शोध के लिए स्टूडेंट्स को ‘इंस्पायर’ करेगा एलयू
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शोध की गुणवत्ता और स्टूडेंट्स का रुझान बढ़ाने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय बड़ा अभियान चलाने जा रहा है। अप्रैल में शुरू होने वाले नए शैक्षिक सत्र से इसकी शुरुआत की जाएगी।
इस अभियान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी सहयोग करेगा। विवि इस काम के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इंस्पायर कैंप योजना का सहारा लेगा। योजना के तहत माध्यमिक स्तर के स्टूडेंट्स को शोध की बुनियादी बातें तथा संभावनाओं के बारे में कैंप लगाकर बताया जाता है।
इसका मकसद माध्यमिक स्तर पर ही स्टूडेंट्स को शोध के बारे में बताना है। अभियान में स्टूडेंट्स को एक सप्ताह का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जिसे पूरा करने के बाद स्टूडेंट्स को स्नातक स्तर से ही शोध से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
विवि में प्लानिंग एंड डवलपमेंट सेल के निदेशक के प्रो. ध्रुवसेन सिंह ने बताया कि कुलपति की मंशा विवि में शिक्षण के साथ ही शोध का माहौल बेहतर बनाना है।
पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की है, लेकिन अच्छे शोध के लिए बेहतर रिसर्च गाइड के साथ उत्साही और काबिल शोधार्थी होना भी जरूरी है। 12वीं में टॉप करने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स डॉक्टर-इंजीनियर बनना चाहते हैं।
शोध में कॅरिअर की अपार संभावना होने के बावजूद वह पीएचडी करने से कतराते हैं। इसलिए माध्यमिक स्तर पर ही स्टूडेंट्स को शोध के बारे में बताया जाएगा। इसके लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्पायर कैंप के नाम से योजना शुरू की है।
कैंप में शोध क्षेत्र में बुलंदी छूने वाले स्टूडेंट्स को बुलाया जाता है। स्टूडेंट्स उनसे प्रेरित होकर शोध के प्रति आकर्षित होंगे। कैंप के लिए मंत्रालय की ओर से आर्थिक मदद भी मुहैया कराई जाएगी।
विवि में नहीं हो रहे अच्छे विषयों पर शोध
एलयू ने पीएचडी का रिजल्ट भले ही जारी नहीं किया है, लेकिन कई विभागों में सीटें खाली रहना अभी से तय है। इनमें ज्यादातर विभाग विज्ञान संकाय के हैं। विवि में इस साल 558 सीटों के लिए 4,545 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
ज्यादातर अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी नंबर लाने की अनिवार्यता संबंधी शर्त पूरी नहीं कर सके। ऐसे में केमिस्ट्री, स्टैस्टिक्स, जियोलॉजी, जूलॉजी आदि विभागों में पीएचडी की सीटें खाली रहना तय है।
किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान पढ़ाई के साथ ही अच्छे शोध के लिए भी होती है। इस मामले मं एलयू काफी पिछड़ा हुआ है। देश के सबसे पुराने विवि में शुमार एलयू में इस समय अच्छे शोध नहीं हो रहे हैं।
लंबे समय से विवि में इस तरह का कोई शोध नहीं हुआ है। जिसकी चर्चा विश्व क्या राष्ट्रीय स्तर पर ही हई हो। ऐसे में अच्छे शोधार्थियों के प्रति एलयू की चिंता जायज है।
कुलपति जी की मंशा के अनुसार विवि में शिक्षण के साथ ही शोध का माहौल भी बेहतर बनाना है। विवि में अच्छे शोधार्थी तभी आएंगे जब इंटरमीडिएट पास करने के बाद ही स्टूडेंट्स को शोध की संभावनाओं के बारे में पता हो। इसलिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से इंस्पायर कैंप की शुरुआत की जा रही है। जल्द ही इसके तहत कक्षा नौ से 12 तक के स्टूडेंट्स को प्रशिक्षण देने की शुरुआत होगी। - प्रो. ध्रुवसेन सिंह, निदेशक प्लानिंग एंड डवलपमेंट सेल, एलयू