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महत्वपूर्ण जानकारी: लखनऊ यूनिवर्सिटी में अगले सत्र से चार साल का होगा स्नातक

Mon, 07 Dec 2020 03:30 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 07 Dec 2020 03:30 PM IST
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graduation will be four years from next session in lucknow university
लखनऊ यूनिवर्सिटी - फोटो : amar ujala
लखनऊ विश्वविद्यालय में अगले साल से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्नातक पाठ्यक्रम चार साल का हो जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मौखिक सहमति के बाद बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, अंतर विषयक स्थानांतरण को लागू करना अभी चुनौती बना हुआ है, जिस पर मंथन जारी है। 
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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कई बातों पर फोकस किया गया है। इसके अनुसार क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई, वोकेशनल कोर्स तथा विभिन्न विषयों के बीच क्रेडिट और अंतर विषयक स्थानांतरण मुख्य रूप से शामिल है। हिंदी भाषी राज्य होने की वजह से यहां भाषा संबंधी कोई समस्या नहीं है।
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विवि कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने साफ कर दिया है कि अगले साल से उनके यहां स्नातक पाठ्यक्रम चार साल का होगा। विद्यार्थियों के पास यह विकल्प भी रहेगा कि वे तीन साल का स्नातक कर लें, पर ऐसा करने पर परास्नातक की पढ़ाई दो साल की करनी होगी।
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वहीं, चार साल का स्नातक होने पर परास्नातक सिर्फ एक साल का ही रह जाएगा। विवि कुछ बीवोक पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है इसलिए व्यवसायिक पाठ्यक्रम की समस्या नहीं आने वाली है। असल समस्या स्नातक स्तर पर अंतर विषयक स्थानांतरण की है। लविवि के कई विभाग में शिक्षकों की संख्या बेहद कम है। विद्यार्थियों के एक विषय से दूसरे में स्थानांतरण होने की सूरत में विभागों का बैलेंस बिगड़ जाएगा। इसलिए लविवि इसके विकल्प तलाश रहा है।
 

इस सत्र से परास्नातक में मिलेगी सुविधा 

लखनऊ विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर भले ही अंतर विषयक स्थानांतरण चुनौती बना हुआ हो, पर परास्नातक में ऐसा नहीं है। विवि ने अपने यहां परास्नातक के लिए चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के आधार पर नया सिलेबस तैयार किया है।

इसमें क्रेडिट के साथ ही अंतर विषयक ट्रांसफर की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अनुसार कला वर्ग के विद्यार्थी चाहे तो विज्ञान संकाय और विज्ञान संकाय के विद्यार्थी अपने मर्जी से किसी भी संकाय का कोई भी विषय पढ़ सकता है। प्रति सेमेस्टर में इसकी सीमा दो पेपर की होगी। इस तरह से यह व्यवस्था नई शिक्षा नीति की मंशा से काफी करीब है। 

लखनऊ उच्च न्यायालय में विश्व का सर्वश्रेष्ठ सीबीसीएस सिस्टम परास्नातक स्तर पर लागू किया गया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार अगले साल से चार साल के स्नातक पाठ्यक्रम पर भी सहमति बन चुकी है। स्नातक स्तर पर अंतर विषय स्थानांतरण पर मंथन चल रहा है। प्रयास किया जाएगा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूरी तरह से लविवि के सिलेबस में लागू किया जाए। - प्रो. आलोक कुमार राय, कुलपति, लविवि
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