बीटेक और एमबीए स्टूडेंट्स के लिए बुरी खबर
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से संबद्ध कुल 347 इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों में 22,648 सीटें कम करने के फैसले का सबसे ज्यादा प्रभाव बीटेक में प्रवेश चाहने वाले अभ्यर्थियों पर पड़ेगा।
कुल घटाई गई सीटों में से 17,043 सीटें बीटेक की हैं। वहीं दूसरे नंबर पर 3,236 सीटें एमबीए कोर्स से कम की गई हैं। इन कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित एसईई का रिजल्ट 28 मई को घोषित होने के बाद बीटेक के लिए क्वालिफाई 1,19,816 अभ्यर्थियों के सापेक्ष 1,32,974 सीटें थीं।
मगर, बुधवार को सीटों में कटौती किए जाने बाद बीटेक में क्वालिफाई स्टूडेंट्स के सापेक्ष 1,15,931 सीटें ही बची हैं। सीटों में कमी किए जाने से बीआर्क समेत पांच कोर्सों में प्रवेश की राह मुश्किल हो गई है।
बीआर्क में इस साल 6,970 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। पहले इस कोर्स की 1,190 सीटें थी, जिसे कम करके 1,073 कर दिया गया है। यानी इस तरह बीआर्क की एक सीट के लिए छह से अधिक अभ्यर्थी कतार में हैं। वहीं बीएफए की एक सीट पर लगभग 11 अभ्यर्थी सफल हुए हैं।
इस कोर्स की 45 सीटों केलिए 490 अभ्यर्थी एसईई में क्वालिफाई हुए हैं। इनके अलावा एमसीए लेटरल एंट्री, बीफार्मा और बीएफएडी में भी सीटों से कहीं अधिक अभ्यर्थी हैं।
सभी जगह मुख्य कटौती बीटेक की सीटों पर
नई सीट मैट्रिक्स को देखें तो सर्वाधिक सीटें एमबीए में खाली रहेंगी। इस कोर्स में अब 35,752 सीटें हैं जबकि इनकी तुलना एसईई में केवल 7,577 अभ्यर्थियों ने क्वालिफाई किया है।
इस तरह एमबीए की 28,175 सीटें खाली रहना तय है। वहीं एमसीए में 5,167 सीटें हैं और 1967 अभ्यर्थियों ने क्वालिफाई किया है। इस हिसाब से एमसीए की भी 3,200 सीटें खाली रहना तय है।
बीएचएमसीटी के लिए 714 अभ्यर्थियों ने क्वालिफाई किया, जबकि अब इसमें 932 सीटें हैं। एकेटीयू से मिली जानकारी के मुताबिक लखनऊ के 32 संस्थानों में कुल 2,767 सीटें कम हुई हैं। इनमें सर्वाधिक बीटेक जबकि दूसरे नंबर पर एमबीए की सीटें हैं।
वहीं सीटें कम किए जाने के मामले में अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो मेरठ में सर्वाधिक 3349, गाजियाबाद में 3259, नोएडा में 2032 और कानपुर में 1305 सीटें कम की गई हैं। सभी जगह मुख्य कटौती बीटेक की सीटों में हुई हैं।