एमबीए की ओर बढ़ा लड़कियों का रुझान, सात सालों का टूटा रिकॉर्ड
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वर्ष 2015 में कुल 2,18,664 अभ्यर्थियों ने कैट के लिए आवेदन किया था, जबकि इस साल यह संख्या बढ़कर 2,32,434 हो गई है। कैट-2016 के कन्वेनर प्रो. आरके बंडी ने बताया कि 2015 की तुलना में इस साल महिला अभ्यर्थियों की संख्या में एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
गत वर्ष के कुल आवेदन में 68 फीसदी पुरुष और 32 फीसदी महिला अभ्यर्थी थीं। लेकिन इस साल कुल आवेदन में महिला अभ्यर्थियों की संख्या बढ़कर 33 फीसदी हो गई है। प्रो. बंडी ने बताया कि इस साल कुल 13,770 आवेदन बढ़े हैं। अधिक आवेदनों में लगभग आधे महिला अभ्यर्थियों के हैं। इससे पता चलता है कि महिला अभ्यर्थियों की संख्या पुरुष की संख्या बढ़ने की तुलना में ज्यादा है।
दिव्यांग अभ्यर्थियों में तो महिला की संख्या 2.72 फीसदी तक बढ़ी है। 2015 में कुल 901 दिव्यांग अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिसमें महिला की संख्या 14.76 फीसदी थी। वहीं इस साल कुल आवेदन करने वाले 938 दिव्यंागों में महिला 17.48 फीसदी हैं।
महिला अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ना अच्छा संकेत
देश के 20 आईआईएम में लगभग 4,017 सीटें हैं। इनके लिए इस साल 2,32,434 आवेदन आए हैं। इस हिसाब से एक सीट के लिए लगभग 58 अभ्यर्थी कतार में हैं। सिर्फ आईआईएम ही नहीं अन्य संस्थानों में भी प्रबंधन के कोर्स में छात्राओं की संख्या में इजाफा हो रहा है।
2016 के दाखिलों में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रबंधन विभाग में भी छात्राओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। स्थिति यह है कि गत वर्ष तक बीबीए के जिस कोर्स में छात्राओं की कुल हिस्सेदारी 24 फीसदी हुआ करती थी वह इस साल सीधे 68 फीसदी पहुंच गई है।बीबीए के अन्य स्पेशलाइजेशन में भी ऐसी ही स्थिति है।
एलयू के बीबीए व बीकॉम ऑनर्स कोर्स की बात करें तो 2015-16 में छात्राओं की संख्या 36.79 फीसदी थी, जबकि सत्र 2016-17 में यह बढ़कर 60.53 फीसदी हो गई। बीबीए इंटरनेशनल बिजनेस के कोर्स में छात्राओं की संख्या 70 फीसदी है, जबकि गत वर्ष यह मात्र 29.31 फीसदी थी।
एमबीए में गत सत्र की तुलना इस बार एलयू के नौ में से पांच एमबीए कोर्सेज में छात्राओं की संख्या बढ़ी है।जबकि दो कोर्सेज में इनकी भागीदारी 50 फीसदी है। इनमें से एमबीए हृयूमन रिसोर्स एंड इंडस्ट्रियल रिलेशन में तो इस साल 80 फीसदी छात्राओं ने प्रवेश लिया है, जबकि छात्र 20 फीसदी ही हैं। एमबीए कॉर्पोरेट मैनेजमेंट में भी छात्राओं का प्रतिशत 54.55 से बढ़कर 57.41 हो गया है।
कुल आवेदनों में महिला अभ्यर्थियों की संख्या एक फीसदी जबकि दिव्यांग में 2.72 फीसदी बढ़ी है। यह अच्छा साइन है, लेकिन संतोषजनक नहीं। हमें अपनी सामाजिक व्यवस्था में बदलाव लाना होगा जिससे न सिर्फ सामान्य बल्कि दिव्यांग अभ्यर्थियों में भी महिलाओं को आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। - प्रो. आरके बंडी, कन्वीनर, कैट- 2016