आईआईटी हॉस्टल में रहकर चार दोस्तों ने पॉकेट मनी से खोली कंपनी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आईआईटी कानपुर के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाले चार स्टूडेंट स्टार्ट-अप से जुड़ गए हैं। इन सबने पढ़ाई और प्रोजेक्ट बनाने की आसान मशीन बनाई है। इस मशीन को देश, विदेश के लोगों ने हाथोंहाथ लिया है। पहले ही तीन दिनों (12-15 जुलाई) में स्टूडेंटों को करीब तीन लाख रुपये का आर्डर मिल चुका है।
इससे स्टूडेंट्स उत्साहित हैं। स्टूडेंट पहले पैसा जमा कराते हैं, फिर मशीन बनाकर देते हैं। इसकी कीमत छह हजार रुपये है। इस उपलब्धि के लिए निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने स्टूडेंट्स को सम्मानित किया।
कानपुर कैंट के अभिषेक शर्मा आईआईटी कानपुर से बीटेक-एमटेक डुअल डिग्री प्रोग्राम के मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। उनका इरादा जॉब के पीछे भागने का नहीं था, इसलिए आईआईटी का सत्र 2015-16 का कैंपस सेलेक्शन छोड़ दिया। डुअल डिग्री प्रोग्राम के ध्रुपल आर शाह, बीटेक थर्ड ईयर मेकेनिकल इंजीनियरिंग के पंकज वर्मा और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अक्षत अग्रवाल ने भी जॉब छोड़ने का फैसला किया।
बनाई इवाइव मशीन
इसके बाद चारों स्टूडेंट्स ने हॉस्टल से स्टार्ट-अप शुरू किया। पॉकेट मनी के पांच लाख रुपये लगाए और इलेक्ट्रानिक डिवाइस की मशीन बना डाली। अजाइलो टेक्नोलॉजी कंपनी बनाकर इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस को लंबी उम्र देने वाली मशीन (इवाइव) बनाई।
इस मशीन का इस्तेमाल कक्षा 8 से 12वीं और इंजीनियरिंग स्टूडेंट कर सकते हैं। मशीन की इलेक्ट्रानिक डिवाइस को इंटरनेट से जोड़कर घर का कूलर, पंखा, लाइट, फ्रिज और टीवी कंट्रोल किया जा सकता है।
पिता दयाराम (सेना में सूबेदार जम्मू के कुपवाड़ा में तैनाती), मां ऊषा, बहन अनुराधा और सुप्रिया के साथ कैंट में रहने वाले अभिषेक ने बताया कि मशीन की बिक्री क्राउड फंडिंग (पहले पैसा लिया जाएगा, फिर मशीन बनाकर दी जाएगी) के तहत की जा रही है।
इसका ब्योरा ऑनलाइन कंपनी इंडिगोगो की वेबसाइट पर डाला गया। अब आस्ट्रेलिया सहित तमाम देशों से आर्डर मिले हैं।