लखनऊ विश्वविद्यालय: चेक क्लोन करके छह खातों में ट्रांसफर कराई गई थी रकम
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लखनऊ विश्वविद्यालय के चेक का क्लोन बनाकर खाते से 1.09 करोड़ रुपये उड़ाने वाले तीन आरोपियों को हसनगंज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए लोगों में पटना के दानापुर निवासी रोनित मेसर्स शाह एजेंसी के नाम से फर्म चलाता है।
विश्वविद्यालय के खाते से निकाली गई रकम का कुछ हिस्सा उक्त कंपनी के खाते में जमा कराया गया था। बाकी दो आरोपी नई दिल्ली के बदरपुर निवासी सुशील कुमार यादव और बिहार के अलवर में रहने वाला अमरेंद्र कुमार बिचौलिए हैं। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि तीनों ने पूछताछ में चेक क्लोन करके रुपये उड़ाने का मास्टरमाइंड दिल्ली निवासी पंकज जैन और पटना के मानस को बताया है। उनकी तलाश की जा रही है।
एसएसपी ने बताया कि पकड़े गए आरोपी 10 प्रतिशत कमीशन के लालच में अपने खाते में रुपये ट्रांसफर कराते थे। मास्टरमाइंड लखनऊ विश्वविद्यालय में काम के भुगतान की रकम खाते में जमा कराने का झांसा देते थे। उन्होंने मेसर्स शाह एजेंसी के अलावा केके कंस्ट्रक्शन, दिव्या इलेक्ट्रिकल्स, मेसर्स विश्वकर्मा, मेसर्स मीना एंड संस और मेसर्स वैष्णव इंटरप्राइजेज के खाते में भी रुपया ट्रांसफर कराया था।
पूछताछ में आरोपी सुशील ने बताया कि पंकज से उसकी मुलाकात दिल्ली में हुई थी। उसने खाते में रुपया मंगाने पर कमीशन का लालच दिया था। अमरेंद्र ने बताया कि वह टैक्सी चलाता है। पंकज से उसकी मुलाकात टैक्सी बुक कराने पर हुई थी। उसके कहने पर एक खाताधारक से क्लोन चेक कैश कराया था। इस काम में पांच प्रतिशत रकम उसने व पांच प्रतिशत रकम खाताधारक ने ली थी।
पूछताछ में सामने आई ये बातें
रोनित गुप्ता ने बताया कि वह मेसर्स शाह एजेंसी के नाम से कारोबार करता है। कंपनी उसकी भाभी के नाम पर है। अमरेंद्र के कहने पर ही उसने लखनऊ विश्वविद्यालय के चेक अपने बैंक खाते में कैश कराए थे। पंकज कहां रहता है? इस बारे में जानकारी से आरोपियों ने इनकार किया है।
पुलिस ने उसका मोबाइल नंबर खंगाला तो सिमकार्ड फर्जी आईडी से लिए जाने की जानकारी मिली। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से चार अक्तूबर को हसनगंज कोतवाली में मामले की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने छानबीन के बाद रोनित गुप्ता, सुशील और अमरेंद्र को पकड़ा था।
एसएसपी ने बताया कि छानबीन में लखनऊ विश्वविद्यालय और बैंक अधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आ रही है। लखनऊ विश्वविद्यालय के चेक ठगों तक पहुंचाने के पीछे उनका ही हाथ है। विश्वविद्यालय व बैंक के 10-12 लोगों पर नजर है। उनकी भूमिका खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि पंकज और मानस का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार, हरियाणा तक फैला है।