लखनऊ यूनिवर्सिटी के सितारों ने मंगल तक बिखेरी चमक, पिछले सौ साल के दौरान एक से बढ़कर एक निकलीं विभूतियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 18 Nov 2020 03:30 PM IST
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लखनऊ यूनिवर्सिटी
लखनऊ यूनिवर्सिटी - फोटो : अमर उजाला

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विज्ञान के क्षेत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने कई कीर्तिमान गढ़े हैं। भूगर्भशास्त्र के नाम से नया विषय शुरू करने वाले डॉ. बीरबल साहनी लविवि के शिक्षक थे तो मिशन मंगल की निदेशक डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव यहां की पूर्व छात्रा हैं। इसके साथ ही प्रदेश में पहली बार रेडियो प्रसारण का गौरव भी लविवि के नाम रहा है।
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सीमैप और सीडीआरआई के निदेशक भी लविवि के छात्र रह चुके हैं। पिछले सौ साल के दौरान लविवि से विज्ञान के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक विभूतियां हुई हैं। लविवि प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव के अनुसार विज्ञान की पढ़ाई में लविवि ने बुलंदियों को छुआ है। इस समय लखनऊ के साथ ही देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों में लखनऊ के पूर्व छात्र विभिन्न पदों पर हैं।
लविवि में वर्ष 1950 में नक्षत्रशाला भी स्थापित हो चुकी थी। उस समय किसी भी शैक्षणिक संस्था में स्थापित होने वाली यह पहली नक्षत्रशाला थी। गणित एवं खगोलविज्ञान विभाग में प्रो. एएन सिंह ने इसकी स्थापना की थी। यह प्रदेश की पहली तथा देश की कुछ चुनिंदा नक्षत्रशालाओं में से एक थी। इसके माध्यम से विद्यार्थी नक्षत्र देखने और उन्हें पहचानने के साथ उनकी सटीक गणना करना भी सीखते थे।
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