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JEE एडवांस का रिजल्ट घोषित: दिव्यांशु बने कानपुर जोन के सेकंड टॉपर

Tue, 14 Jun 2016 06:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 14 Jun 2016 06:51 PM IST
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divanshu saxena second topper in kanpur zone.
अपने परिवार के साथ दिव्यांशु - फोटो : amar ujala

जेईई एडवांस के रिजल्ट में एक बार फिर राजधानी लखनऊ के होनहारों ने अपनी चमक बिखेरी। गोमती नगर के दिव्यांशु सक्सेना ने 64वीं रैंक हासिल करके कानपुर जोन में दूसरा स्थान पाया है। वहीं फैजुल्लागंज के आशुतोष ने 221वीं रैंक के साथ कानपुर जोन में नौंवा स्थान हासिल किया।

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लखनऊ के गोमती नगर के विभवखण्ड में रहने वाले दिव्यांशु का सपना आईआईटी दिल्ली से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग का है।

वे कहते हैं इसके बाद कहीं और नौकरी के बजाय एंटरप्रेन्योर बनना चाहते हैं। केंद्र सरकार की ‘स्टार्ट अप’ और ‘मेक इन इंडिया’ से उन्हें यह प्रेरणा मिली है। सिटी मॉन्टेसरी स्कूल के छात्र दिव्यांशु ने 96.5 फीसदी अंकों के साथ इसी साल इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण की है।
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दिव्यांशु के पिता मुकेश सक्सेना आर्मी में हैं, जबकि मां निधि सक्सेना गृहिणी हैं। दिव्यांशु ने अपनी सफलता का राज बताते हुए कहा कि फिजिक्स में जहां कॉन्सेप्ट क्लियर करने पर हमेशा ध्यान दिया वहीं मैथ्स में लगातार प्रैक्टिस की।
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केमिस्ट्री में चीजों समझने के साथ याद भी करना पड़ा। हालांकि मैंने आईआईटी की तैयारी शुरू की तो उस समय लक्ष्य क्वालिफाई करना भर ही था। जैसे-जैसे तैयारी आगे बढ़ी तो समझ आया कि लक्ष्य पाने के लिए अच्छी रैंक लानी ही होगी।

आशुतोष कुमार वर्मा -- कानपुर जोन में नौंवा स्थान

divanshu saxena second topper in kanpur zone.

रैंक-- 221 (कानपुर जोन में नौंवा स्थान)
पिता-- अवधेश वर्मा, सरकारी कर्मचारी
मां-- संध्या रानी वर्मा, गृहिणी

फैजुल्लागंज निवासी आशुतोष आईआईटी मुंबई से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करना चाहते हैं। इसी साल 95.25 फीसदी अंकों के साथ इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने वाले आशुतोष को जेईई मेन्स में 270 अंक मिले थे।

ऐसे की तैयारी-- रोजाना चार से पांच घंटे की पढ़ाई की। इस दौरान सबसे ज्यादा फोकस केमेस्ट्री पर रहा। क्योंकि केमिस्ट्री  क्योंकि वह इनका सबसे कमजोर विषय रहा। एनसीईआरटी की किताबों ने काफी मदद की।

टिप्स-- पढ़ाई में रेग्युलर रहना जरूरी है। जो भी क्लास में पढ़ाया जाए उसे रिवाइज करते रहें।

मनन अग्रवाल ही रही 422वीं रैंक

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पिता-- मनमोहन अग्रवाल, केमिकल इंडस्ट्री
मां-- सीमा अग्रवाल, गृहिणी

पिता की केमिकल इंडस्ट्री होने की वजह से मनन का रुझान इस क्षेत्र में पहले से ही रहा। मनन आईआईटी मुंबई में केमिकल इंजीनियरिंग में दाखिला चाहते हैं। हालांकि इसके बाद उनका लक्ष्य सिविल सर्विसेज है। इसी साल मनन ने 99 फीसदी अंकों केसाथ इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण की है।

ऐसे की तैयारी-- मनन ने बताया कि फिजिक्स में जहां कॉन्सेप्ट क्लियर करने पर अधिक ध्यान दिया वहीं केमिस्ट्री में फैक्चुअल लर्निंग पर। जैसे किस कम्पाउंड की क्या वैल्यू है, रिएक्शंस आदि को याद करना पड़ा।

टिप्स-- स्कूल हो या कोचिंग क्लास में कॉन्संट्रेशन जरूरी है। सिलेबस को रटने की जगह कॉन्सेप्ट समझें।

समृद्घ जोशी की रही 464वीं रैंक

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पिता-- भैरवदत्त जोशी, सरकारी कर्मचारी
मां-- दीपा जोशी, गृहिणी

एसईई में बीटेक प्रवेश परीक्षा के टॉपर व जेईई मेन्स में 308 अंक हासिल करने वाले समृद्ध ने आईआईटी के दरवाजे का ताला भी खोल लिया है। जहां अधिकतर स्टूडेंट्स की पहली पसंद कम्प्यूटर साइंस है वहीं समृद्ध आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करना चाहते हैं। बीटेक के बाद वह इसी क्षेत्र में रिसर्च करेंगे या सिविल सर्विसेज की राह चुनेंगे अभी तय नहीं। इंटरमीडिएट परीक्षा में समृद्ध को 97.75 फीसदी अंक मिले थे।

ऐसे की तैयारी-- फिजिक्स काफी पसंद है। हालांकि सारे सब्जेक्ट की थारो स्टडी की।

टिप्स-- परीक्षा में कॉन्सेप्ट क्लियर होने के साथ ही समय प्रबंधन अच्छा होना जरूरी है।

विक्रम बर्नवाल ही रही 494वीं रैंक

divanshu saxena second topper in kanpur zone.

पिता-- गोरखनाथ बर्नवाल, आर्मी
मां-- शशिबाला बर्नवाल, गृहिणी

आईआईटी में जाना है तो जीवन के दो साल कठिन तपस्या जरूरी है। यह कहना है कैंट निवासी विक्रम बर्नवाल का। विक्रम आईआईटी दिल्ली से कम्प्यूटर साइंस इंजीनियिरंग करना चाहते हैं। विक्रम कहते हैं कि कभी-कभी पढ़ाई के दौरान वह ओवर कॉन्फिडेंट हो जाता था, तब आठवीं में पढ़ने वाली बहन ट्विंकल दूसरे लोगों केऐसे उदाहरण देती कि मैं सब भूलकर और मेहनत से तैयारी करने लगता। आर्मी पब्लिक स्कूल की नेहरू मार्ग शाखा से 89 फीसदी अंकों के साथ इंटमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण किया।

ऐसे की तैयारी-- फिजिक्स और मैथ्स में ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस की। केमिस्ट्रीमें चीजों को याद किया।

टिप्स-- तैयारी के समय सभी तरह के भटकाव से बचें, समय प्रबंधन के साथ स्मार्ट स्टडी जरूरी है।

मनन भाटिया, रैंक- 662

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पिता-- अरविंद भाटिया, केमिकल इंजीनियर, ओएनजीसी
मां-- डॉ. सोनिका भाटिया, शिक्षिका, आईटी कॉलेज

मुझे तो इंजीनियरिंग करनी ही नहीं, बल्कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बंगलूरू से बीएससी करने के बाद साइंस के रिसर्च में ही जाना है। यह कहना है मनन भाटिया का। मनन ने क्लास आठवीं के बाद से ही इंजीनियरिंग में आने का लक्ष्य चुना लेकिन कुछ समय बाद यह बदल गया। स्कूल केदिनों से ही वह फिजिक्स और मैथ्स के ओलम्पियाड में जाने लगे। 2013 में जूनियर साइंस ओलम्पियाड में गोल्ड मेडल मिला। इसी साल मई में हॉन्गकॉन्ग में हुए एशियन फिजिक्स ओलम्पियाड में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने के बाद अब 11 जुलाई स्विट्जरलैंड में होने वाले इंटरनेशनल फिजिक्स ओलम्पियाड में हिस्सा लेने जा रहे हैं। क्योंकि मनन ने इंजीनियरिंग की तैयारी शुरू की सिर्फ इसीलिए जेईई में शामिल हुए।

टिप्स-- जिस चीज में इंटरेस्ट हो उसी को करें। संभव है कि समय के साथ नई चीजों की जानकारी होने पर लक्ष्य बदल जाएं। अपना जहां खुद बनाएंगे।

संदर्श गुप्ता, रैंक- 805 रैंक

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पिता-- प्रताप भानु, सीनियर ऑडिटर, पीएनबी
मां-- सुषमा, गृहिणी

आईआईटी से कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग करने के बाद एंटरप्रेन्योरशिप में जाना है। स्टार्ट अप इंडिया जैसी योजनाओं का फायदा मिलेगा। किसी के यहां नौकरी करने से बेहतर है दूसरों को रोजगार दूं। यह कहना है संदर्श गुप्ता का। संदर्श को खाली समय में किसी भी मुद्दे पर रिसर्च करना पसंद है। इसके लिए वह इंटरनेट और रिफरेस बुक्स का सहारा लेते हैं। इसी साल संदर्श ने 97 फीसदी अंकों केसाथ इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की है।

ऐसे की तैयारी-- बेहतर तैयारी के लिए किताबें पढ़ने के साथ ही अधिक से अधिक मॉक टेस्ट देते रहे इससे बेहतर प्रैक्टिस हुई।

टिप्स-- परीक्षा के कुछ समय पहले जितना भी पढ़ा हो सबका रिवीजन करना जरूरी है। मॉक टेस्ट की अधिक प्रैक्टिस करें।

अनुराग पांडेय, रैंक- 872

divanshu saxena second topper in kanpur zone.

पिता-- संजय कुमार पांडेय, फोरेंसिक साइंटिस्ट
मां-- नंदिनी पांडेय, गृहिणी

अनुराग पांडेय का लक्ष्य मैकेनिकल इंजीनियरिंग है। अनुराग मानते हैं कि यह ऐसी ब्रांच है जिसके एक्सपर्ट्स की मांग कभी कम नहीं होगी। तकनीकी विकास केसाथ मशीनों का उपयोग भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

ऐसे की तैयारी-- जब से तैयारी शुरू की तय लिया कि रोजाना पांच घंटे पढ़ाई के लिए देने हैं। बस इन्हीं पांच घंटो में पूरे सिलेबस को डिवाइड करके तैयारी करते रहे। इस साल दो महत्वपूर्ण निर्णय हुए हैं।

टिप्स-- कॉन्सेप्ट समझने के लिए उसका प्रैक्टिकल इम्प्लीमेंटेशन जानना जरूरी है। टीचर जो पढ़ाएं उस पर ध्यान दें।

लखनऊ से 3,730 जेईई एडवांस में शामिल हुए थे
जेईई एडवांस की रैंक से देश के 22 आईआईटी और धनबाद के इंडियन स्कूल ऑफ माइंस की कुल मिलाकर 10,575 सीटों पर प्रवेश किए जाने हैं। लखनऊ से 3,730 जेईई एडवांस में अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। एक्सपर्ट एनएन मिश्रा ने बताया कि इंडीविजुअल विषयों फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथ्स में न्यूनतम 10-10 फीसदी और तीनों में मिलाकर कुल 20 फीसदी या अधिक अंक पाने वाले सभी अभ्यर्थियों को रैंक दी गई है।

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