फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Fake approval of teacher in self finance college

लविवि ने रद्द किया 50 सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के 89 शिक्षकों का फर्जी अनुमोदन

Sun, 29 Oct 2017 06:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 29 Oct 2017 06:54 PM IST
विज्ञापन
Fake approval of teacher in self finance college
लखनऊ विश्वविद्यालय - फोटो : डेमो

लखनऊ विश्वविद्यालय ने 50 सहयुक्त डिग्री कॉलेजों के 89 शिक्षकों का अनुमोदन रद्द कर दिया है। इन शिक्षकों का अनुमोदन विश्वविद्यालय से था, लेकिन लंबे समय से ये शिक्षक इन कॉलेजों में पढ़ा नहीं रहे थे। कॉलेजों ने इनका अनुमोदन करा रखा था।

विज्ञापन


इनमें से ज्यादातर शिक्षकों ने खुद इसकी सूचना दी है कि वे इन कॉलेजों में नहीं पढ़ा रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें कॉलेज में अनुमोदित दिखाया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल के डीन प्रो. आरआर यादव की संस्तुति पर कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने अनुमोदन रद्द कर दिया है।
विज्ञापन


सीडीसी डीन प्रो. आरआर यादव ने शिक्षकों के इन खाली पदों पर दोबारा अनुमोदन कराने का निर्देश दिया है। लविवि से सहयुक्त कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की ही डिग्री मिलती है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन इनको मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


डिग्री स्तर पर कॉलेज को मान्यता जारी करते समय पढ़ाने वाले शिक्षकों का ब्योरा भी देना होता है। लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रति-कुलपति की अध्यक्षता वाली समिति के सामने साक्षात्कार के बाद शिक्षकों का अनुमोदन होता है। जानकारों का कहना है कि कई कॉलेज इसमें फर्जीवाड़ा करते हैं।

अर्ह शिक्षकों का अनुमोदन विवि से करा लेते हैं, लेकिन बाद में अनुमोदित शिक्षकों के बजाय कम वेतन पर अनर्ह शिक्षकों से पढ़ाई करवाई जाती है। कई बार शिक्षकों को पता ही नहीं होता है कि उनका अनुमोदन विवि से है।

विवि और कॉलेजों की वेबसाइट पर शिक्षकों के नाम जारी होने के बाद शिक्षकों ने लविवि को सूचित किया है कि वे संबंधित कॉलेज में नहीं पढ़ा रहे हैं। इसलिए उनका नाम अनुमोदित सूची से हटा दिया जाए। विवि ने इसके बाद यह कार्यवाही की है।

अनर्ह शिक्षकों से कराई जाती है पढ़ाई

राज्य सरकार के नियमों के अनुसार कॉलेज को मान्यता जारी करते समय पढ़ाने वाले शिक्षकों का ब्योरा भी देना होता है। बीएड, बीटीसी या फिर सामान्य डिग्री कॉलेज में अनुमोदन के लिए शिक्षक को समिति के सामने साक्षात्कार से गुजरना होता है। इसके बाद ही उनका अनुमोदन किया जाता है। यह अनुमोदन नियमित होता है। इसलिए शिक्षक एक साथ दो कॉलेज में नहीं पढ़ा सकता। आरोप है कि कॉलेज अर्ह शिक्षकों का अनुमोदन विवि से करा लेते हैं, लेकिन बाद में अनुमोदित शिक्षकों के बजाय कम वेतन पर अनर्ह शिक्षकों से पढ़ाई करवाई जाती है।

सूची ऑनलाइन होने से आया बदलाव

राजभवन और शासन की फटकार के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय ने सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षकों की सूची वेबसाइट पर डालने का निर्देश दिया है। इसका असर दिखाई देने लगा है। शिक्षकों की सूची सार्वजनिक होने के बाद शिक्षकों के अनुमोदन में होने वाला खेल उजागर हो रहा है। शिक्षक खुद आकर कॉलेज में तैनात न होने की सूचना दे रहे हैं। इससे उम्मीद बंध रही है कि निजी कॉलेजों में अनुमोदन में होने वाले खेल पर रोक लगेगी।

दोबारा कराना होगा अनुमोदन

डीन सीडीसी प्रो.आरआर यादव ने बताया कि कुलपति ने शिक्षकों का अनुमोदन रद्द कर दिया है। कॉलेज संचालकों को अब इन खाली पदों पर शिक्षकों का अनुमोदन कराना होगा। अनुमोदन न लेने पर उनके यहां शिक्षकों के पद खाली माने जाएंगे। ऐसा न करने पर उनकी मान्यता भी जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed