ये स्टूडेंट्स किसी से कम नहीं हैं। दीक्षांत समारोह के दौरान इनके हाथों में डिग्री तो होती है पर टॉप करने के बावजूद इनके गले में मेडल नहीं पहनाए जाते। सुनने में अजीब है, पर यह सच है।

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लखनऊ विश्वविद्यालय के 43 विभागों में से आठ विभाग ऐसे हैं जिनमें एक भी मेडल नहीं दिया जाता। यहां स्टूडेंट्स टॉप तो करते हैं पर मेडल नहीं पाते।दूसरी ओर कई विभाग ऐसे हैं जहां एक ही कोर्स में टॉप करने पर स्टूडेंट को दर्जन भर तक मेडल मिल जाते हैं। 
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लखनऊ विश्वविद्यालय में चांसलर्स और डॉ. चक्रवर्ती के साथ ही कुछ को छोड़कर बाकी मेडल किसी न किसी की ओर से प्रायोजित किए जाते हैं। दीक्षांत समारोह में डिग्री के साथ ही स्टूडेंट्स को ये मेडल दिए जाते हैं।
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विवि में इस समय 43 विभाग हैं। इनमें से फिजिकल एजूकेशन, कंप्यूटर साइंस, पब्लिक पॉलिसी, ज्योर्तिविज्ञान, फ्रेंच, ट्रेवेल एंड टूरिज्म, वूमेन स्टडीज और फाइन आर्ट्स ऐसे विभाग हैं जिनमें पीएचडी के लिए सीट है, पर मेडल एक भी नहीं है।ऐसे में इन विभाग के स्टूडेंट हमेशा टॉप करने के बावजूद दीक्षांत समारोह में दूसरे साथियों को मेडल पाता देख केवल तालियां ही बजाते रहते हैं। 

लॉ में सबसे ज्यादा 24 मेडल
मेडल देने के मामले में टॉप पर लॉ विभाग है। यहां पर एलएलबी, एलएलएम और एलएलबी ऑनर्स में कुल मिलाकर 24 मेडल दिए जाते हैं। इस सूची में 12 मेडल के साथ मैथ्स विभाग दूसरे और प्राचीन भारतीय इतिहास नौ मेडल के साथ तीसरे नंबर पर है। सोशल वर्क, फिजिक्स, पॉलीटिकल साइंस, विभागों में भी मेडल की संख्या काफी अधिक है।

शोध के लिए सिर्फ छह मेडल
विश्वविद्यालय की पहचान मुख्य रूप से पढ़ाई के अलावा रिसर्च करने के लिए होती है। शोध के लिए स्टूडेंट्स को प्रोत्साहित करने के मामले में भी लखनऊ विश्वविद्यालय काफी पिछड़ा है। विवि के 192 मेडल में से शोध के लिए केवल छह मेडल ही हैं। ये मेडल भी पीजी, एमफिल, पीएचडी और डीलिट पाठ्यक्रमों में दिए जाते हैं। विवि में शोध के लिए विभागवार मेडल नहीं दिए जाते

घोषणा के बाद भी ‌नहीं ‌म‌िला मेडल

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लखनऊ यूनिवर्सिटी - फोटो : demo pic
मेडल के लिए जमा करने होते हैं पांच लाख रुपये
लखनऊ विश्वविद्यालय विभागों में अपने स्तर से मेडल नहीं शुरू कर रहा और प्रायोजकों को भी उत्साहित करने का काम नहीं कर रहा। किसी विभाग में मेडल देने के लिए व्यक्ति को पांच लाख रुपये विवि के पास जमा करने होते है।

इसके बाद सारी प्रक्रिया होने के बाद कार्य परिषद नया मेडल शुरू करने को मंजूरी देती है। विवि ने पिछले साल मेडल प्रायोजित करने की राशि काफी बढ़ा दी है। लंबे समय तक मेडल प्रायोजित करने की राशि 25 हजार रुपये थी।

जिसे बढ़ाकर पहले एक लाख और पिछले साल पांच लाख कर दिया है। इस वजह से नया मेडल शुरू करने के लिए भी कम लोग आ रहे हैं। इस साल विवि में एक भी मेडल शुरू नहीं हो रहा है।

फिजिकल एजुकेशन में दो बार घोषणा,  नहीं मिला मेडल
मेडल न मिलने वाले विभागों की सूची में फिजिकल एजूकेशन विभाग का नाम भी है। इस विभाग को राज्य सरकार में मंत्री और विवि के पूर्व छात्र अरविंद सिंह गोप ने दो मेडल देने के लिए कहा था।

इसकी घोषणा उन्होंने दो बार विवि के विभिन्न आयोजनों में की। इसके बावजूद अभी तक विभाग में मेडल शुरू नहीं हो सका। परीक्षा विभाग का कहना है कि इसके लिए प्रति मेडल निर्धारित पांच लाख रुपये की राशि जमा नहीं की गई है। इस वजह से यह मेडल शुरू नहीं हो सका है।

‘मेडल स्टूडेंटस को और बेहतर करने के ‌लिए प्रेरित करते है। इस समय इस पर कुछ भी नया करना संभव नहीं है। विभागाध्यक्षों को इसके लिए जरूर सोचना चाहिए। विभाग से पढ़े पूर्व छात्रों को प्रेरित किया जाए तो कम से कम हर विभाग में एक-एक मेडल जरूर हो सकता है‘। - प्रो. एसपी सिंह कुलप‌ति लखनऊ विश्वविद्यालय 
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