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लखनऊ विश्वविद्यालय: सहायक प्रोफेसरों की चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
Tue, 16 Feb 2021 01:02 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 16 Feb 2021 01:02 PM IST
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के 180 पदों पर चल रही चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चयन प्रक्रिया को जारी रखने की छूट देते हुए निर्देश दिया कि वह एंथ्रोपोलाजी विभाग में याची के लिए एक पद खाली रखेगा। न्यायमूर्ति इरशाद अली ने यह आदेश डॉ. प्रीति सिंह की याचिका पर दिया।
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याची ने विवि में सहायक प्रोफेसर के 180 पदों पर भर्ती संबंधी 16 सितंबर 2020 के विज्ञापन में एंथ्रोपोलॉजी विभाग के चार पदों पर नियुक्ति को चुनौती दी है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि विज्ञापन के क्रम में शुरू की गई चयन प्रक्रिया में विश्वविद्यालय को एक इकाई मानकर आरक्षण लागू किया गया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दे रखी है कि विषय को इकाई माना जाएगा। विवि द्वारा विज्ञापन में आरक्षण संबंधी जो मानक लिए गए हैं, जो विधि सम्मत नहीं है। एंथ्रोपोलॉजी विभाग के लिए विज्ञापित सहायक प्रोफेसर के चारो पदों पर आरक्षण लागू कर दिया गया है, जबकि याची सामान्य जाति की है और उक्त पद पर चयनित होने के लिए अर्ह होने के बावजूद आवेदन से वंचित रह गई है।
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उधर, याचिका का विरोध करते हुए विवि के वकील का कहना था कि सात मार्च 2019 को केंद्र सरकार द्वारा 10 फीसदी अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान लागू किया गया। लिहाजा 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा पार हो गई।
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कहा गया कि यूपी लोक सेवा : अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण अधिनियम, 1994 इस मामले में लागू नहीं होता। इसलिए विषयवार आरक्षण नीति नहीं अपनाई गई। बल्कि विवि को एक इकाई के तौर पर मानते हुए आरक्षण लागू किया गया।
दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि यह बिंदु विचारणीय है कि क्या राज्य सरकार एक शासनादेश लाकर केंद्र सरकार द्वारा पारित एक अधिनियम के प्रविधान से यूपी लोक सेवा : अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण अधिनियम, 1994 के प्रावधानों को खत्म कर सकती है।
अदालत ने राज्य सरकार व विवि को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का समय देते हुए अगली सुनवाई 10 मार्च को नियत की है।