अब सिर्फ पीएचडी टीचर ही करा सकेंगे रिसर्च
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एलयू में अब जो असिस्टेंट प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर खुद पीएचडी नहीं हैं वह दूसरों को पीएचडी नहीं करा सकेंगे। ऐसे शिक्षक यदि पीएचडी कर रहे हैं तो भी वह डिग्री अवॉर्ड होने के बाद ही दूसरों को शोध करा पाएंगे।
हालांकि, प्रोफेसर्स के पद पर कार्यरत शिक्षक अनुभव के आधार पर शोध करा सकते हैं। मंगलवार को विश्वविद्यालय में हुई कार्यपरिषद की बैठक में पीएचडी के 2016 के ऑर्डिनेंस को मंजूरी मिली। इसमें एलयू ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नई गाइडलाइंस को भी शामिल कर लिया है।
अब इसी आधार पर दाखिले होंगे। बिना पीएचडी के असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर पर शोध कराने की रोक के बाद अब विवि में तैयार हो रही पीएचडी सीटों की मैट्रिक्स में बदलाव आ सकता है। इनकी संख्या कम हो सकती है। इसके साथ ही नए ऑर्डिनेंस में पीएचडी एंट्रेंस एग्जाम से निगेटिव मार्किंग खत्म करने पर भी सहमति बनी।
इसके अलावा पीएचडी में आवेदन के लिए जनरल व ओबीसी क्रीमीलेयर के लिए पीजी में न्यूनतम 55 फीसदी अंक और एससी, एसटी, ओबीसी नॉन क्रीमीलेयर व दिव्यांगों के लिए 50 फीसदी अंकों की बाध्यता को मंजूरी भी दी गई है।
हालांकि, प्रवेश परीक्षा में सभी के लिए न्यूनतम 50 फीसदी अंक लाना अनिवार्य है। कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने बताया कि एलयू ने पीएचडी के सभी नए नियमों को अपना लिया है।
नए नियमों के तहत छात्र-छात्राएं अब अपनी पीएचडी छह साल तक भी पूरी कर सकेंगे। इससे पहले तक छात्र सिर्फ चार साल तक ही रिसर्च स्कॉलर के रूप में काम करता था, जबकि थीसिस जमा करने के लिए सात साल तक का समय मिलता है।
महिला अभ्यर्थी को मिलेगा 240 दिन तक का मातृत्व अवकाश
नए नियमों के अनुसार पीएचडी करने का न्यूनतम समय दो से बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया है। इसमें छह माह का कोर्स वर्क भी शामिल होगा। अन्य अभ्यर्थियों की तुलना में महिलाओं और 40 फीसदी से अधिक निशक्तों को पीएचडी करने के लिए दो साल अतिरिक्त दिए जाएंगे।
पीएचडी के पूरे समय में महिला अभ्यर्थी 240 दिन तक का मातृत्व या शिशु देखभाल अवकाश ले सकती हैं। अब विवि अपनी वेबसाइट पर पीएचडी में पंजीकृत सभी छात्रों की सूची का रख-रखाव वार्षिक आधार पर करेगा।
इसमें छात्र का नाम, उसके शोध का विषय, पर्यवेक्षक व सह पर्यवेक्षक की जानकारी, नामांकन या पंजीकरण की तिथि आदि शामिल होंगे। इसके अलावा कोर्स वर्क में अब छात्रों को अंकों की जगह क्रेडिट दिए जाएंगे।
इसमें दो पेपर के लिए चार-चार क्रेडिट रखे गए हैं। छात्रों को कोर्स वर्क के लिए ग्रेड कार्ड मिलेगा। यूजीसी ने नई गाइडलाइंस में यह भी कहा था कि पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी प्रश्न शोध पद्धति और 50 फीसदी विशिष्ट विषय से पूछे जाएं।
लेकिन, एलयू ने तय किया है कि वह पहले की तरह ही अपने प्रश्न पत्र संबंधित पीजी कोर्स के सिलेबस पर आधारित रखेगा। हालांकि, इसमें शोध पद्धति और विशिष्ट विषय के प्रश्न भी शामिल होंगे, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह आधे-आधे ही हों।
इसके अलावा एलयू ने फिलहाल पार्ट टाइम पीएचडी कराने पर भी निर्णय नहीं लिया है। इसके अलावा कार्यपरिषद की बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में नियुक्ति का लिफाफा खोलने के साथ ही वित्त समिति के कार्यवृत्त का अनुमोदन भी हुआ।