फरमान जारी विश्वविद्यालयों को करवाने होंगे छात्रसंघ चुनाव
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राज्य विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव कराने में अब आनाकानी नहीं कर पाएंगे। शासन ने राज्य विश्वविद्यायलों के कुलपतियों को छात्रसंघ चुनाव कराने के राज्य सरकार के फैसले का कड़ाई से पालन कराने का फरमान जारी कर दिया है। माना जा रहा है कि चुनावी साल में सरकार ने युवा छात्रों को साधने के लिए नए सिरे से यह आदेश जारी किया है।
प्रदेश सरकार ने इसी साल 15 जनवरी को राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को लिंगदोह कमेटी की संस्तुतियों के अनुसार छात्रसंघ चुनाव कराने को निर्देशित किया था।
मगर, प्रदेश सरकार को लगातार ये शिकायतें मिल रही थी कि विश्वविद्यालयों के कुलपति चुनाव में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसे युवा छात्रों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही थी।
बुधवार को प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जितेंद्र कुमार ने समस्त राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के लिए इस संबंध में नए सिरे से आदेश जारी किया। उन्होंने कुलपतियों से लिंगदोह समिति की संस्तुतियों के अनुसार छात्रसंघ चुनाव कराने के फैसले का कड़ाई से अनुपालन करने को कहा है। प्रमुख सचिव ने इस फैसले के क्रियान्वयन के लिए राज्य विश्वविद्यालय के कुलसचिवों को भी निर्देशित किया है।
लिंगदोह समिति की मुख्य सिफारिशें
- छात्र को विश्वविद्यालय के नियमों का पालन करना होगा।
- कम से कम 75 फीसदी उपस्थिति हो।
- मुख्य पदों के लिए एक बार ही चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा।
- छात्र का कोई आपराधिक रिकार्ड न हो। इसमें उस पर कोई मुकदमा भी नहीं होना चाहिए।
- छात्रसंघ चुनाव के लिए प्रत्याशी को केवल 5000 रुपये तक खर्च करने की अनुमति होगी।
- जुलूस निकालने, मीटिंग करने की अनुमति तो होगी, लेकिन इस दौरान कक्षाएं डिस्टर्ब न हों।
- कॉलेज में लाउडस्पीकर, गाड़ियों और जानवरों से प्रचार करने पर रोक होगी।
क्या है चुनौती
छात्रनेता चुनाव जीतने के लिए धनबल और बाहुबल का प्रयोग करते आए हैं। चंदा वसूली, छात्र हिंसा और अराजकता परिसरों में हावी होने लगती है। विश्वविद्यालयों का शैक्षिक सत्र प्रभावित होने लगता है। विश्वविद्यालय व जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि लिंगदोह समिति की सिफारिशें सख्ती से लागू हों ताकि चुनाव समस्या न बन जाएं।