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4010 दरोगाओं की भर्ती रद्द, फिर होगी परीक्षा

Thu, 25 Aug 2016 04:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 25 Aug 2016 04:46 PM IST
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Highcourt cancels SI recruitment.

दरोगा भर्ती मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने सूबे की सिविल पुलिस में दरोगा और प्लाटून कमांडर के पदों पर भर्ती के लिए वर्ष 2011 में जारी चयन प्रक्रिया रद्द कर दी है।

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कोर्ट ने लिखित परीक्षा फिर से कराकर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि दरोगा के 4010 पदों के लिए अभ्यर्थियों का चयन 2015 में हो चुका था। उनकी ट्रेनिंग चल रही है। कोर्ट ने चयन के लिए पहले कराई गई लिखित परीक्षा और बाद की पूरी प्रक्रिया ही रद्द कर दी है।
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न्यायमूर्ति राजन रॉय ने अभिषेक कुमार सिंह व अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर बुधवार को यह फैसला सुनाया। याचियों के अधिवक्ता विधु भूषण कालिया के मुताबिक याचिका में आरोप लगाया गया था कि उक्त चयन में पात्र अभ्यर्थियों को क्षैतिज आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। राज्य सरकार ने कोर्ट में इस याचिका का विरोध किया।

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दो बिंदुओं को लेकर हुआ था विवाद

Highcourt cancels SI recruitment.

1.  50 फीसदी से अधिक हो गया था आरक्षण
ओबीसी कोटे के अभ्यर्थियों को उनके कोटे के अलावा सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित श्रेणी का भी लाभ दे दिया गया था। इससे कुल रिक्त पदों की 77 प्रतिशत सीटें आरक्षित श्रेणी में आ गई थीं। जबकि नियमानुसार 50 फीसदी से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता।

2.  ज्यादा अ‌भ्यर्थियों को दिया लिखित परीक्षा का मौका
नियमानुसार रिक्त पदों की कुल संख्या के तीन गुना अभ्यर्थी ही लिखित परीक्षा में बैठ सकते हैं। पुलिस भर्ती बोर्ड ने इससे काफी अधिक संख्या में अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में मौका दिया।

इन्हीं दो मुद्दों को लेकर समान्य श्रेणी के 28 अभ्यर्थियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

यह है क्षैतिज आरक्षण
इसका अर्थ आरक्षण में आरक्षण देना है। उदाहरण के लिए पिछड़ी जातियों के लिए प्रदेश में 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए 21 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के लिए 2 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है। अब इसमें अगर कोई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित कोटे का है तो उसे इनके लिए तय 2 प्रतिशत आरक्षण उन्हीं के कोटे से दिया जाएगा। मतलब अगर कोई पिछड़ा है तो उसे पिछड़ों के लिए निर्धारित 27 प्रतिशत  से, अनुसूचित जाति का है तो उसे उस 21 प्रतिशत से और अनुसूचित जनजाति का है तो उसे इस वर्ग के लिए निर्धारित 2 प्रतिशत कोटे से आरक्षण दिया जाएगा।

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